राजस्थान की जेल से शादी की खुशखबरी आई है। यहां के जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में सोमवार को बंदी मूलाराम और सीमा वैदिक रीति-रिवाज एवं पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। आमतौर पर जेल को सजा से जोड़ा जाता है, लेकिन इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि न्याय-व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देना भी है।
दरअसल, राजस्थान हाई कोर्ट की विशेष अनुमति के बाद आयोजित इस विवाह ने दोनों परिवारों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को साकार कर दिया। मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी के सहायक स्वप्न चौहान ने बताया कि हाई कोर्ट के संवेदनशील निर्णय के कारण यह विवाह संभव हो पाया। विवाह समारोह में दोनों पक्षों के परिजन, रिश्तेदार और शुभचिंतक बड़ी संख्या में शामिल हुए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नवदंपति को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया।
पैरोल पर थी उम्रकैद की दोषी सीमा
समारोह को गरिमामय और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं कीं। ओपन जेल प्रभारी हापू राम की प्रत्यक्ष निगरानी में सुरक्षा एवं आयोजन संबंधी सभी व्यवस्थाओं का संचालन किया गया, जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की लगातार मॉनिटरिंग की।
हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने मंडोर ओपन जेल में रह रहे उम्रकैद के बंदी मूलाराम भाटी (33) को पैरोल पर बाहर चल रही उम्रकैद की ही दोषी सीमा घड़से (31) से विवाह करने की कानूनी मंजूरी दी थी। न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक आदेश दिया था। कोर्ट के इस फैसले को भविष्य में कैदियों के संवैधानिक अधिकारों, मानवीय गरिमा और उनके जीवन में सकारात्मक सुधार से जुड़े मामलों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक नजीर माना गया।
खेती का काम करते हुए हुआ प्यार
मूल रूप से नागौर के रहने वाले मूलाराम को साल 2023 में हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी, जिसके बाद उन्हें मंडोर ओपन जेल शिफ्ट किया गया। वहीं, मुंबई की रहने वाली सीमा को साल 2019 में पति की हत्या के मामले में उम्रकैद मिली थी। ओपन जेल के नियमों के तहत आत्मनिर्भर बनने के लिए दोनों वहां खेती का काम करते थे। रोजमर्रा के काम के दौरान दोनों का संपर्क हुआ, बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गईं। दोनों ने इस कठिन दौर में एक-दूसरे का संबल बनने का फैसला किया। हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली, जिसके बाद दोनों ने विवाह बंधन में बंधने का निर्णय लिया।
(रिपोर्ट- चन्द्रशेखर व्यास)
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