Kartik Maas mein Tulsi tulsi puja Aur Deepak Jalane ka Mahatva: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज 8 अक्टूबर से पवित्र कार्तिक महीने के शुरुआत हो चुकी है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित इस महीने में श्रीहरि की विशेष कृपा मिलती है। कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा सदियों से हैं और आज भी निभाई रही है। वैसे तो घर के बड़े-बुजुर्ग हमेशा ही तुलसी जी के पास दीपक जलाने के लिए करते हैं, लेकिन कार्तिक के महीने में बिना नागा किए रोजाना सुबह और शाम तुलसी जी के पास दीपक लगाया जाता है।
क्या आपके मन में कभी यह सवाल नहीं उठा कि आखिर क्यों कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपक जलाते हैं और तुलसी जी के पास दीपक जलाने से क्या होता है? आज हम इस आर्टिकल के जरिए इस सवाल का जवाब देने जा रहे हैं कि आखिर कार्तिक मास में तुलसी पर दीपक क्यों जलाते हैं।
कार्तिक में तुलसी पर दीपक जलाने से क्या होता है? (Kartik mein Tulsi Par Deepak Jalane se Kya Hota hai)
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक मास विष्णु जी की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए सबसे अच्छा समय होता है और तुलसी को उनकी अति प्रिय मानी गई है। मान्यता है कि कार्तिक माह की अमावस्या को तुलसी माता का जन्म हुआ था, इसलिए पूरा महीना उनकी आराधना के लिए समर्पित है। तुलसी के पास दीपक जलाने से हमारे घर में बिना किसी रुकावट सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। दीपक के प्रकाश से नकारात्मकता दूर होती है, जिससे घर में धन और समृद्धि बढ़ती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह में श्री हरि विष्णु की प्रिय तुलसी जी के पूजन और उनके पास दीपक जलाने से वह जल्दी ही प्रसन्न होते हैं।
कार्तिक मास में तुलसी पर दीपक जलाने की विधि (Kartik Maas mein Tulsi par Deepak Jalane ki Vidhi)
- कार्तिक मास में रोजाना सुबह और संध्या का समय तुलसी के पौधे को जल जरूर चढ़ाएं।
- कार्तिक के पवित्र महीने में सूर्यास्त के बाद तुलसी जी के पास रोज नियम से दीपक जलाएं।
- दीपक लाने के लिए शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का उपयोग करना चाहिए।
- तुलसी जी के पास दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप जरूर करें- शुभं करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते
- तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीपक को उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।
- दीपक जलाने बाद तुलसी जी की आरती करें। आप आरती के लिए उसी दीपक को उपयोग में ले सकते हैं।
इन नियमों का रखें ध्यान (Tulsi Puja ke Niyam)
- तुलसी जी के पास दीपक जलाने के लिए सरसों के तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- कार्तिक मास में रविवार और एकादशी के दिन तुलसी जी को जल अर्पित नहीं करना चाहिए।
- इसके साथ ही कार्तिक मास में रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने क मनाही है।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ (Impotance of Tulsi Plant)
धार्मिक दृष्टि से तुलसी का पौधा भक्ति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, लेकिन तुलसी पूजा केवल धार्मिक दृष्टि से ही लाभकारी नहीं है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। विज्ञान भी इस बात को मानता है कि तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करता है और सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इतना ही नहीं तुलसी की सुगंध मन को शांत करके मेंटल स्ट्रेस को कम करती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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