Navratri Day 6 Katha, Aarti Live Updates: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें मंत्र-कथा और आरती सबकुछ
Navratri 2026 Maa Katyayani, Aarti, Mantra Live: नवरात्रि छठे दिन नवदुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा और व्रत का विधान है। चैत्र नवराात्रि के छठवें दिन माता कात्यायनी की आराधना होती है। यहां जानिए देवी कात्यायनी की पूजा विधि, पूजा नियम, मंत्र, आरती, प्रिय भोग।

Navratri 2026 Maa Katyayani, Aarti, Mantra Live: हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना के लिए नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व माना गया है। इस समय नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि 2026 महापर्व चल रहा है, जिसका समापन 27 मार्च को होगा। नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के एक अलग शक्ति की साधना के लिए समर्पित है। छठे दिन नवदुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा और व्रत का विधान है। देवी कात्यायनी को शक्ति, सौंदर्य और साहस की प्रतीक माना जाता है। देवी पुराण खासतौर पर देवी भागवत पुराण में मां कात्यायनी को आदिशक्ति का अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप बताया गया है। नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होकर उच्च आध्यात्मिक चेतना की ओर अग्रसर होता है, जिससे भक्ति और आत्मसमर्पण की भावना प्रबल होती है।
मां कात्यायनी की उपासना से भक्तों को साहस, धर्म और विजय की प्राप्ति होती है। धर्म ग्रथों में वर्णित है कि महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी भगवती ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसलिए माता का नाम कात्यायनी पड़ा। 24 मार्च 2026 को चैत्र नवराात्रि के छठवें दिन माता कात्यायनी की आराधना की जाएगा। यहां जानिए देवी कात्यायनी की पूजा विधि, पूजा नियम, मंत्र, आरती, प्रिय भोग समेत सबकुछ।
मां कात्यायनी के मंत्र
1. कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
2.ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
3. या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
4. चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनि।।
Live updates : Navratri Day 6 Live Updates: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को समर्पित, जानिए मां दुर्गा के छठी शक्ति की उपासना के मंत्र, पूजा विधि, आरती, प्रिय भोग और सबकुछ
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March 24, 2026 2:24 PM (IST) Posted by Arti Azad
पूजा में जरूर करें इन मंत्रों का जाप
1. कात्यायनी महामाये , महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
2. ॐ ह्रीं नम:।।
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March 24, 2026 1:44 PM (IST) Posted by Arti Azad
मां कात्यायनी की आरती (Maa Katyayani Ki Aaarti)
जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय...गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय...कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय...त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय...सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय...अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय...अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय...दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय...दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननि माया ।
देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय...उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा ।
तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥ मैया जय... -
March 24, 2026 1:44 PM (IST) Posted by Arti Azad
विवाह बाधा होगी दूर
मां कात्यायनी की पूजा करने से अविवाहित कन्याओं की शादी के अवसर बनते हैं और उनकी शादी जल्द से जल्द होती है।
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March 24, 2026 1:29 PM (IST) Posted by Arti Azad
Chaitra Navtari Day 6 Live: गोधूली बेला में करें माता कात्यायनी की पूजा
माता कात्यायनी की पूजा प्रदोषकाल यानी गोधूली बेला में करना श्रेष्ठ माना गया है। इनकी पूजा में शहद का प्रयोग जरूर किया जाना चाहिए। देवी कात्यायनी की पूजा में लाल और पीला रंग के कपड़ों का भी बहुत महत्व है।
सुबह स्नान करके पूजा शुरू करने से पहले साफ और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
लाल रंग के आसन पर मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
सबसे पहले कलश देवता और गणेश जी का ध्यान करें।
फिर मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
इसके बाद फूल, अक्षत, रोली और धूप से पूजा करें।
मां को पीले फूल, पीली चूड़ियां और हल्दी की गांठें अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
शहद, पान और मिठाई का भोग लगाएं।
पूजा के बाद पूरी श्रद्धा से आरती करें और भगवान का आभार व्यक्त करें। -
March 24, 2026 12:47 PM (IST) Posted by Arti Azad
Navratri Day 6 Live Updates: मां कात्यायनी का प्रिय भोग
इस दिन मां कात्यायनी की पूजा में उनका प्रिय भोग भी अर्पित करना चाहिए। मां कात्यायनी का प्रिय भोग शहद और शहद से बने व्यंजन हैं। आज के दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें हलवा-पूरी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। शहद प्राकृतिक मिठास और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। जबकि, हलवा और पूरी का भोग समृद्धि और संतोष का संकेत देती है। शहद युक्त पान का भोग भी देवी कात्यायिनी को लगता है।
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March 24, 2026 11:23 AM (IST) Posted by Arti Azad
