Navratri 2026 Mata Chandraghanta, Aarti, Mantra Live: नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, आरती, कथा, भोग, मंत्र और शुभ मुहूर्त
Navratri 2026 Maa Chandraghanta Puja Vidhi, Mantra Live: माता चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। माता को प्रसन्न करने के लिए किस विधि से आपको पूजा करनी चाहिए और किन मंत्रों, आरती आदि का पाठ करने से आपको लाभ होगा आइए जानते हैं।

Navratri 2026 Mata Chandraghanta, Aarti, Mantra Live: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। चैत्र नवरात्रि 2026 में 21 मार्च को माता चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। माता के माथे पर एक अर्धचंद्र सुशोभित है, इसलिए माता को चंद्रघंटा कहा जाता है। माता का वाहन शेर है और मां भक्तों का कल्याण करने वाली हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा आपको कैसे करनी चाहिए और किन मंत्रों, आरती, कथा का पाठ करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है, आइए जानते हैं विस्तार से।
माता चंद्रघंटा की पूजा विधि (Maa Chandraghanta Ki PujaVidhi)
- नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा के लिए आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद लाल या पीले रंग के वस्त्र आपको धारण करने चाहिए।
- इसके बाद पूजा स्थल पर गंगाजल आपको छिड़कना चाहिए और माता की तस्वीर या प्रतिमा पूजा स्थल पर स्थापित करनी चाहिए।
- इसके बाद धूप-दीप आपको जलाना चाहिए और सिंदूर, गंध, धूप, अक्षत आदि माता को अर्पित करना चाहिए।
- माता को चमेली के फूल अर्पित करना अतिशुभ होता है। अगर चमेली के फूल न हों तो कोई पीला फूल आप मां को अर्पित कर सकते हैं।
- भोग के रूप में माता को खीर, शहद या दूध से बनी मिठाई आप अर्पित कर सकते हैं।
- माता की पूजा के दौरान 'ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः' मंत्र करना आपके लिए कल्याणकारी रहेगा।
- इसके साथ ही दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती आदि का पाठ भी आप पूजा के दौरान कर सकते हैं।
- पूजा के अंत में आपको आरती का पाठ करना चाहिए और माता से अपने मन की मुराद कहनी चाहिए।
माता चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए मंत्र
- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
- ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।
- पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
- या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Live updates : Navratri 2026 Mata Chandraghanta, Aarti, Mantra Live
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March 21, 2026 2:50 PM (IST) Posted by Arti Azad
Mata Chandraghanta Aarti: चंद्रघंटा माता आरती
जय जयति जय चंद्रघंटा मां जय जयति जय चंद्रघंटा
तुम्हरे नाम का बजता, तुम्हरे नाम का बजता सृष्टि में डंका
मां जयति जय चंद्रघंटादशभुजा मात के सोहे खड्ग खपार धारी, मां खड्ग खपार धारी
घंटा माथ विराजे, घंटा माथ विराजे, घंटा माथ विराजे, अर्ध चन्द्रकारीमां जयति जय चंद्रघंटा
सिंह वाहिनी देवी दानव संघारे, मां दानव संघारे
छवि अनुपम है मैया, छवि अनुपम है मैया, शक्ति अवकारीमां जयति जय चंद्रघंटा
धर्म की रक्षक जननी मां पाप का अंत करे, मां पाप का अंत करे
देख के शक्ति मां की, देख के शक्ति, मां की काम स्वयं भी डरे
मां जयति जय चंद्रघंटाघंटा शंख मृदंगा मां तेरे दर बाजे, मां तेरे दर बाजे
हीरे मोती पन्ने, हीरे मोती पन्ने, चरणों में राजेमां जयति जय चंद्रघंटा
श्रद्धा भक्ति से जो मैया को ध्याता, मेरी मैया को ध्याता
भक्त वो मनवांछित फल, भक्त वो मनवांछित फल, मैया से पातामां जयति जय चंद्रघंटा
नव दुर्गो में मैया तीजा तेरा स्थान, मां तीजा तेरा स्थान
