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बेटे की शादी से पहले आंधी-तूफान देखकर पिता की सदमे में मौत, बारात की तैयारियों के बीच हुआ अंतिम संस्कार

शादी के मौके पर नाते-रिश्तेदार घर पर आए हुए थे। शनिवार रात आंधी-तूफान देखकर पिता की सदमे में मौत हो गई। किसी तरह बरात ले जाकर दुल्हे की शादी कराई गई है।

गम में डूबा परिवार- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV गम में डूबा परिवार

राजस्थान के टोंक जिले के लाम्बाहरिंसिंह में बकरियां चराकर अपने परिवार का लालन-पालन करने वाले मूलचंद के घर शादी की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। परिवार के लोगों का कहना है कि तेज आंधी के कारण नुकसान की आशंका ने मूलचंद की जान ले ली। हालांकि, आंधी से वहां कोई नुकसान नहीं हुआ।

बीपी हो गया डाउन

अचानक मूलचंद की तबीयत बिगड़ने के बाद उनको पास के निजी क्लीनिक पर ले जाया गया, जहां उनका बीपी डाउन पाया गया। इसके बाद उन्हें तुरंत मालपुरा अस्पताल में ले जाने को कहा गया, लेकिन जब तक मालपुरा अस्पताल ले जाते तब तक 60 वर्षीय मूलचंद की मौत हो चुकी थी। 

इकलौते बेटे की थी शादी

परिजन पोस्टमार्टम बिना कराए शव को ले आए। मूलचंद अपने इकलौते बेटे छीतर की शादी की तैयारी में लगे थे। शादी का खाना आदि बनाने में कई दिनों से जुटे हुए थे, लेकिन उनको इकलौते बेटे को दूल्हा बने देखना नसीब नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि इससे पहले वह किसी रोग से ग्रसित नहीं थे। शनिवार को उनकी अचानक मौत हो गई। उनके इकलौते पुत्र की बारात रविवार को तिहारी गांव (अजमेर) जानी थी।

कुर्सी पर बैठे अचानक गिर पड़े

मूलचंद के दामाद राज् लाल बैरवा और बाबूलाल ने बताया कि मूलचंद ने हलवाई से नमकीन टेस्ट की, चाय पी और थोड़ी देर आराम किया। फिर कुर्सी पर बैठे ही अचानक गिर पड़े। समाज के लालाराम बैरवा ने बताया कि आंधी के कारण हलवाइयों और लाइट वालों का काम रुक गया था। इससे मूलचंद को चिंता हो गई थी। 

परिवार में छाया मातम

बूढ़ी मां कई बार बेहोश हुईं। मूलचंद की मौत के बाद शादी का माहौल गम में बदल गया है। महिलाएं कलश लेने गई थीं, वहां नाच-गाना चल रहा था। खबर मिलते ही सब रोने लगे। बूढ़ी मां कई बार बेहोश हो गईं। मोहल्ले और समाज के लोग रातभर साथ रहे।

सादगी से निभाई गईं शादी की रस्में

पिता के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद बरात रवाना हुई। शनिवार को मूलचंद के अंतिम संस्कार के बाद छोतर को रविवार हल्दी मेहंदी लगाकर दूल्हा बना कर गाड़ी में बैठा कर रवाना किया गया। बरात में समाज परिवार रिश्तेदार के करीब 60 बाराती बस से रवाना हुए। केवल शादी की औपचारिकताएं पूरी होती नजर आईं। छीतर की बारात तिहारी गांव (अजमेर) जानी थी। समाज के लोगों ने बारात ले जाकर फेरे करवाए। रस्में काफी सादगी से निभाई गईं।

रिपोर्ट- पुरुषोत्तम कुमार