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चंडीगढ़-मोहाली में थमी Ola-Uber की रफ्तार, इन मांगों को लेकर ड्राइवर कर रहे आंदोलन

चंडीगढ़ और मोहाली में ओला-उबर ड्राइवर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ड्राइवरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर 16 जून तक आंदोलन जारी रख सकते हैं।

Ola uber drivers protest- India TV Hindi
Image Source : FILE (ANI) ओला और उबर ड्राइवर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे।

ओला-उबर ड्राइवरों की हड़ताल से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चंडीगढ़-मोहाली में ओला और उबर ड्राइवर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन का असर कैब बुकिंग पर साफ दिखाई दे रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर 16 जून तक आंदोलन जारी रख सकते हैं।

क्यों हो रही है हड़ताल? 

ऐसे में आने वाले दिनों में भी कैब सेवाएं प्रभावित रहने की आशंका है। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें मिलने वाला किराया काफी कम है और कंपनियों की प्राइसिंग नीति मनमानी है। न्यूनतम बेस फेयर तय करने और सरकार द्वारा किराया संरचना को रेगुलेट करने की मांग की जा रही है। कम किराया, बढ़ता खर्च, न्यूनतम फेयर की मांग और कंपनियों की नीतियों के विरोध में ड्राइवर आंदोलन कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैब ड्राइवरों का ये अंदोलन सुबह 10 बजे से शाम 4 बज तक चलेगा। इस दौरान ये कैब सवारियों को लाने और ले जाने का काम नहीं करेंगे। कैब ड्राइवर्स के मुताबिक, साल 2025 में चंडीगढ़ प्रशासन ने उनके लिए किराया 25 किमी. प्रति किमी. तय किया था। इसके बाद से कई बार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी महंगा हो चुका है, लेकिन कैब के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया।

कैब ड्राइवर्स का कहना है कि सीएनजी 9 रुपये महंगी हो चुकी है। पेट्रोल-डीजल भी लगातार महंगा हो रहे हैं। ऐसे में ये लोग किराया 25 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रति किमी. बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। ड्राइवर एसोसिएशन का कहना है कि किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर वे लोग कई बार अधिकारियों से मिले, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी वजह से उनको अब हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है।

दिल्ली-NCR में भी ऑटो-टैक्सी वालों ने की थी हड़ताल

बता दें कि 21 से 23 मई तक दिल्ली-NCR में भी ऑटो और टैक्सी वालों ने हड़ताल की थी। इसका खामियाजा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के लाखों लोगों को भुगतना पड़ा था। ये हड़ताल इन लोगों ने कमर्शियल वाहनों पर ईसीसी बढ़ाए जाने और BS-4 या उससे पुराने वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर की गई थी। लेकिन ओला, उबर और रैपिड जैसी एप बेस्ड सर्विसेज ने इस समर्थन का सपोर्ट नहीं किया था।

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