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असम की 83 हजार हेक्टेयर जमीन पर पड़ोसी राज्यों ने किया अतिक्रमण, वन मंत्री ने विधानसभा में किया खुलासा

वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने बताया कि असम के जंगलों की 35 लाख हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण है। राज्य के लोगों के अलावा पड़ोसी राज्य और चाय बागानों ने भी असम की वन भूमि के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है।

Assam Forest- India TV Hindi
Image Source : ASSAMGOV असम के जंगल

असम की 35 लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि में अलग-अलग लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। यह खुलासा असम विधानसभा में वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने किया। उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए हैरान करने वाले आंकड़े पेश किए। असम का कुल क्षेत्रफल 78 लाख हेक्टेयर है। इसमें से 26.8 लाख हेक्टेयर वन भूमि है, लेकिन इसके बड़े हिस्से पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। राज्य के कुल क्षेत्रफल का 34 फीसदी से ज्यादा हिस्सा जंगलों के अंतर्गत आता है। इस पर स्थानीय लोगों के अलावा पड़ोसी राज्यों और चाय बागानों का कब्जा है।

वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि असम में 35 लाख हेक्टेयर से अधिक आरक्षित वन भूमि पर पड़ोसी राज्यों सहित अन्य राज्यों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2021 से अब तक करीब 11,000 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। 

83,811 हेक्टेयर भूमि पर पड़ोसी राज्यों का कब्जा

असम गण परिषद के विधायक प्रदीप हजारिका के एक सवाल का जवाब देते हुए पटवारी ने कहा कि राज्य में अतिक्रमण के तहत कुल आरक्षित वन क्षेत्र करीब 3,35,322. 60 हेक्टेयर है। इनमें से 2,50,350. 0666 हेक्टेयर भूमि पर राज्य के लोगों ने अतिक्रमण किया है, जिनमें से 83,811. 3978 हेक्टेयर भूमि पर पड़ोसी राज्यों ने और 1,161. 136 हेक्टेयर भूमि पर चाय बागानों ने कब्जा किया है। मंत्री ने कहा कि असम वन अधिनियम, 1891 के अनुसार नियमित रूप से बेदखली अभियान चलाए जा रहे हैं और वन रक्षकों द्वारा नियमित गश्त की जा रही है।

असम में 323 आरक्षित वन

वन मंत्री ने कहा कि 2021-22 से दिसंबर 2024 तक कुल 10,905.859 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया गया है। पटवारी ने कहा कि वर्तमान में राज्य में 323 आरक्षित वन हैं। असम में 18 वन्यजीव अभयारण्य हैं। इनके अलावा, असम में 5 राष्ट्रीय उद्यान भी हैं। ये सभी संरक्षित क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। (पीटीआई)