1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Jyeshtha Amavasya Upay: कल मनाई जाएगी ज्येष्ठ अमावस्या, पितृों की प्रसन्नता के लिए जरूर करें ये अचूक उपाय, दूर होगी अशांति और कलेश

Jyeshtha Amavasya Upay: कल मनाई जाएगी ज्येष्ठ अमावस्या, पितृों की प्रसन्नता के लिए जरूर करें ये अचूक उपाय, दूर होगी अशांति और कलेश

Jyeshtha Amavasya Upay: ज्येष्ठ अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपायों घर की अशांति दूर होती है। इस बार वट सावित्री के साथ ही शनि जयंती भी पड़ रही है, जिससे अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है। जानें किन उपायों से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होगी।

Jyeshtha Amavasya- India TV Hindi
Image Source : PTI ज्येष्ठ अमावस्या पर पितृ शांति के उपाय

Jyeshtha Amavasya Upay: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष महत्व दिया गया है, लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या को पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस साल ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई 2026, शनिवार को मनाई जा रही है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए उपायों से पितृ दोष से राहत मिलती है। तो चलिए जानते हैं कि ज्येष्ठ अमावस्या पर पितृों की प्रसन्नता के लिए कौन से उपाय करने चाहिए, जिससे घर का कलेश दूर होगा और सुख-शांति का आगमन। 

कब है ज्येष्ठ अमावस्या 2026

द्रिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5:11 बजे शुरू होगी और 17 मई 2026 को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 16 मई, शनिवार को ही स्नान-दान और व्रत किया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पितरों की कृपा पाने के लिए बहुत शुभ माना गया है।

पितरों के लिए करें तर्पण

मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या पर तर्पण करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है। सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल लें और उसमें काला तिल, सफेद फूल और कुश मिलाएं। फिर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूर्वजों का ध्यान करते हुए जल अर्पित करें और 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से पितृों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पीपल के पेड़ की पूजा का महत्व

शास्त्रों में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें देवताओं के साथ पितृों का भी वास होता है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुबह पीपल के पेड़ की जड़ में जल और कच्चा दूध अर्पित करें। वहीं शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर की नकारात्मकता और क्लेश दूर होते हैं।

दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक

दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा कहा जाता है। अमावस्या की शाम घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का लंबी बाती वाला दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इससे पितरों का मार्ग प्रकाशित होता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

इस दिन घर का वातावरण शांत और सात्विक रखना चाहिए। तामसिक भोजन से दूरी बनाएं और किसी भी तरह के विवाद या अपशब्द बोलने से बचें। खासतौर पर बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह दिन पितृों को समर्पित है। ज्येष्ठ अमावस्या का दान और पितृ संबंधित उपाय जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बढ़ाने वाले माने गए हैं। वहीं, इस साल शनि जयंती और वट सावित्री होने से ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है।