तीजे नवराते को, तीजे नवराते को, भक्त धरे तेरा ध्यानमां जयति जय चंद्रघंटा
तीजे नवराते को मां व्रत जो तेरा धारे, मां व्रत जो तेरा धारे
सिद्ध कामना होती, सिद्ध कामना होती, भव निधि से तारेमां जयति जय चंद्रघंटा
हाथ जोड़ कर विनती है इतनी माता, बस है इतनी माता
भक्ति अपनी देना, भक्ति अपनी देना और ना कुछ चाहतामां जयति जय चंद्रघंटा
जय जयति जय चंद्रघंटा मां जय जयति जय चंद्रघंटा
तुम्हरे नाम का बजता, तुम्हरे नाम का बजता सृष्टि में डंका
मां जयति जय चंद्रघंटा -
March 21, 2026 2:24 PM (IST) Posted by Arti Azad
मां चंद्रघंटा की पूजा में करें ये विशेष उपाय
- इस दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई और खीर अति प्रिय मानी जाती है।
- भोग लगाने के बाद इसे छोटी कन्याओं को बांटना शुभ माना जाता है, इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है।
- पूजा के समय घंटी या शंख जरूर बजाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है।
- पूरे दिन गुस्सा, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच से दूर रहें, मां चंद्रघंटा की पूजा में शुद्ध मन बहुत जरूरी होता है।
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March 21, 2026 2:12 PM (IST) Posted by Arti Azad
कौन हैं माता चंद्रघंटा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब असुरों ने देवताओं को परेशान किया, तब माता चंद्रघंटा ने अपने उग्र रूप में उनका संहार किया था। उनकी घंटी की ध्वनि से असुर भयभीत हो जाते थे और युद्ध में पराजित हो जाते थे। माता चंद्रघंटा 'मणिपुर चक्र' से जुड़ी मानी जाती हैं। उनकी साधना से व्यक्ति के भीतर शक्ति, धैर्य और आत्मबल का विकास होता है। माता का वाहन सिंह यानी शेर होता है और उनका रंग स्वर्ण के समान चमकदार होता है।
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March 21, 2026 1:40 PM (IST) Posted by Arti Azad
माता चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करें
ऊं देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्.
सिंहारूढ़ा चंद्रघंटा यशस्विनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.
खड्ग, गदा, त्रिशूल, चाप-शर, पद्म, कमंडलु, माला, वराभीतकराम्॥ -
March 21, 2026 1:16 PM (IST) Posted by Arti Azad
Maa Chandraganta: मां चंद्रघंटा की विशेष पूजा विधि का महत्व
माता रानी के नौ रूप होते हैं, जिन्हें नवरात्रि में पूजा जाता हैं। मां अंबे के हर एक रूप की एक अलग महिमा बताई गई है। माता के इन नौ स्वरूपों की पूजा करके साधक जीवन में शक्ति, साहस, निडरता, लीडरशिप जैसा गुणों की प्राप्ति कर सकता है। हर शक्ति को पूजने की एक तरीका, प्रिय भोग, नियम और सावधानियां बताई गई है। ताकि साधक को अपनी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। इसी तरह मां चंद्रघंटा की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। अगर घर में मूर्ति स्थापित है तो उसे दूध, केसर और केवड़े के जल से स्नान कराना चाहिए। इसके बाद सफेद कमल या पीले गुलाब अर्पित कर विधिवत पूजा की जाती है, जिससे देवी की कृपा प्राप्त होती है। नीचे विस्तार से जानिए मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
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March 21, 2026 12:44 PM (IST) Posted by Arti Azad
मां चंद्रघंटा का भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां, शहद और खीर का भोग अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि ऐसे भोग से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस विशेष दिन पर माता को प्रसन्न करने के लिए आप उन्हें मखाने की खीर का भोग लगा सकते हैं। इस दिन नींबू, इमली या सूखा नारियल मां को अर्पित नहीं करना चाहिए।
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March 21, 2026 12:05 PM (IST) Posted by Arti Azad
