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बजिंदर के बाद एक और पास्टर पर रेप का आरोप, BCA की छात्रा को गर्भवती किया, गर्भपात के 2 दिन बाद मौत

आरोप है कि पास्टर ने जशनगिल ने बीसीए की छात्रा के साथ रेप किया और जब वो गर्भवती हुई तो उसका गर्भपात करवा दिया। गर्भपात के दो दिन बाद ही छात्रा की मौत हो गई।

Victim father- India TV Hindi
Image Source : X/ANI पीड़िता के पिता

पास्टर बजिंदर के बाद अब गुरदासपुर के पास्टर पर बलात्कार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पास्टर जशनगिल ने 22 वर्षीय बीसीए की छात्रा के साथ रेप किया और जब वो गर्भवती हुई तो उसका गर्भपात करवा दिया। गर्भपात के दो दिन बाद ही छात्रा की मौत हो गई। मृतक छात्रा के पिता ने बताया कि आरोपी पास्टर ने उनकी बेटी का गर्भपात करवाया। इसके बाद छात्रा की हालत बिगड़ी और अमृतसर में उसकी मौत हो गई।

आरोपी पास्टर जशनगिल गुरदासपुर का रहने वाला है। यह मामला 2023 का है और पीड़िता की जब तबीयत बिगड़ी तो भी पास्टर उनके घर में प्रार्थना करने आया था। पीड़िता ने अपनी छोटी बहन को पूरी घटना के बारे में बताया था कि पास्टर ने कैसे बलात्कार किया और फिर गर्भपात करवाया।

पुलिस नहीं कर रही गिरफ्तारी

पुलिस ने इस मामले में धारा 304 ए के तहत मामला दर्ज किया है। दीनानगर पुलिस ने मामला दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने के बाद से जशनगिल जम्मू में रह रहा है, जबकी उसकी गिरफ्तारी अभी तक भी पुलिस नहीं कर रही है। पीड़ित के पिता ने बताया कि वो फिर डर कर अमृतसर में रह रहे हैं, उन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।

पास्टर बजिंदर को सजा

मोहाली की एक अदालत ने मंगलवार को स्वयंभू पादरी बजिंदर सिंह को 2018 के बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई और कहा कि सिंह ने पादरी के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर जघन्य अपराध किया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) विक्रांत कुमार की अदालत ने 28 मार्च को सिंह के दोषी पाए जाने के बाद यह फैसला सुनाया। सिंह को अक्सर ‘यीशु-यीशु पैगंबर’ कहकर भी संबोधित किया जाता था। सिंह को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (बलात्कार), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने की सजा) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया, जबकि मामले में पांच अन्य आरोपियों अखबार भट्टी, राजेश चौधरी, जतिंदर कुमार, सितार अली और संदीप पहलवान को बरी कर दिया गया। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (न) के अनुसार, दोषी को आजीवन कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी, जिसका अर्थ है कि उसे अपने शेष जीवन कारावास में व्यतीत करना होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पादरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 506 के तहत एक-एक साल के कारावास की सजा सुनाई गई है, और सभी सजायें एक साथ चलेंगी।