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06 अगस्त 2026 का पंचांग: कल भरणी नक्षत्र में शीतलाष्टमी और कालाष्टमी का शुभ संयोग, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

06 अगस्त 2026 का पंचांग: गुरुवार के दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तिथि पड़ रही है। कल शीतला अष्टमी और कालाष्टमी भी मनाई जाएगी। चलिए जानते हैं 06 अगस्त 2026, गुरुवार का पंचांग और राहुकाल का समय।

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Image Source : PINTEREST 06 अगस्त 2026 का पंचांग
कल श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और गुरुवार का दिन है। अष्टमी तिथि 06 अगस्त को शाम 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। वहीं, कल रात 8 बजकर 14 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतलाष्टमी और कालाष्टमी मनाई जाती है। लिहाजा 06 अगस्त को शीतलाष्टमी व्रत रखा जाएगा, बसोड़ा पूजा पर घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए गुरुवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
 
06 अगस्त 2026 का पंचांग
 
  • श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि- 06 अगस्त को शाम 6 बजकर 53 मिनट तक
  • भरणी नक्षत्र- 06 अगस्त को रात 8 बजकर 14 मिनट तक
  • 06 अगस्त 2026 विशेष- शीतलाष्टमी व्रत, कालाष्टमी
06 अगस्त 2026 शुभ समय
 
  • ब्रह्म मुहूर्त-04:20 ए एम से 05:03 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 04:42 ए एम से 05:45 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त-12:00 पी एम से 12:54 पी एम
  • विजय मुहूर्त-02:41 पी एम से 03:34 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त-07:08 पी एम से 07:30 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या-07:08 पी एम से 08:12 पी एम
  • अमृत काल 03:38 पी एम से 05:10 पी एम
06 अगस्त 2026 अशुभ समय
 
  • राहुकाल-02:07 पी एम से 03:48 पी एम
  • यमगण्ड-05:45 ए एम से 07:26 ए एम
  • आडल योग-08:13 पी एम से 05:46 ए एम, अगस्त 07
  • दुर्मुहूर्त-10:13 ए एम से 11:07 ए एम
  • गुलिक काल -09:06 ए एम से 10:46 ए एम, 03:34 पी एम से 04:28 पी एम
  • वर्ज्य 06:28 ए एम से 08:00 ए एम
राहुकाल का समय
 
  • दिल्ली- दोपहर 02:07 से दोपहर बाद 03:48 तक
  • मुंबई- दोपहर 02:21 से दोपहर बाद 03:58 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 02:10 से दोपहर बाद 03:51 तक
  • लखनऊ- दोपहर 01:52 से दोपहर बाद 03:31 तक
  • भोपाल- दोपहर 02:04 से दोपहर बाद 03:42 तक
  • कोलकाता- दोपहर 01:20 से दोपहर बाद 02:58 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर 02:23 से शाम 04:01 तक
  • चेन्नई- दोपहर 01:49 से दोपहर बाद 03:24 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 
 
  • सूर्योदय- सुबह 06:45 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 07:08 बजे

भरणी नक्षत्र

आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से दूसरा भरणी नक्षत्र है, जिसका अर्थ होता है भरण-पोषण करना।इस नक्षत्र के स्वामी शुक्राचार्य हैं और राशि मेष है। भरणी नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह त्रिकोण आकृति है। इसके प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक सच बोलने वाले और धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं। ये जातक साहसी, प्रेरणादायक, रचनात्मक क्षेत्रों में सफल, चित्रकारी और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले होते हैं। ये लोग कठिन से कठिन कार्य करने से भी नहीं घबराते हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण भरणी नक्षत्र के जातक जीवन में कई बार विफल होने के बाद भी हार नहीं मानते और अंततः अपना लक्ष्य पाने में सफल होते हैं।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)