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बस पर लिखे राज्य का नाम ढकने को लेकर इंफाल घाटी में हुआ जोरदार प्रदर्शन, लोगों ने दो सरकारी ऑफिस पर लगा दिया ताला

मणिपुर के इंफाल घाटी में जोरदार प्रदर्शन हो रहा है, कारण है कि यहां एक सरकारी बस पर लिखे राज्य के नाम को कथित तौर पर ढक दिया गया था।

manipur- India TV Hindi
Image Source : PTI मणिपुर के इंफाल घाटी में प्रदर्शन

इंफाल: मणिपुर में एक बार फिर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, इस बार कारण बना है एक सरकारी बस पर लिखे राज्य का नाम, जिसे ढक दिया गया था। बस इस मुद्दे को लेकर मेइती समूहों के संगठन ‘कॉर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटेग्रिटी’ (कोकोमी) की छात्र इकाई ने इंफाल पूर्वी जिले जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सरकारी ऑफिस में जड़ा ताला

इतना ही नहीं विरोध जताते हुए मेइती समूहों के संगठन ‘कॉर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटेग्रिटी’ (कोकोमी) की छात्र इकाई ने जिले के दो केंद्रीय कार्यालयों पर भी ताला लटका दिया। कोकोमी के कार्यकर्ता लाम्फेलपट स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में घुस गए और कर्मचारियों से भवन से निकल जाने को कहा, फिर इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मेन गेट पर ताला लगा दिया।

जियोलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया के कार्यालय पर भी ताला

इसके बाद कुछ और कार्यकर्ताओं ने कुछ किलोमीटर दूर स्थित जियोलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया के कार्यालय पर भी ताला जड़ दिया। साथ ही राज्यपाल के खिलाफ 'माफी मांगो या मणिपुर छोड़ो' जैसे नारे लगाए। जिले के लामलोंग में, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ‘‘मणिपुर को विघटित करने’’ की कोशिशों के खिलाफ नारे लगाते हुए एक मार्च निकाला, जो उपायुक्त कार्यालय की ओर जा रहे थे पर इस मार्च को सुरक्षा बलों ने पोरोमपात चौराहे पर रोक दिया।

5 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला

प्रदर्शनकारियों ने इंफाल पश्चिम जिले में सिंगजामेई से लिलोंग तक 5 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई गई। वहीं, बिष्णुपुर जिले के नाम्बोल और बिष्णुपुर शहर में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए गए। ये प्रदर्शनकारी कोकोमी, इंफाल पूर्वी जिले के ग्वालताबी में हुई घटना पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

क्यों हो रहा प्रदर्शन?

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने एक सरकारी बस को, जिसमें सरकार 20 मई को उखरूल जिले में शिरुई लिली उत्सव को कवर करने के लिए पत्रकारों को ले जा रही थी, ग्वालताबी चौकी के पास रोक लिया था। साथ ही, सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) के कर्मचारियों को बस के शीशे पर लिखे राज्य के नाम को कागज से ढकने के लिए मजबूर किया।

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