Navratri Day 6 Puja Live Updates: मां कात्यायनी ध्यान मंत्र
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥
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March 24, 2026 10:57 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Mata Rani Ki Aarti: माता रानी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरीमाँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरीकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरीकेहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरीकानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरीशुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरीचण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरीब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरीचौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरीतुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरीभुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरीकन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरीश्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी -
March 24, 2026 10:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
आज इस मंत्र का 21 बार करें जाप
अगर आप विवाहित हैं और आप चाहते हैं कि आपके रिश्ते की मजबूती हमेशा बरकरार रहे, आपके दाम्पत्य रिश्ते में प्यार कभी भी कम न हो, तो आज आपको स्नान आदि के बाद मां कात्यायनी की धूप-दीप, पुष्प और अनार के पत्तों से पूजा करनी चाहिए और माता के इस मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए । मंत्र इस प्रकार है- ऊँ ह्रीं कात्यायनि स्वाहा।
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March 24, 2026 9:55 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
मां कात्यायनी के मुख्य उपाय
- आज कुमकुम, कपूर, सिंदूर, घी, मिश्री और शहद का पेस्ट तैयार कर लें और देवी मां को तिलक लगायें। फिर इसी पेस्ट से अपने मस्तक पर भी टीका लगायें। माता के मंत्र का 11 बार जप करें।
- मिट्टी को घी और पानी में मिलाकर नौ गोलियां बना लें और इन्हें छाया में सुखायें। इन गोलियों को पीले सिंदूर की कटोरी में भरकर देवी मां को अर्पित करें। मंत्र का 51 बार जप करें। नवमी के दिन इन गोलियों को नदी में बहा दें। सिन्दूर को संभाल कर रखिये और जरूरी काम से जाते समय इस सिंदूर का टीका लगाइये।
- खेलकूद में सफलता पाने के लिए देवी मां को सिंदूर और शहद मिलाकर तिलक करें। मंत्र का 21 बार जप करें।
- राजनीति में सफलता पाने के लिए लाल कपड़े में 21 चूड़ियां, सिंदूर, दो जोड़ी चांदी की बिछिया, 5 गुडहल के फूल, 42 लौंग, 7 कपूर और परफ्यूम देवी के चरणों में अर्पित करें। मंत्र का एक माला यानी 108 बार जप करें।
- प्रतियोगिता में सफलता के लिए आज 7 प्रकार की दालों का चूरा बनाकर चीटियों को खिलायें। मंत्र का 51 बार जप करें।
- फिल्म या ग्लैमर की दुनिया में भाग्य आजमाने वाले देवी मां को देशी घी का तिलक लगायें और उनके सामने घी का दीपक जलायें। मंत्र का 21 बार जप करें।
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March 24, 2026 9:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Mata Ka Mantra: ऊँ ह्रीं कात्यायनि स्वाहा
अगर आपको किसी प्रकार का भय या डर बना रहता है या आप हमेशा किसी न किसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से घिरे रहते हैं, तो आज आपको मंत्र महार्णव में दिये मां कात्यायनी के आठ अक्षरों के विशेष मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। मंत्र - ऊँ ह्रीं कात्यायनि स्वाहा।
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March 24, 2026 9:17 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
कार्य में सफलता चाहिए तो करें मां कात्यायनी की पूजा
अगर आप कोई जटिल कार्य प्रारंभ करने जा रहे हैं और उसमें सफलता चाहिए,तो आपको मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां कात्यायनी की पूजा करने से यश की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को संसार में उसके कर्मों के कारण ख्याति मिलती है। साथ जो शत्रु पर विजय प्राप्ति के लिए भी मां कात्यायनी की पूजा करते हैं।
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March 24, 2026 8:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Navratri Day 6 Puja Vidhi: माता कात्यायनी की पूजा की विधि
- सुबह स्नान करके पूजा शुरू करने से पहले साफ और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- लाल रंग के आसन पर मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- सबसे पहले कलश देवता और गणेश जी का ध्यान करें।
- फिर मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद फूल, अक्षत, रोली और धूप से पूजा करें।
- मां को पीले फूल, पीली चूड़ियां और हल्दी की गांठें अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
- शहद, पान और मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजा के बाद पूरी श्रद्धा से आरती करें और भगवान का आभार व्यक्त करें।
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March 24, 2026 8:17 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
मां कात्यायनी की उपासना का महत्व
नवरात्रि पूजा के छठे दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'आज्ञा चक्र' में स्थित होता है। योग साधना में इस चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्त को सहज भाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
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March 24, 2026 7:41 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
देवी कात्यायनी आराधना मंत्र (Maa Katyayani Puja Mantra)