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (Maa Chandraghanta Puja Vidhi)
नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करके मां का ध्यान करें।
मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए लाल और पीले फूलों का उपयोग करना चाहिए।
देवी चंद्रघंटा पूजा में अक्षत, चंदन और भोग के लिए पेड़े चढ़ाना चाहिए।
मां चंद्रघंटा के नाम का संबंध उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी से है, जो उनकी पहचान को दर्शाता है। उनकी पूजा के दौरान घंटी बजाना आवश्यक माना गया है। कहता हैं कि मंत्रों का जप, घी से दीपक जलाने, आरती, शंख और घंटी बजाने से मां प्रसन्न होती हैं।
मां को चमेली के फूल, सिंदूर और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं और 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः' मंत्र का जाप किया जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। -
March 21, 2026 10:46 AM (IST) Posted by Arti Azad
Mata Chandraghanta: मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप
मां अंबे की तीसरी शक्ति है मां चंद्रघंटा। सिंह की सवारी करने वाली मां चंद्रघंटा का रूप स्वर्णिम आभा से युक्त है। मां चंद्रघंटा अपने मस्तक पर मुकुट धारण करती हैं उसमें अर्धचंद्र और दिव्य घंटी लगी है, इसलिए इस स्वरूप में देवी मां चंद्रघंटा कहलाती हैं। माता चंद्रघंटा की पूजा शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है। वे अपने हाथों में त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, तलवार, कमल, घंटा, रुद्राक्ष माला और कमंडलु धारण करती हैं। उनकी एक भुजा अभय मुद्रा में है, जो भय के निवारण का प्रतीक है।
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March 21, 2026 10:17 AM (IST) Posted by Arti Azad
Chaitra Navratri 2026: श्री दुर्गा स्तुति
जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां ।
उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।हे महालक्ष्मी हे महामाया,
तुम में सारा जगत समाया ।
तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
सारे काज संवारिणी मां ।
जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मांशैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
चंद्रघंटा कूष्मांडा मां ।
स्कंदमाता कात्यायनी माता,
शरण तुम्हारी सारा जहां।।कालरात्रि महागौरी तुम हो
सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मांअजा अनादि अनेका एका,
आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
गावहिं सदा देव मुनि संता।।अपने साधक सेवक जन पर,
सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
जय जगजननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां।।दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी मां,
जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी मां।। -
March 21, 2026 9:19 AM (IST) Posted by Arti Azad
Mata Chandraghanta: चंद्रघंटा माता का स्तुति मंत्र क्या है?
माता चंद्रघंटा का स्तुति मंत्र नीचे दिया गया है। इस मंत्र का जप करने से माता प्रसन्न होती हैं।
मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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March 21, 2026 9:06 AM (IST) Posted by Arti Azad
Chaitra Navratri 2026: व्रत के दौरान क्या खाएं और क्या नहीं?
नौ दिवसीय माता के व्रत रखने वाले लोगों को व्रत के दौरान नारियल पानी, मखाने, साबूदाना खिचड़ी के साथ ही ताजे फल खाने चाहिए। वहीं, व्रत करने वालों को गलती से भी तला-भुना भोजन नहीं खाना चाहिए।
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March 21, 2026 8:23 AM (IST) Posted by Arti Azad
