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02 सितंबर 2026 का पंचांग: बुधवार को रखा जाएगा हलषष्ठी का व्रत, तुला राशि में शुक्र का गोचर, नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल टाइम

02 सितंबर 2026 का पंचांग: बुधवार के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पड़ रही है। इसके अलावा कल दोपहर 1 बजकर 46 मिनट पर शुक्र तुला राशि में गोचर कर रहे हैं। जानिए 02 सितंबर 2026 का पंचांग और राहुकाल का समय।

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Image Source : INDIA TV 02 सितंबर 2026 का पंचांग
कल भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार का दिन है। षष्ठी तिथि 02 सितंबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा कल हलषष्ठी का व्रत किया जायेगा। वहीं, कल रात 9 बजकर 12 मिनट तक ध्रुव योग रहेगा। इसके साथ ही कल 02 सितंबर को देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल दोपहर 1 बजकर 46 मिनट पर शुक्र तुला राशि में गोचर कर रहे हैं। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए बुधवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
 
02 सितंबर 2026 का पंचांग
  • भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि- 02 सितंबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 27 मिनट तक
  • ध्रुव योग- 02 सितंबर को रात 9 बजकर 12 मिनट तक 
  • भरणी नक्षत्र- 02 सितंबर को देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक 
  • 02 सितंबर 2026 विशेष-  हलषष्ठी का व्रत
02 सितंबर 2026 शुभ समय
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:29 ए एम से 05:14 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 04:51 ए एम से 05:59 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:46 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:28 पी एम से 03:19 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:43 पी एम से 07:05 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:43 पी एम से 07:50 पी एम
  • अमृत काल- 07:42 पी एम से 09:15 पी एम
राहुकाल का समय
  • दिल्ली- दोपहर 12:21 से दोपहर 01:56 तक
  • मुंबई- दोपहर 12:38 से दोपहर 02:12 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 12:22 से दोपहर 01:58 तक
  • लखनऊ- दोपहर 12:06 से दोपहर 01:41 तक
  • भोपाल- दोपहर 12:20 से दोपहर 01:54 तक
  • कोलकाता- दोपहर पहले 11:36 से दोपहर 01:10 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर 12:39 से दोपहर 02:13 तक
  • चेन्नई- दोपहर 12:08 से दोपहर 01:41 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 
  • सूर्योदय- सुबह 05:59 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 06:43 बजे
हलषष्ठी व्रत
 
कल, 2 सितंबर को हलषष्ठी व्रत है। यह पर्व श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। चूंकि बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल और मूसल है। इस दिन को हलषष्ठी, हरछठ या ललही छठ के रूप में मनाया जाता है। बलराम को हलधर के नाम से जाना जाता है। इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन करना भी वर्जित है। इस दिन व्रत करने से संतानहीन दंपति को श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है और जिनकी पहले से संतान है, उनकी संतान की आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। 
 
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)