राजस्थान के अजमेर में किशनगढ़ का मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड टूरिस्ट के लिए एक बड़ा आकर्षण बन गया है। यहां रोजाना बड़े पैमाने पर टूरिस्ट पहुंच रहे हैं। यहां की सफेद पहाड़ियां और झील जैसे नजारे लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। खासकर फोटो के लिए यह जगह परफेक्ट है। इसी वजह से इसे 'मिनी स्विटजरलैंड' के नाम से भी जाना जाता है। कई फिल्मों की शूटिंग भी यहां हुई है, जिसके बाद यह जगह लोकप्रिय होती गई, लेकिन यहां घूमना-फिरना सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। खासकर उन लोगों को सावधानी रखने की जरूरत है, जिन्हें सांस से जुड़ी हुई कोई बीमारी है।
न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस जगह का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में सफेद-चमकदार पहाड़ियां और पानी जैसा नजारा दिख रहा है, जो दूर से देखने पर बहुत खूबसूरत लगता है। लोग अब इस जगह को घूमने आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोगों को अंदाजा भी नहीं है कि यहां घूमना कितना खतरनाक हो सकता है।
क्या है किशनगढ़ मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड?
किशनगढ़ को भारत का मार्बल सिटी कहा जाता है। यहां हजारों मार्बल कटिंग और पॉलिशिंग के कारखाने हैं। इन कारखानों में मार्बल काटने और चमकाने के दौरान जो बारीक पाउडर बचता है, उसे पानी के साथ मिलाकर टैंकरों में यहां डाला जाता है। समय के साथ पानी सूख जाता है और बचा हुआ सफेद कैल्शियम कार्बोनेट पाउडर टीले और पहाड़ियों जैसा बन जाता है। दूर से यह बर्फीली चोटियों, ग्लेशियर या स्विट्जरलैंड जैसे सफेद इलाके जैसा दिखता है। बीच-बीच में पानी जमा होने से छोटी-छोटी नीली झीलें भी बन जाती हैं। इससे नजारा और खूबसूरत बना जाता है। यह एशिया का सबसे बड़ा मार्बल वेस्ट डंपिंग यार्ड माना जाता है। यह लगभग 200-350 एकड़ में फैला है। रोजाना 700 से ज्यादा टैंकर यहां 22 लाख लीटर से ज्यादा स्लरी डालते हैं।
किशनगढ़ पर्यटन स्थल कैसे बना?
1980-90 के दशक में यह सिर्फ कचरा डालने की जगह थी। 2005-2015 के आसपास किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन ने इसे बेहतर बनाया। यहां रोड, रेस्ट रूम आदि बनवाए गए। कई फिल्मों की शूटिंग भी यहां हुई। 2023 के बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ गई। अब यहां रोजाना 5,000 पर्यटक आते हैं। वीकेंड और छुट्टियों पर यह संख्या 15,000-20,000 तक पहुंच जाती है। प्री-वेडिंग शूट, बॉलीवुड म्यूजिक वीडियो, फिल्म शूटिंग और फोटोग्राफी के लिए यह जगह बहुत लोकप्रिय है।
सेहत के लिए खतरा
यह जगह देखने में बहुत सुंदर है, लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानी जाती है। सूखा पाउडर हवा में उड़ता है, जो फेफड़ों में जा सकता है। इससे सिलिकोसिस, सांस की समस्या और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। आसपास के गांवों में मिट्टी की उर्वरता खराब हो रही है, फसलें प्रभावित हो रही हैं। भूजल प्रदूषित हो रहा है। 6 किमी के दायरे में टीडीएस 10 गुना तक ज्यादा पाया गया है। भारी धातुओं और फ्लोराइड का स्तर भी बढ़ा है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के अध्ययन में इसे "टॉक्सिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन" कहा गया है। कई एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि बिना मास्क के घूमना, पानी में उतरना या ज्यादा देर रहना जोखिम भरा है।
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