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भारत ही नहीं, पाकिस्तान की बेटियां भी भुगत रहीं आतंकियों के कुकर्मों की सजा, इंतजार करती रही दुल्हन, नहीं आई बारात

पहलगाम हमले के बाद भारत ने अटारी बॉर्डर बंद कर दिया है। इसके बाद शादी के लिए पाकिस्तान जाने वाले लोग भी रुक गए हैं। इससे कई पाकिस्तानी लड़कियों के यहां बारात नहीं पहुंची।

Shaitan SIngh- India TV Hindi
Image Source : X/ANI शैतान सिंह

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों के कायराना हमले में कई मां-बहनों ने अपनी आंखों के सामने सुहाग खो दिया। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आतंकियों को इसका अंजाम भुगतना होगा। हालांकि, आतंकियों की इस कायराना करतूत से सिर्फ भारत की बेटियों को नुकसान नहीं हुआ है। इसका खामियाजा पाकिस्तान की बेटियां भी भुगत रही हैं। भारत सरकार ने पहलगाम हमले के बाद अटारी बॉर्डर बंद कर दिया है। इस वजह से कई लड़कियां दुल्हन बनकर इंतजार करती रह गईं, लेकिन उनके घर बारात नहीं पहुंची।

भारात सरकार ने अटारी बॉर्डर बंद करने के साथ ही ऐलान कर दिया था, कि जो लोग पाकिस्तान में हैं। वह एक मई तक वापस आ सकते हैं। वहीं, पाकिस्तानी नागरिक 48 घंटे के अंदर वापस अपने देश लौट सकते हैं। ऐसे में कई लोग जिन्हें शादी के लिए पाकिस्तान जाना था। वह लोग पाकिस्तान नहीं जा पाए और उनकी शादी रुक गई।

शादी के लिए पाकिस्तान नहीं गए शैतान

राजस्थान के रहने वाले शैतान सिंह गुरुवार को अपनी शादी के लिए अमृतसर की अटारी सीमा पार करके पाकिस्तान जाने वाले थे। उन्होंने कहा "आतंकवादियों ने जो किया है, वह गलत है। हमें (पाकिस्तान) जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, क्योंकि सीमा बंद है। देखते हैं अब क्या होता है।" राजस्थान के ही सुरिंदर सिंह एक पारिवारिक शादी के लिए पाकिस्तान जाने वाले थे। उन्होंने कहा "मैं अपने भाई की शादी के लिए पाकिस्तान जा रहा था, लेकिन अब यह स्थगित हो जाएगा। मेरी दादी और उनके चार बेटे पाकिस्तान में रहते हैं, और उनका एक बेटा भारत में रहता है। (पहलगाम में) पर्यटकों पर हमला बहुत गलत था।" वहीं, भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिक अपने देश वापस जाने लगे हैं।

पहलगाम में 26 लोगों की मौत

पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हुई है। इनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। आतंकियों ने पर्यटकों से उनका नाम, पूछा और धर्म पता करने के बाद उन्हें गोली मारी। आतंकियों का उद्देश्य देश के अंदर सामाजिक मतभेद पैदा करना था।