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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1.85 करोड़ की ठगी, संविदा बैंक कर्मी सहित 4 आरोपी गिरफ्तार

आरोपियों ने महिला से 22 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा था। महिला पैसे ट्रांसफर करने गई तो बैंक कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

Rajasthan crime- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT पीड़ित महिला (बाएं) आरोपी (दाएं)

राजस्थान के जोधपुर में डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग महिला से 1.85 करोड़ रुपए ठग लिए गए। साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने संविदा बैंक कर्मी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस आयुक्त शरत कविराज के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त शाहीन सी, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त धन्नाराम और सहायक पुलिस आयुक्त पदमदान चारण के निर्देशन में साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस निरीक्षक सुरेश सारण के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण और सूचना के आधार पर आरोपियों को पकड़ा।

राजेश माहेश्वरी ने रिपोर्ट दी कि उनकी 75 वर्षीय बुआ सरस्वती देवी माहेश्वरी निवासी कमला नेहरू नगर, प्रतापनगर को 13 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई का अधिकारी बताकर कहा कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में खुला खाता फ्रॉड में इस्तेमाल हुआ है और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। डराकर आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया और आरबीआई जांच के नाम पर पैसे जमा कराने को कहा।

पुलिस ने शुरू की जांच

डरी हुई बुजुर्ग महिला ने 18 फरवरी को एसबीआई से आरटीजीएस के जरिए 1 करोड़ 85 लाख 23 हजार रुपए बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इस पर साइबर थाना में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी मुकेश राव ने एसबीआई पाल रोड शाखा के संविदा कर्मचारी अजय को लालच में लेकर मजदूर वर्ग के लोगों के खाते इस्तेमाल किए। ठगी की राशि खातों में डलवाकर निकाल ली जाती और बाद में डिजिटल करेंसी यूएसडीटी खरीदकर देश-विदेश में बैठे साइबर ठगों को भेज दी जाती।

चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मुकेश राव, तिलक सिंह, शिवम तोमर और अजय को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है तथा रिमांड लेकर ठगी की राशि बरामद करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि पुलिस या किसी भी एजेंसी द्वारा कभी भी ऑनलाइन या डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता। ऐसे कॉल आने पर तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

(जोधपुर से चंद्रशेखर व्यास की रिपोर्ट)

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