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Surya Kavach Paath: अर्घ्य देने से पहले करें सूर्य कवच का पाठ, मिलेगा स्वास्थ्य, सफलता और समृद्धि का वरदान!

Surya Kavach Paath: छठ पूजा में अर्घ्य से पहले सूर्य कवच का पाठ करना शुभ माना जाता है, जो मन, शरीर और आत्मा को सशक्त बनाता है। इससे आत्मबल बढ़ता और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, करियर में तरक्की होती है।

Surya Kavach Paath- India TV Hindi
Image Source : PTI अर्घ्य से पहले करें सूर्य कवच का पाठ

Surya Kavach Paath: छठ पूजा में सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है। यह भारत में सूर्य उपासना का सबसे बड़ा पर्व भी है। इस दौरान व्रती डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। ऐसा माना जाता है कि सूरज को जल अर्पित करने से पहले जातक द्वारा किया गया सूर्य कवच का पाठ करना बहुत शुभ होता है।

कहते हैं कि इस पाठ को करने से भगवान आदित्य की कृपा बनी रहती है और साधक को सफलता, सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। छठ पूजा जैसे पवित्र अवसर पर सूर्य कवच का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और सौभाग्य का प्रवेश होता है।

सूर्य कवच पाठ का महत्व

ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सूर्य कवच पाठ से व्यक्ति को अपार शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है। यह पाठ सूर्य की किरणों के समान जीवन में तेज और प्रकाश भर देता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग नियमित रूप से सूर्य कवच का पाठ करते हैं, उन्हें सरकारी कार्यों में सफलता, करियर में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

छठ पूजा में करते हैं सूर्य कवच का पाठ

छठ पर्व में व्रती डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने से पहले सूर्य कवच का पाठ करते हैं। यह पाठ सूर्य देव से आत्मबल और आरोग्य की कामना के लिए किया जाता है। मान्यता है कि यह पाठ नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति बनाए रखता है।

Shri Surya kavach Path: श्री सूर्य कवचम् पाठ

श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।
शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।1।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।
ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत् ।2।

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।
नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर: ।3।

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।
जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित:।4।

स्कंधौ प्रभाकरः पातु वक्षः पातु जनप्रियः ।
पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वांगं सकलेश्वरः ॥।5।

सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।
दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:।6।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।
सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति ।7।

॥ इति श्रीयाज्ञवल्क्यविरचितं श्रीसूर्यकवचं सम्पूर्णम् ॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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