अकाल तख्त के सामने पेश हुए पंजाब के सभी सिख मंत्री, बेअदबी रोकथाम कानून पर दिया स्पष्टीकरण
यह विधेयक 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। हालांकि, इसी समय अकाल तख्त ने विरोध जताया था, लेकिन कानून में बदलाव नहीं किया गया।

पंजाब के सभी सिख विधायक और सिख कैबिनेट मंत्री सोमवार को अमृतसर स्थित अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए। गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकथाम कानून के संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। वहीं, गैर-सिख कैबिनेट मंत्रियों से इस मामले पर अपने विचार लिखित रूप में देने को कहा गया, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब नहीं किया गया। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने 15 जून को सभी दलों के सिख विधायकों और सिख मंत्रियों को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026'को सिख पंथ से सलाह-मशविरा किए बिना पारित किया गया, इसलिए इस पर स्पष्टीकरण आवश्यक है।
अकाल तख्त ने पहले भी पंजाब सरकार से इस कानून की कुछ धाराओं को हटाने की मांग की थी और कहा था ये प्रावधान ''गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत (सिख समुदाय) की भावनाओं के विरुद्ध हैं।'' यह विधेयक 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है। पंजाब सरकार के कुल 29 विधायक और नौ मंत्री श्री अकाली तख्त के समक्ष पेश हुए। इन 29 विधायकों में से सात कांग्रेस से, दो शिरोमणि अकाली दल से और एक निर्दलीय शामिल है।
अकाल तख्त ने एक महीने का समय दिया
श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को प्रस्तावित बेअदबी विरोधी कानून पर अपनी आपत्तियों को दूर करने के लिए एक महीने का समय दिया है और निर्देश दिया है कि चिंताओं का समाधान किया जाए, भले ही इसके लिए पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना पड़े। इसके साथ ही आपत्तियां दूर होने तक कानूनों को रोक दिया गया है। अकाल तख्त ने कहा, "हमें आपत्ति है। आपने वह काम शुरू किया है जो हमें और अकाल तख्त साहिब को करना चाहिए था। यहां संप्रदाय के अधिकार में हस्तक्षेप किया गया है।"
कुलदीप सिंह गड़गज का बयान
कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि अगर सिख धर्म में दखलंदाजी हुई तो इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब बिल विधानसभा में लाया गया, मैंने उस दिन भी कहा सरकार गलती कर गई। हम भी चाहते हैं कि जो बेअदबी करता है उसे सख्त सजा मिले। हमने विधानसभा स्पीकर को बुलाया कि हमारे ऐतराज हैं। इन्हें 15 दिन में दूर किया जाए, लेकिन उन्होंने इसे दूर नहीं किया। बहुत से विधायकों से मैंने पूछा कि क्या आपने कानून पढ़ा तो उन्होंने माना कि नहीं पढ़ा। हमने ये भी कह दिया कि जब तक संशोधन नहीं होता, तब तक इनको होल्ड किया जाए।
सरकार पर हस्तक्षेप का आरोप
सोमवार को विधायकों की पेशी से पहले पत्रकारों से बातचीत में जत्थेदार गड़गज ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर धार्मिक मामलों और अकाल तख्त के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और कहा कि बेअदबी कानून के जरिए सरकार गुरु और सिखों के बीच आने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ''हमें गुरु पंथ और गुरु ग्रंथ साहिब के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। हमें सिख पंथ की भावनाओं के अनुरूप चलना चाहिए।''
अकाल तख्त के सामने पेश हुए सिख विधायकों और मंत्रियों की सूची
पंजाब कैबिनेट मंत्री
- वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा
- कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुद्दियां
- स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह
- शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस
- लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ
- राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन
- महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर
- ग्रामीण विकास मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड
- एनआरआई मामलों के मंत्री रवजोत सिंह
- पंजाब के सिख विधायक
- पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान
आप विधायक
- कुलवंत सिंह
- जीवन सिंह सांगोवाल
- मनविंदर सिंह गियासपुरा
- सरवजीत कौर मानुके
- देविंदरजीत सिंह लड्डी
- फौजा सिंह सरारी
- नरिंदर पाल सिंह सावना
- अमनदीप सिंह
- जगदीप सिंह
- गुरदित सिंह
- अमलोक सिंह
- बलकार सिद्धू
- जगरूप गिल
- बलजिंदर कौर
- अमनशेर सिंह शेरी कालसी
- अमरपाल सिंह
- गुरदीप सिंह
- कुलदीप धालीवाल
- जसबीर सिंह
- जीवन ज्योत कौर
- जसविंदर सिंह
- सरवन सिंह धुन
- दलबीर सिंह
- इंदरबीर सिंह निज्जर
- मनजीत सिंह बिलासपुर
- रणबीर सिंह भुल्लर
- हरदीप सिंह डिम्पी ढिल्लों
- जगसीर सिंह मैसरखाना
- मंजिंदर सिंह लालपुरा
कांग्रेस विधायक
- विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा
- बरिंदरमीत सिंह पहरा
- राणा गुरजीत सिंह
- तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा
- सुखबिंदर सिंह सरकारिया
- सुखपाल सिंह खैरा
- बलविंदर सिंह
शिरोमणी दल विधायक
- गनीव कौर मजीठिया
- मनप्रीत सिंह अयाली
निर्दलीय विधायक
राणा इंदर प्रताप सिंह
बेअदबी पर क्या प्रावधान हैं?
पंजाब सरकार ने इसी साल बैसाखी के मौके पर बेअदबी कानून पास किया था। जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक में बेअदबी के लिए उम्रकैद और 50 लाख तक के जुर्माने का प्रोविजन है। दोषी पाए जाने पर संपत्ति को जब्त करने का भी प्रावधान है। बेअदबी को गैर-ज़मानती अपराध बनाया गया है और इस तरह के मामलों की जांच DSP या उससे ऊपर के अफसर ही करेंगे। AI के जरिए होने वाली बेअदबी को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है।
क्या हैं अकाल तख्त की आपत्तियां?
- अकाल तख्त का कहना है कि सरकार को धार्मिक मामलों में दखल देने का हक नहीं है।
- अकाल तख्त के जत्थेदारों का कहना है कि सरकार ने जो बिल पास किया है, उसमें कई गलतियां हैं। बिर को स्वरूप कहा गया है। दरअसल कानून में "बिर" की जगह "स्वरूप" शब्द का इस्तेमाल किया गया, जो सिख शब्दावली बदलने की कोशिश मानी गई।
- कानून में कस्टोडियन की व्याख्या गलत की गई। अकाल तख्त के मुताबिक विधानसभा को सिख परंपराओं और शब्दावली तय करने का अधिकार नहीं है।
- जत्थेदारों ने कहा कि सिख शब्दावली, गुरमाता और श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े फैसले विधानसभा नहीं, पंथ और श्री अकाल तख्त तय करेगा। सरकार सुझाव भेज सकती है, आदेश नहीं दे सकती।
- जत्थेदारों ने सरकार से कहा कि अगर कोई डेरा सिखों और गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त लीगल एक्शन का प्रोविजन भी बेअदबी कानून में होना चाहिए।
भगवंत मान ने क्या कहा था?
अकाल तख्त के समक्ष पेश होने से पहले बागी अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि अकाल तख्त जो भी निर्देश देगा, वह उसका पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब जत्थेदार गड़गज ने कानून में संशोधन की आवश्यकता बताई थी, तब राज्य सरकार को उसमें बदलाव कर देना चाहिए था। वहीं, 'आप' विधायक गुरदीत सिंह सेखों ने कहा कि विधायक अकाल तख्त के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि उनकी पार्टी के सिख विधायक और मंत्री अकाल तख्त के समक्ष पेश होंगे और सरकार का पक्ष लिखित रूप में प्रस्तुत करेंगे।
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