नवरात्रि के छठे दिन देवी दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा का बहुत महत्व है। मान्यता है कि देवी कात्यायनी की पूजा में लाल और सफेद रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ होता है। देवी कात्यायनी का ध्यान गोधूलि बेला में किया जाना चाहिए। कथा पाठ करने से पहले माता कात्यायनी के इस मंत्र का जाप जरूर करेंः
- ॐ देवी कात्यायन्यै नम:
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March 24, 2026 7:16 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
कात्यायनी मां की विशेष आरती
जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय...गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय...कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय...त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय...सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय...अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय...अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय...दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय...दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननि माया ।
देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय...उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा ।
तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥ मैया जय... -
March 24, 2026 7:00 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Navratri Day 6 Bhog: मां कात्यायनी का प्रिय भोग
इस दिन मां कात्यायनी की पूजा में उनका प्रिय भोग भी अर्पित करना चाहिए। मां कात्यायनी का प्रिय भोग शहद और शहद से बने व्यंजन हैं। आज के दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें हलवा-पूरी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। शहद प्राकृतिक मिठास और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। जबकि, हलवा और पूरी का भोग समृद्धि और संतोष का संकेत देती है। शहद युक्त पान का भोग भी देवी कात्यायिनी को लगता है।
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March 24, 2026 6:45 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Navratri Day 6 Live: नवरात्रि के छठे दिन की पूजा का शुभ मुहूर्त
- सुबह का शुभ समय: सुबह 06:21 से प्रातः 08:30 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 PM से 12:52 PM तक (यह समय विशेष संकल्पों के लिए श्रेष्ठ है)
- आरती का समय: शाम को सूर्यास्त के समय यानी लगभग शाम 06:30 के आसपास मां की आरती करना बहुत ही फलदायी होता है।
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March 24, 2026 6:36 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
मां कात्यायनी की आरती (Maa Katyayani Ki Aaarti)
जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जय महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा॥कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिए॥हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥ -
March 24, 2026 6:29 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Maa katyayani Katha: मां कात्यायनी की कथा
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, 'कत' नामक एक प्रसिद्ध महर्षि हुआ करते थे। उनका एक पुत्र हुआ, जिसका नाम कात्य पड़ा। आगे चलकर ऋषि कात्य के गोत्र में एक महर्षि कात्यायन हुए, जो अपने तप के कारण पूरे संसार में जाने गए। ऋषि कात्यायन की एक मनोकामना थी कि देवी दुर्गा उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लें। ऐसे में मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए महर्षि कात्यायन ने वर्षों तक कठोर तपस्या भी की। ऋषि के घोर तप से प्रसन्न होकर मां अंबे ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी इच्छा पूरी करने का वचन भी दिया। इसके बाद देवी ने अपना वचन पूरा करते हुए और ऋषि कात्यायन के घर जन्म लिया। उनकी पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण ही देवी भगवती का नाम कात्यायनी पड़ा।
पुराणों में वर्णन मिलता है कि महर्षि कात्यायन ने बड़े ही प्रेम से देवी कात्यायनी का पालन-पोषण किया था। इधर पृथ्वी पर महिषासुर का आंतक बढ़ता जा रहा था, वह दुराचारी सारी सीमाएं लांघ रहा था। दरअसल, महिषासुर को ये वरदान मिला हुआ था कि कोई भी पुरुष कभी उसे पराजित नहीं कर सकता, ना उसका अंत कर पाएगा। इसलिए उसे किसी का डर नहीं था और देखते ही देखते उसने देवलोक पर भी अपना कब्जा कर लिया था। तब भगवान विष्णु, ब्रह्मा और महादेव ने उसका अंत करने के लिए अपने तेज से एक शक्ति को उत्पन्न किया। मान्यता है कि महर्षि कात्यायन ने ही इस देवी की सर्वप्रथम विधिवत पूजा की थी, इसलिए देवी को कात्यायनी के नाम से जाना गया।
वहीं, देवी कात्यायनी से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, आश्विन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महर्षि कात्यायन के घर देवी की उत्पत्ति हुई थी। इसके बाद महर्षि ने शुक्ल पक्ष की सप्तमी, अष्टमी और नवमी तक अपने आश्रम में देवी की विधिवत पूजा की और दशमी को देवी के इस स्वरूप ने महिषासुर का वध किया था। जिसके कारण ही देवी के इस स्वरूप को कात्यायनी के नाम से जाना गया था। वहीं, महिषासुर का वध करने के कारण देवी को 'महिषासुर मर्दिनी' के नाम से भी जाना गया।
एक अन्य कथा के अनुसार, देवी दुर्गा का कात्यायनी स्वरूप अमोघ फलदायिनी है। ब्रज की गोपियों ने करुणावतार श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए कालिंदी यमुना के किनारे देवी कात्यायनी की ही आराधना की थी। यही वजह है कि आज भी मां कात्यायनी पूरे ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। वहीं, स्कन्द पुराण में देवी कात्यायनी के बारे में उल्लेख मिलता है कि उनकी उत्पत्ति परमेश्वर के सांसारिक क्रोध से हुई थी।