1. Hindi News
  2. राजस्थान
  3. जिले निरस्त करने के मुद्दे पर राजस्थान विधानसभा में बवाल, स्थगित करनी पड़ गई कार्यवाही

जिले निरस्त करने के मुद्दे पर राजस्थान विधानसभा में बवाल, स्थगित करनी पड़ गई कार्यवाही

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा कुछ जिलों के गठन को निरस्त करने पर हंगामा हुआ, जिससे सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस विधायकों ने इस फैसले पर विरोध जताया, जबकि मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार का बचाव किया।

Rajasthan Assembly, uproar, abolishing districts, proceedings postponed- India TV Hindi
Image Source : FILE राजस्थान विधानसभा में जिले निरस्त करने के मुद्दे पर जमकर बवाल हुआ।

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा कुछ जिलों के गठन को निरस्त किए जाने के मुद्दे पर फिर से हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के दो विधायकों, सुरेश मोदी और रामकेश मीणा ने इस मुद्दे को उठाया और कार्य स्थगन का नोटिस दिया। उन्होंने नवगठित नीमकाथाना और गंगापुर सिटी जिलों को समाप्त करने पर आपत्ति जताई। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट किया कि जिले बनाने या निरस्त करने का पूरा अधिकार राज्य सरकार के पास है और उसने सभी तथ्यों के आधार पर यह निर्णय लिया है।

टीकाराम जूली के सवाल पर शुरू हुआ था हंगामा

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंत्री के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने उनका भाषण नहीं, बल्कि तथ्यों की जानकारी चाहिए। इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और विपक्ष के सदस्य आसन के पास आ गए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लगभग 12.35 बजे कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी। नीम का थाना से कांग्रेस विधायक सुरेश मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने संभाग और जिलों का दर्जा समाप्त कर वहां की जनता के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया और क्षेत्र के विकास को समाप्त कर दिया है।

‘राजनीतिक दुर्भावना से लिया गया है यह निर्णय’

सुरेश मोदी ने कहा कि राज्य सरकार ने जिलों को निरस्त करने का निर्णय मापदंडों के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दुर्भावना से लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिलों की समीक्षा के लिए गठित पंवार समिति ने सभी जिलों का दौरा किया, लेकिन नीम का थाना को नहीं देखा। वहीं, गंगापुर से कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा ने कहा कि पिछली सरकार ने 17 नए जिलों का गठन किया था, जिनमें से नौ जिले और तीन संभागों को भाजपा की मौजूदा सरकार ने राजनीतिक द्वेष के चलते समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इन जिलों को खत्म करते समय मापदंडों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया।

‘सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया’

राजस्थान सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि किसी जिले को बनाने या समाप्त करने का पूर्ण अधिकार राज्य सरकार के पास है। उन्होंने यह भी कहा कि जिलों को राजनीतिक आधार पर निरस्त करने का आरोप पूरी तरह गलत है। मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि संभागों के गठन के मामले में सरकार ने पारदर्शिता और निष्पक्षता से सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है। हालांकि, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, ‘जिलों का मामला बहुत गंभीर है। दोनों विधायकों ने तथ्यों के साथ मुद्दा उठाया है, लेकिन सरकार की ओर से मंत्री ने कोई भी तथ्य नहीं बताया कि किस आधार पर जिले रखे गए और किस आधार पर निरस्त किए गए।’

गहलोत सरकार ने बनाए थे 17 नए जिले, 3 नए संभाग

जूली के बोलने के बाद दोनों पक्षों के सदस्य बोलने लगे, और अध्यक्ष देवनानी ने कार्य स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि, सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और आसन के पास आ गए, जिसके बाद अध्यक्ष ने कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित कर दी। 2 बजे सदन की बैठक फिर से शुरू हुई, लेकिन नेता प्रतिपक्ष जूली के सवाल पर अध्यक्ष ने जवाब की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। बता दें कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने 17 नए जिले और 3 नए संभाग बनाए थे, जबकि भजनलाल शर्मा सरकार ने दिसंबर में 9 जिलों और 3 संभागों को समाप्त कर दिया, लेकिन 8 नए जिलों को बरकरार रखा। (भाषा)