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Kojagiri Purnima 2025: आज है कोजागिरी पूर्णिमा, जानिए पूजा का समय, सही विधि और कथा

मां लक्ष्मी की कृपा दिलाने वाला यह व्रत और इससे जुड़ी पूजा, आज 6 अक्टूबर 2025 को की जाएगी। कोजागिरी व्रत कथा धन, सौभाग्य, आरोग्य और मानसिक शांति जैसे सभी सुख प्रदान करता है। जानें शरद कोजागर व्रत की पूजा विधि और सही समय

kojagiri Purnima 2025- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK/CANVA कोजागिरी व्रत पूजा विधि

Kojagiri Vrat 2025 Katha, Puja Vidhi: हिंदू धर्म में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आज 6 अक्टूबर 2025, सोमवार को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। इसे कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन किए जाने वाला व्रत मंगलकारी होता है। शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। शरद पूर्णिमा व्रत कथा को अत्यंत गूढ़ और फलदायी बताया गया है। यहां जानिए शरद कोजागर पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त क्या है।    

कोजागर पूजा का समय

मां लक्ष्मी की कोजागर पूजा कोजागर पूजा सोमवार, अक्टूबर 6 2025 को
कोजागर पूजा निशिता काल -  6 अक्टूबर 2025 से 11:45 PM से प्रारंभ होकर 7 अक्टूबर को 12:34 AM तक
पूजा की कुल अवधि - 00 घंटे 49 मिनट्स
कोजागर पूजा के दिन चन्द्रोदय - 05:27 PM 
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 06, 2025 को 12:23 PM बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अक्टूबर 07, 2025 को 09:16 AM बजे

जानिए कोजागिरी व्रत पूजा विधि

शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की विशेष पूजा रात्रि को निशीथ काल में करने का विधान है। पूजा विधि शुरू करने के लिए सबसे पहले नहा धोकर खुद को साफ-सुधरे कपड़े पहनकर खुद को पवित्र करें। अब देवी लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र की धूप, दीप, रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, कमल गट्‌टे, कौड़ी, पान, सुपारी, सिंघाड़ा, इलायची आदि अर्पित करते करें। इसी के साथ विधि-विधान से माता की पूजा करें। इसके बाद मां लक्ष्मी के लिए शुद्ध घी के 11 दीए जलाएं। इस दौरान देवी लक्ष्मी के इस मंत्र की एक माला जाप करें। 

मंत्र इस प्रकार है- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
 
इस दिन साधक को माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्रीसूक्त, लक्ष्मी अष्टकं, लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। चंद्रमां की रोशनी में बनाए गए खीर के चढ़ाए को अगले दिन सभी को बांटकर खुद भी ग्रहण करें।

कोजागिरी पूर्णिमा का महत्व

आश्विन माह की पूर्णिमा को कोजागिरी शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस तिथि में चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ चमकता है। कहा जाता है कि यह व्रत रखने वाले साधकों के जीवन में खुशियों के साथ-साथ समृद्धि भी प्रवेश करती है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी तिथि पर मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इस दिन रात के समय चांद की रोशनी में खीर बनाने का विधान भी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दूध या दूध से बनी चीजें खुले आसमान  के नीचे रखने से उसमें अमृत गिरता है, जिसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से व्यक्ति को आरोग्य और सौंदर्य की प्राप्ति होती है। 

कोजागिरी पूर्णिमा व्रत कथा

कोजागर पूर्णिमा व्रत करने वालों को इस दिन कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। जो इस प्रकार है- पुराने समय में एक साहूकार था, जिसकी दो पुत्रियां थीं। दोनों बहनें बहुत धार्मिक स्वभाव की थीं। दोनों बहनें क साथ पूर्णिमा का उपवास भी रखती थीं। शादी के बाद भी दोनों ने पूर्णिमा की व्रत जारी रखा, लेकिन छोटी बेटी के व्रत पूरा नहीं रखती थी और शाम के समय भोजन कर लेती थी। इसी कारण छोटी बेटी को व्रत का पुण्य फल नहीं मिल पाता था। इसका परिणाम यह हुआ कि साहूकार की छोटी बेटी की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। 


परेशान बेटी ने धर्म के जानकारों से अपने दुख का कारण पूछा, जो पंडितों ने उसे बताया तुम पूर्णिमा का व्रत अधूरा रखती हो, जिसके कारण तुम्हें तकलीफ भोगनी पड़ रही है। पंडितों ने उसे पूर्णिमा का व्रत पूरी विधि-विधान से करने के लिए कहा। इसके बाद छोटी बहन ने पूर्णिमा का व्रत विधिवत पूरा किया। इसके बाद उसे एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जो कुछ ही दिन जीवित रहा।

उसने अपने मरे हुए पुत्र को एक पाटे पर लेटा कर ऊपर से चादर से ढक दिया। फिर अपनी बड़ी बहन को बुलाया। जब बड़ी बहन बच्चे के पास ही रखे पाटे पर बैठने लगी, तो उसका घाघरा बच्चे को छू गया। जिससे छोटी बहन की संतान जीवित हो उठी।  यह देख बड़ी बहन बोली यह तो जीवित है, तब छोटी बहन ने कहा कि यह तो मर गया था। तेरी पूर्णिमा व्रत के पुण्य फल से जीवित हो हुआ था। इसके बाद उसने बड़ी धूमधाम से शरद पूर्णिमा का व्रत करने की घोषणा कर दी। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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