Chaitra Navratri: नवरात्रि के तीसरे दिन करें माता के इन 108 नामों का जप
उमा-ॐ उमायै नमः।
जगन्माता-ॐ जगन्मात्रे नमः।
महालक्ष्मी-ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
शिवप्रिया-ॐ शिवप्रियायै नमः।
विष्णुमाया-ॐ विष्णुमायायै नमः।
शुभा-ॐ शुभायै नमः।
शान्ता-ॐ शान्तायै नमः।
सिद्धा-ॐ सिद्धायै नमः।
सिद्धसरस्वती-ॐ सिद्धसरस्वत्यै नमः।
क्षमा- ॐ क्षमायै नमः।
कान्तिः-ॐ कान्त्यै नमः।
प्रभा-ॐ प्रभायै नमः।
ज्योत्स्ना-ॐ ज्योत्स्नायै नमः।
पार्वती-ॐ पार्वत्यै नमः।
सर्वमङ्गला-ॐ सर्वमङ्गलायै नमः।
हिङ्गुला- ॐ हिङ्गुलायै नमः।
चण्डिका-ॐ चण्डिकायै नमः।
दान्ता-ॐ दान्तायै नमः।
पद्मा-ॐ पद्मायै नमः।
लक्ष्मी-ॐ लक्ष्म्यै नमः।
हरिप्रिया-ॐ हरिप्रियायै नमः।
त्रिपुरा-ॐ त्रिपुरायै नमः।
नन्दिनी-ॐ नन्दिन्यै नमः।
नन्दा-ॐ नन्दायै नमः।
सुनन्दा-ॐ सुनन्दायै नमः।
सुरवन्दिता-ॐ सुरवन्दितायै नमः।
यज्ञविद्या-ॐ यज्ञविद्यायै नमः।
महामाया-ॐ महामायायै नमः।
वेदमाता-ॐ वेदमात्रे नमः।
सुधा-ॐ सुधायै नमः।
धृतिः-ॐ धृत्यै नमः।
प्रीतिः-ॐ प्रीतये नमः।
प्रथा-ॐ प्रथायै नमः।
प्रसिद्धा-ॐ प्रसिद्धायै नमः।
मृडानी-ॐ मृडान्यै नमः।
विंध्यवासिनी-ॐ विन्ध्यवासिन्यै नमः।
सिद्धविद्या-ॐ सिद्धविद्यायै नमः।
महाशक्तिः-ॐ महाशक्तये नमः।
पृथ्वी-ॐ पृथ्व्यै नमः।
नारदसेविता-ॐ नारदसेवितायै नमः।
पुरुहुतप्रिया-ॐ पुरुहूतप्रियायै नमः।
कान्ता-ॐ कान्तायै नमः।
कामिनी-ॐ कामिन्यै नमः।
पद्मलोचना-ॐ पद्मलोचनायै नमः।
प्रह्लादिनी-ॐ प्रह्लादिन्यै नमः।
महामाता-ॐ महामात्रे नमः।
दुर्गा-ॐ दुर्गायै नमः।
दुर्गतिनाशिनी-ॐ दुर्गतिनाशिन्यै नमः।
ज्वालामुखी-ॐ ज्वालामुख्यै नमः।
सुगोत्रा-ॐ सुगोत्रायै नमः।
ज्योतिः-ॐ ज्योतिषे नमः।
कुमुदवासिनी-ॐ कुमुदवासिन्यै नमः।
दुर्गमा-ॐ दुर्गमायै नमः।
दुर्लभा-ॐ दुर्लभायै नमः।
विद्या-ॐ विद्यायै नमः।
स्वर्गतिः-ॐ स्वर्गत्यै नमः।
पुरवासिनी-ॐ पुरवासिन्यै नमः।
अपर्णा-ॐ अपर्णायै नमः।
शाम्बरीमाया-ॐ शाम्बरीमायायै नमः।
मदिरा-ॐ मदिरायै नमः।
मृदुहासिनी-ॐ मृदुहासिन्यै नमः।
कुलवागीश्वरी-ॐ कुलवागीश्वर्यै नमः।
नित्या-ॐ नित्यायै नमः।
नित्यक्लिन्ना-ॐ नित्यक्लिन्नायै नमः।
कृशोदरी-ॐ कृशोदर्यै नमः।
कामेश्वरी-ॐ कामेश्वर्यै नमः।
नीला-ॐ नीलायै नमः।
भीरुण्डा-ॐ भीरुण्डायै नमः।
वह्निवासिनी-ॐ वह्निवासिन्यै नमः।
लम्बोदरी-ॐ लम्बोदर्यै नमः।
महाकाली-ॐ महाकाल्यै नमः।
विद्याविद्येश्वरी-ॐ विद्याविद्येश्वर्यै नमः।
नरेश्वरी-ॐ नरेश्वरायै नमः।
सत्या-ॐ सत्यायै नमः।
सर्वसौभाग्यवर्धिनी-ॐ सर्वसौभाग्यवर्धिन्यै नमः।
सङ्कर्षणी-ॐ सङ्कर्षण्यै नमः।
नारसिंही-ॐ नारसिंह्यै नमः।
वैष्णवी-ॐ वैष्णव्यै नमः।
महोदरी-ॐ महोदर्यै नमः।
कात्यायनी-ॐ कात्यायन्यै नमः।
चम्पा-ॐ चम्पायै नमः।
सर्वसम्पत्तिकारिणी-ॐ सर्वसम्पत्तिकारिण्यै नमः।
नारायणी-ॐ नारायण्यै नमः।
महानिद्रा-ॐ महानिद्रायै नमः।
योगनिद्रा-ॐ योगनिद्रायै नमः।
प्रभावती-ॐ प्रभावत्यै नमः।
प्रज्ञापारमिता-ॐ प्रज्ञापारमितायै नमः।
प्रज्ञा-ॐ प्रज्ञायै नमः।
तारा-ॐ तारायै नमः।
मधुमती-ॐ मधुमत्यै नमः।
मधु-ॐ मधुवे नमः।
क्षीरार्णवसुधाहारा-ॐ क्षीरार्णवसुधाहारायै नमः।
कालिका-ॐ कालिकायै नमः।
सिंहवाहना-ॐ सिंहवाहिन्यै नमः।
ओंकारा-ॐ ओंकारायै नमः।
वसुधाकारा-ॐ वसुधाकारायै नमः।
चेतना-ॐ चेतनायै नमः।
कोपनाकृतिः-ॐ कोपनाकृत्यै नमः।
अर्धबिन्दुधरा-ॐ अर्धबिन्दुधरायै नमः।
धारा-ॐ धारायै नमः।
विश्वमाता-ॐ विश्वमात्रे नमः।
कलावती-ॐ कलावत्यै नमः।
पद्मावती-ॐ पद्मावत्यै नमः।
सुवस्त्रा-ॐ सुवस्त्रायै नमः।
प्रबुद्धा-ॐ प्रबुद्धायै नमः।
सरस्वती-ॐ सरस्वत्यै नमः।
कुण्डासना-ॐ कुण्डासनायै नमः।
जगद्धात्री- ॐ जगद्धात्र्यै नमः।
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March 21, 2026 7:34 AM (IST) Posted by Arti Azad
Mata Chandraghanta: माता चंद्रघंटा की 10 भुजाएं किस बात का प्रतीक हैं?
