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मणिपुर में गवर्नर की अपील का हुआ असर, 3 जिलों में लौटाए गए लूटे हुए इतने हथियार

मणिपुर में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की अपील के बाद 3 जिलों में 15 हथियार पुलिस को सौंपे गए। इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई पुलिस थाने में एक SMC कार्बाइन, डबल बैरल गन, और हैंड ग्रेनेड समेत 4 हथियार सरेंडर किए गए।

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Image Source : X.COM/MANIPUR_POLICE 3 जिलों में कम से कम 15 हथियार पुलिस को सौंपे गए हैं।

इंफाल: हिंसा प्रभावित मणिपुर में लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने के लिए राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की अपील का असर होने लगा है। गवर्नर के आग्रह करने के कुछ दिनों बाद 3 जिलों में कम से कम 15 हथियार पुलिस को सौंप दिए गए हैं। एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए मंगलवार को बताया कि इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई पुलिस थाने में एक SMC कार्बाइन सहित एक मैगजीन और एक डबल बैरल गन, और 3 हैंड ग्रेनेड सहित 4 हथियारों को पुलिस को सौंप दिया गया।

‘सागोलमांग पीएस में लोगों ने 5 हथियार पुलिस को सौंपे’

अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा एंड्रो पुलिस थाने को एक सेल्फ-लोडिंग राइफल सौंपी गई। इंफाल पूर्व जिले के सागोलमांग पीएस में लोगों ने 5 हथियार पुलिस को सौंपे। एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि इंफाल पूर्व जिले के हीनिंगंग थाने के पुलिसकर्मियों के समक्ष एक 9 MM पिस्तौल और गोला-बारूद सौंपा गया। उन्होंने बताया कि इसके अलावा चुराचांदपुर में भी 4 बंदूकें पुलिस को सौंपी गईं। भल्ला ने 20 फरवरी को लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को 7 दिनों के भीतर स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने का आग्रह किया था।

‘समयसीमा खत्म होने के बाद सुरक्षाबल कार्रवाई करेंगे’

गवर्नर भल्ला ने आश्वासन दिया था कि इस अवधि के दौरान हथियार छोड़ने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी। मणिपुर के मुख्य सचिव पीके सिंह ने रविवार को कहा था कि अगर कोई हथियार छोड़ना चाहता है तो लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने के लिए दिया गया 7 दिन का समय पर्याप्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे हथियार बरामद करने के लिए समयसीमा खत्म होने के बाद सुरक्षाबल कार्रवाई करेंगे।

सूबे में जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं

मई 2023 से इंफाल घाटी में मेइती और आसपास की पहाड़ियों पर बसे कुकी-जो ग्रुप्स के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। CM एन. बीरेन सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद मणिपुर में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इसके बाद केंद्र ने 13 फरवरी को पूर्वोत्तर के इस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, मणिपुर विधानसभा को सस्पेंड कर दिया गया है। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है। (भाषा)