Jitiya Ke Gane (जितिया के गाने): जितिया पर्व को जीवित्पुत्रिका एवं जिउतिया व्रत भी कहा जाता है। हर साल ये पर्व आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस साल ये व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार को रखा जाएगा। ये व्रत महिलाएं निर्जला रखती हैं। प्रमुख रूप से ये पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। चलिए आपको बताते हैं जितिया पर्व के गाने।
Jitiya Ke Gane (जितिया के गाने)
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
- अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
- तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
- अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
- तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
- जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
- रहीह तू हरदम सबका से आगे
- पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
- कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
- जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
- एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- हमरो उमर तोहरा के लग जाए
- रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
- पावन परब हम तोहरे ला करिले
- कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
- तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
- कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
- जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
- जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा
- जुग जुग जिए मोर
- जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा
- जिउत वहांन देवता से करब हम अरजिया
- ऐ हो सखी भुखीब
- ऐ हो सखी भुखीब
- जितिया के परबिया…(x2)
- बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
- बड़ा भारी होला
- तीन दिन के होला सखी पावन परबिया
- न खाये उपवास पारण के बा बिधिया
- आशीन अनहरिया के अस्टमी तिथि के
- जीवतिया पुजाला निरजल व्रत रख के
- सासु जी से पूछब
- सासु जी से
- सासु जी से पूछब कुल व्रत के नियमिया…(x३)
- ऐ हो सखी भुखीब
- ऐ हो सखी भुखीब
- जितिया के परबिया…(x2)
- बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
- बड़ा भारी होला
- सप्तमी के दिने होला गंगा आसन्नवा
- नवनि संग मडवा वर्ती खाये एहि दिनवा
- नेनुवाके पातपर पुवा पकवनवा
- चील सियारिन दिहल जाला भोगवा
- गोतनि सग करब हम
- गोतनि सग
- गोतनि सग करब हम
- भोर में सरगहिया
- ऐ हो सखी भुखीब
- ऐ हो सखी भुखीब
- जितिया के परबिया…(x2)
- बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
- बड़ा भारी होला
- लव कुश पुजला सखी अष्टमी के संझिया
- कथा सुनीली बूढ़ होके चाहे कन्या
- नवमी के भोर होला पारण के दिनवा
- कांडा गिराउके बनेला भोजनवा
- सईया से मगाइब हम
- उत्तम जी से
- खुसबू मगाइये सोने के जिउतिया
- ऐ हो सखी भुखीब
- ऐ हो सखी भुखीब
- जितिया के परबिया…(x2)
- बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
- बड़ा भारी होला...
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