Ekadashi Vrat Vidhi: यूं तो सनातन धर्म में हर शुभ काम के लिए महत्वपूर्ण तिथि देखी जाती है। वैसे तो हर एक तिथि का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन एकादशी तिथि को हिंदू कैलेंडर में विशेष दर्जा दिया जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन निर्जला व्रत भी किया जाता है। इस शुभ दिन पर तुलसी पूजन और परिक्रमा का विधान है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार मां तुलसी श्री विष्णु को अति प्रिय हैं। पूरे साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है यानी की हर माह में दो बार यह तिथि आती है। हर एकादशी का अपना महत्व बताया गया है। अगर आप पहली बार एकादशी व्रत रखने की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो यहां जानिए व्रत रखने का तरीका, इस माह पड़ने वाली एकादशी की तारीख और पूजा विधि क्या है।
जया एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को 4 बजकर 34 मिनट से होगी, जिसका समापन 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 56 मिनट पर होगा। इस एकादशी तिथि को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसे में जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
कितने एकादशी व्रत करने चाहिए?
हालांकि, आप किसी भी एकादशी से व्रत शुरू कर सकते हैं, लेकिन उत्पन्ना एकादशी से शुरुआत करना सबसे शुभ होता है। मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत कम से कम 5 से 11 साल तक करने का विधान है। अगर व्यक्ति की क्षमता हो तो वह मृत्यु पर्यंत भी व्रत रखा जा सकता है। जबकि, क्षमता न हो तो कम से कम एक साल तक व्रत करके उद्यापन करने का विधान बताया जाता है।
एकादशी व्रत की शुरुआत कैसे करें?
- इसके लिए एक दिन पहले यानी कि दशमी तिथि की शाम को ही सात्विक भोजन करें और रात में भोजन न करें।
- एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद साफ सुथरे कपड़े पहनें।
- अब घर के देव स्थान की साफ-सफाई करके उसे गंगाजल से शुद्ध करें और घी का दीपक जलाएं।
- अब हाथ में जल और पुष्प लेकर कहें "प्रभु, मैं आपकी कृपा से एकादशी का व्रत करने का संकल्प ले रहा हूं/रही हूं। मुझे इस व्रत को इतने समय तक (1, 2,3 साल या आजीवन) पूर्ण करने की शक्ति प्रदान करें।" ऐसा बोलकर व्रत का संकल्प लें।
- यह तय करें कि आप महीने के दोनों एकादशी तिथियों पर व्रत रखेंगे या केवल एक।
- अब भगवान विष्णु को चंदन, पीले फूल, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें (तुलसी के पत्ते एक दिन पहलें ही तोड़कर रख लें), क्योंकि ऐसा माता जाता है कि तुलसी पत्र के बिना श्री हरि भोग स्वीकार नहीं करते हैं।
- अगर संभव हो तो निर्जला व्रत करें, आपके बस की ना हो तो आप फलाहार भी कर सकते हैं। सुबह 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और दिन भर सच्चे मन से विष्णु भगवान का चिंतन करें।
- शाम के समय मां लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा के बाद आरती जरूर करें और उन्हें भोग लगाएं।
- अगले दिन यानी की द्वादशी तिथि को एकादशी व्रत का पारण शुभ समय में करें और गंगाजल व तुलसी दल ग्रहण करके अपना व्रत खोलें। भोजन का पहला निवाला गाय, पशु-पक्षियों या घर के सदस्यों को देना चाहिए।
एकादशी व्रतियों को क्या करना चाहिए
- एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए।
- इस दिन सुबह की के बाद जल से भरे कलश का दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
- पूजा दिन भजन कीर्तन में मन लगाना चाहिए।
- इस दिन चावल या आटे का ना तो सेवन करें और ना ही ये चीजें दान करें।
- इस दिन तुलसी की पूजा करनी चाहिए और तुलसी की परिक्रमा करनी चाहिए।
- एकादशी व्रत में घर में झाड़ू न लगाएं, ताकि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु न हो.
- एकादशी व्रत के दौरान बाल और नाखून न कटवाएं।
- द्वादशी तिथि को व्रत पारण से पहले किसी जरूरतमंद को भोजन और दान-दक्षिणा दें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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