माता की दस भुजाएं दस दिशाओं का प्रतीक हैं। माता की भुजाएं यह संदेश भी देती हैं कि माता हर दिशा में अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। माता के हाथों में गदा, त्रिशूल, तलवार, धनुष आदि विराजमान हैं जो दुष्टों का नाश करने के लिए हैं। वहीं माता के हाथ में कमल, कमंडल माता की सृजनात्मक क्षमता को दर्शाते हैं।
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March 21, 2026 7:32 AM (IST) Posted by Arti Azad
Chaitra Navratri 2026: मां चंद्रघंटा की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
- माता की पूजा के समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- माता को लाल, सफेद फूल ही अर्पित करें।
- माता को चंदन अवश्य अर्पित करें।
- मां चंद्रघंटा को खीर का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान नकारात्मक विचारों को मन में न आने दें।
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March 20, 2026 11:43 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
शक्ति और सुरक्षा के लिए नवरात्रि के दौरान करें इस मंत्र का जप
नवरात्रि के दौरान शक्ति और सुरक्षा के लिए आपको नीचे दिए मंत्र का निरंतर जप करना चाहिए। इस मंत्र के जप से आपको शारीरिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है और मां आपकी सुरक्षा करती हैं।
मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
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March 20, 2026 11:19 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
नवरात्रि की पूजा के दौरान कोई गलती होने पर करें इस मंत्र का जप
मंत्र-
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व ईश्वरी॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥ -
March 20, 2026 10:52 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति क्यों जलाई जाती है?
अखंड ज्योति भक्ति और माता दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है। साथ ही ये भक्त की माता के प्रति आस्था को भी दर्शाता है। नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति जलाने से घर में सकारात्मकता आती है और जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं।
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March 20, 2026 10:17 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Chaitra Navratri: नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा के लिए शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त के बाद सुबह 06:15 से 08:30 तक
- अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 से 12:55 तक
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March 20, 2026 9:51 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
नवरात्रि के दौरान लौंग का यह उपाय करने से सुधरेगा स्वास्थ्य
अगर आप बेहतर स्वास्थ्य पाना चाहते हैं, तो नवरात्रि में किसी भी दिन माँ दुर्गा को एक कपूर और 6 लौंग अर्पित करें। साथ ही दुर्गा जी के मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है- देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि। ऐसा करने से आपकी सेहत में अच्छे बदलाव आएंगे।
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March 20, 2026 9:13 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन करें दुर्गा कवच का पाठ
मार्कण्डेय उवाच
यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम् ।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह ॥ 1 ॥
ब्रह्मोवाच
अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम् ।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुश्व महामुने ॥ 2 ॥प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥ 3 ॥पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।
सप्तमं कालरात्रिश्च महागौरीति चाष्टमम् ॥ 4 ॥नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ॥ 5 ॥अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे ।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः ॥ 6 ॥न तेषां जायते किञ्चित् अशुभं रणसङ्कटे ।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि ॥ 7 ॥यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां सिद्धि: प्रजायते ।
प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना ॥ 8 ॥ऐन्द्री गजसमारुढ़ा वैष्णवी गरुडासना ।
माहेश्वरी वृषारुढ़ा कौमारी शिखिवाहना ॥ 9 ॥ब्राह्मी हंससमारुढ़ा सर्वाभरणभूषिता ।
नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः ॥ 10॥दृश्यन्ते रथमारुढ़ा देव्यः क्रोधसमाकुलाः ।
शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम् ॥ 11 ॥खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च ।
कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम् ॥ 12॥दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च ।
धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै ॥ 13 ॥महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि ।
