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कोटा में मिड-डे मील के अनाज में 1 करोड़ का गबन, सरकारी गोदाम से 3,213 क्विंटल गेहूं-चावल गायब, गुजरात की फर्म पर FIR

विभागीय जांच में गुजरात की एक ठेकेदार फर्म पर खाद्यान्न गायब करने का आरोप लगा है। रसद विभाग की शिकायत पर कोटा के नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

मिड-डे मील के अनाज में 1 करोड़ का गबन- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT मिड-डे मील के अनाज में 1 करोड़ का गबन

राजस्थान के कोटा में स्कूली बच्चों के मिड-डे-मील योजना के गेहूं और चावल में बड़े घपले का मामला सामने आया है। सरकारी गोदाम से उठाया गया 3213 क्विंटल खाद्यान्न स्कूलों तक पहुंचा ही नहीं। जब इसकी जानकारी विभाग को लगी तो खलबली मच गई। विभागीय जांच में गुजरात की ठेकेदार फर्म पर राशन रास्ते में ही गायब करने का आरोप लगा है। रसद विभाग की शिकायत पर नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। कोटा जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषाहार के लिए आवंटित गेहूं और चावल में यह गड़बड़ी सामने आई है। राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के तहत जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के लिए खाद्यान्न आवंटित किया गया था। कोटा के सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच गेहूं और चावल का शत-प्रतिशत उठाव किया गया। 

32 रुपए 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से मिला था वर्क ऑर्डर

खाद्यान्न परिवहन की जिम्मेदारी गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज फर्म को दी गई थी। फर्म को 32 रुपए 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से वर्क ऑर्डर मिला था। गोदाम से खाद्यान्न उठाने के बाद स्कूलों में लगातार पोषाहार कम पहुंचने की शिकायतें आने लगीं। शिक्षा विभाग ने ब्लॉक वार आवंटन और स्कूलों तक पहुंचे राशन का सत्यापन कराया। जांच में सामने आया कि 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल स्कूलों तक पहुंचा ही नहीं। इस तरह कुल 3213 क्विंटल से ज्यादा खाद्यान्न की कमी सामने आई। विभागीय आकलन के मुताबिक गायब खाद्यान्न की कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपए और खुले बाजार में एक करोड़ से एक करोड़ 10 लाख रुपए तक है।

स्कूलों तक राशन नहीं पहुंचना व्यवस्था पर गंभीर सवाल

रूप सिंह मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्रारंभिक, कोटा ने बताया कि जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद रसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और उसके सहयोगी अधिकृत व्यक्ति शैलेंद्र शर्मा को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। 15 अक्टूबर सुबह साढ़े दस बजे तक जवाब मांगा गया, लेकिन निर्धारित समय पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद रसद विभाग ने नयापुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। अब पुलिस खाद्यान्न के गबन और स्कूलों तक राशन नहीं पहुंचने के मामले की जांच कर रही है। सरकारी गोदाम से खाद्यान्न का पूरा उठाव होने के बावजूद स्कूलों तक राशन नहीं पहुंचना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल?

उन्होंने कहा कि अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बच्चों के पोषाहार के लिए आया खाद्यान्न कहां गायब हुआ और इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल है। स्कूलों में लगातार पोषाहार कम पहुंचने की शिकायतों के बीच शिक्षा विभाग ने ब्लॉकवार आवंटन और स्कूलों में पहुंचे राशन का सत्यापन कराया, तब बड़ा झोल सामने आया।  जांच रिपोर्ट के मुताबिक 1844.06 क्विंटल गेहूं और 1369.52 क्विंटल चावल कभी स्कूलों तक पहुंचा ही नहीं। फर्म ने अपनी मंथली प्रोग्रेस रिपोर्ट (एमपीआर) में 207.50 क्विंटल गेहूं और 100.60 क्विंटल चावल शेष बचा होना बताया और बाद में मौखिक दावा किया कि पूरा राशन बांट दिया।  

नोटिस का नहीं दिया जवाब

गबन की पुष्टि होने पर रसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक (निवासी हिम्मतनगर, गुजरात) और उसके सहयोगी अधिकृत व्यक्ति शैलेंद्र शर्मा (निवासी बरूंधन, तालेड़ा) को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 अक्टूबर सुबह 10:30 बजे तक स्पष्टीकरण मांगा था। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जवाब पेश नहीं किया।  

कोटा के जिला शिक्षा अधिकारी रूप सिंह मीणा ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उठाने के बावजूद लगातार स्कूलों से मिड डे मील कम पड़ने की शिकायतें आ रही थी। सभी सीबीईओ से रिपोर्ट मांगी, जिसमें सामने आया कि गोदाम से किए गए उठाव और स्कूलों में सप्लाई में अंतर है। हम लगातार रसद विभाग को लिख रहे थे। सभी स्कूलों के पास उपलब्ध कराए गए माल की पूरी पर्चियां हैं।

दिनेश कश्यप की रिपोर्ट

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