वैनायकी गणेश चतुर्थी पर बप्पा के इन मंत्रों का करें जाप, धन-समृद्धि और करियर में सफलता के लिए बताए हैं कारगर
वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश के वक्रतुण्ड और उच्छिष्ट गणपति मंत्रों के विशेष प्रयोग बताए गए हैं। इन मंत्रों के जाप, हवन और पूजा से जुड़े उपायों के बारे में जानिए। आचार्य इंदु प्रकाश से कि किस उद्देश्य की कामना से किस मंत्र का जाप करना चाहिए।

बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी और नवरात्र का चौथा दिन है। इस विशेष अवसर पर भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना का महत्व बताया गया है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, आज के दिन गणेश जी के वक्रतुण्ड मंत्र और उच्छिष्ट गणपति मंत्र के विशेष प्रयोग करके धन-समृद्धि, करियर और जीवन से जुड़ी समस्याओं के लिए उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं इन मंत्रों के प्रयोग और उनसे जुड़े उपायों के बारे में।
वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी का महत्व
प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। यह व्रत नवरात्र के दौरान पड़ रहा है। ऐसे में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश के मंत्रों का प्रयोग करके उचित लाभ उठा सकते हैं।
वक्रतुण्ड मंत्र का प्रयोग
मनोवांछित कामना पूरी कर सकता है ये मंत्र
गणेश जी के वक्रतुण्ड मंत्र "ॐ वक्रतुण्डाय हुं" का 1008 बार जप करके एकाग्र मन से 108 आहुतियां दें। आप अष्टद्रव्यों में से किसी भी एक द्रव्य की आहुति दे सकते हैं। अष्टद्रव्य हैंः गन्ने का रस, सत्तू, केला, चिउड़ा, तिल, मोदक, नारियल और धान का लावा। इस प्रकार मंत्र जप करके इनमें से किसी एक द्रव्य की आहुति देने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता दूर होती है।
यह उपाय किसी भी पक्ष की चतुर्थी से लेकर उसी पक्ष की अगली चतुर्थी तक किया जाता है। इसमें रोज 10 हजार मंत्रों का जप करके अष्टद्रव्यों में से किसी भी एक द्रव्य से प्रतिदिन ही 108 आहुतियां देनी चाहिए। इस प्रकार उपाय करने से 6 महीने के अंदर ही व्यक्ति को उचित फल मिलने लगते हैं। अगर आप अपनी क्षमता के अनुसार यह उपाय कर पाएं तो बहुत अच्छा है। अगर नहीं, तो 1008 बार ही जप करके भी लाभ पा सकते हैं।
धन और समृद्धि के लिए वक्रतुण्ड मंत्र
अगर आप धन-समृद्धि में वृद्धि करना चाहते हैं, तो अन्न में घी मिलाकर 108 आहुतियां दें। अगर आप चाहते हैं कि आपके पास एक अच्छी-खासी जमा पूंजी हो और आपको अचानक कहीं से ढेर सारी धनराशि मिल जाए, तो इसके लिए नारियल की एक हजार आहुतियां दीजिए।
उच्छिष्ट गणपति नवार्ण मंत्र का प्रयोग
मंत्र है: हस्तिपिशाचिलिखे स्वाहा।
कहते हैं इस मंत्र के जाप से ही कुबेर जी निधियों के स्वामी बन गए। अतः यह मंत्र बड़ा ही फलदायी है।
करियर में सफलता का उपाय
अब बात आती है मंत्र प्रयोग की। कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर, उससे गणेश जी की मूर्ति बनाकर उसे घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करके उसकी पूजा करने से करियर में अच्छे फल मिलते हैं।
शत्रुओं से छुटकारा पाने का उपाय
अगर आप अपने शत्रुओं से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो नीम की लकड़ियों से श्री गणेश जी की प्रतिमा बनाकर उसका विधि-पूर्वक पूजन करें। यह उपाय आपको शत्रुओं से छुटकारा दिला सकता है।
सौभाग्य और सुरक्षा के लिए मंत्र
अगर आप किसी को अपने वश में करना चाहते हैं, तो आज के दिन उस व्यक्ति का ध्यान करके, जिसे आप अपने वश में करना चाहते हैं, घी, शहद और शक्कर को लावा में मिलाकर हवन करें। भोजपत्र पर या फिर सादे कागज पर लाल स्याही से उच्छिष्ट गणपति मंत्र को लिखकर अपने गले में धारण करें, इससे सौभाग्य की प्राप्ति होगी और हर प्रकार से सुरक्षा होगी।
उच्छिष्ट गणपति का वह मंत्र है: हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।
द्वादशाक्षर उच्छिष्ट गणपति मंत्र का प्रयोग
उच्छिष्ट गणपति का ही एक और द्वादशाक्षर मंत्र प्रयोग भी है। द्वादशाक्षर उच्छिष्ट गणपति मंत्र है: ऊँ ह्रीं गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा, जिसका आपको आज के दिन प्रयोग करना है।
वश में करने के लिए मंत्र जाप
आज के दिन नीम की लकड़ी से गणेश जी की मूर्ति बनाकर, उसकी प्राण-प्रतिष्ठा करके उसके सामने जिस किसी का ध्यान कर इस मंत्र का जप किया जाए, वह सेवक की तरह वश में हो जाता है और आपकी हर बात मानने लगता है। आप इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप कीजिए।
मंत्र है: ऊँ ह्रीं गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।
करियर में बाधा दूर करने का उपाय
अगर आप अपने करियर के बीच आने वाले किसी व्यक्ति को या ऑफिस में किसी व्यक्ति को अपने वश में करना चाहते हैं, तो आज के दिन किसी पवित्र नदी का जल लेकर उसे द्वादशाक्षर उच्छिष्ट गणपति मंत्र से 27 बार अभिमंत्रित करके उस जल से अपना मुंह धोना चाहिए। इस प्रयोग के प्रभाव से साधक जिसे देखता है या जो उसे देखता है, वह तत्काल उसके वश में हो जाता है।
द्वादशाक्षर उच्छिष्ट गणपति का वह मंत्र है: ऊँ ह्रीं गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा। शत्रु के उच्चाटन के लिए उपाय
धन-संपत्ति में वृद्धि के लिए मंत्र प्रयोग
शत्रुओं को वश में करने और अपनी धन-संपत्ति में वृद्धि करने का भी एक मंत्र प्रयोग जान लीजिए। सफेद आक या नीम की लकड़ी की गणेश प्रतिमा बनाकर, लाल चंदन और लाल फूलों से उसकी विधिपूर्वक पूजा करके उसे एक पात्र में रखें। इसके बाद उसे जमीन में एक हाथ नीचे गाड़कर उसके ऊपर बैठकर द्वादशाक्षर उच्छिष्ट गणपति मंत्र का 1008 बार जप करना चाहिए।
मंत्र है: ऊँ ह्रीं गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।
इस प्रकार मंत्र का जप करने से एक सप्ताह के अंदर ही शत्रु वश में आ जाते हैं। साथ ही धन-संपत्ति में वृद्धि भी होती है।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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