त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि ॥ 14 ॥प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता ।
दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी ॥ 15 ॥प्रतीच्यां वारुणी रक्षेत् वायव्यां मृगवाहिनी ।
उदीच्यां रक्ष कौबेरी ईशान्यां शूलधारिणी ॥ 16 ॥ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेत् अधस्ताद् वैष्णवी तथा ।
एवं दश दिशो रक्षेत् चामुण्डा शववाहना ॥ 17 ॥जया मे चाग्रतः स्तातु विजया स्तातु पृष्ठतः ।
अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता ॥ 18 ॥शिखां मेऽद्योतिनी रक्षेत् उमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता ।
मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद्-यशस्विनी ॥ 19 ॥त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके ।
शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी ॥ 20 ॥कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी ।
नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका ॥ 21 ॥अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती ।
दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठ मध्येतु चण्डिका ॥ 22 ॥घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके ।
कामाक्षी चिबुकं रक्षेत् वाचं मे सर्वमङ्गला ॥ 23 ॥ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी ।
नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी ॥ 24 ॥खड्ग्धारिन्यु भौ स्कन्धो बाहू मे वज्रधारिणी ।
हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेत् अम्बिका चाङ्गुलीस्त्था ॥ 25 ॥नखाञ्छूलेश्वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेन्नलेश्वरी ।
स्तनौ रक्षेन्महालक्ष्मी: मनः शोकविनाशिनी ॥ 26 ॥हृदय्म् ललिता देवी उदरम् शूलधारिणी ।
नाभौ च कामिनी रक्षेत् गुह्यं गुह्येश्वरी तथा ॥ 27 ॥कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी ।
भूतनाथा च मेद्रं मे ऊरू महिषवाहिनी ॥ 28 ॥जङ्घे महाबला प्रोक्ता सर्वकाम प्रदायिनी ।
गुल्फयोर्नारसिंही च पादौ चामित-तैजसी ॥ 29 ॥पादाङ्गुली: श्रीर्मे रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी ।
नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्चैवोर्ध्वकेशिनी ॥ 30 ॥रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्वरी तथा ।
रक्तमज्जावसामांसानि अस्थिमेदांसि पार्वती ॥ 31 ॥अन्त्राणि कालरात्रिश्च पित्तं च मुकुटेश्वरी ।
पद्मावती पद्मकोशे कफे चूड़ामणिस्तथा ॥ 32 ॥ज्वालामुखी नखज्वाला अभेद्या सर्वसंधिषु ।
शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेत् छाया छत्रेश्वरी तथा ॥ 33 ॥अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षमे धर्मचारिणी ।
प्राणापानौ तथा व्यानं समानोदानमेव च ॥ 34॥यशः कीर्तिंञ्च लक्ष्मीञ्च सदा रक्षतु वैष्णवी ।
गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत् पशून्मे रक्ष चण्डिके ॥ 35॥पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मी: र्भार्यां रक्षतु भैरवी
मार्गं क्षेमकरी रक्षेत् वजया सवृतः स्थिता ॥ 36॥रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु ।
तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी ॥ 37॥पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः ।
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्राधिगच्छति ॥ 38॥तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयः सार्वकामिकः ।
यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम् ॥ 39॥परमैश्वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान् ।
निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः ॥ 40 ॥त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान् ।
इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम् ॥ 41 ॥यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः ।
दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येपपराजितः ॥ 42 ॥जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः ।
नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः ॥ 43 ॥स्थावरं जङ्गमं वापि कृत्रिमं चापि यद्विषम् ।
आभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले ॥ 44 ॥भूचराः खेचराश्चैव जलजाश्चोपदेशिकाः ।
सहजाः कुलजा मालाः शाकिनी डाकिनी तथा ॥ 45 ॥अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाः ।
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्षगन्धर्वराक्षसाः ॥ 46 ॥ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः ।
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते ॥ 47 ॥मानोन्नतिर्भवेद्-राज्ञ: तेजोवृद्धिकरं परम् ।
यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले ॥ 48 ॥जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा ।
यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम् ॥ 49 ॥तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी ।
देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम् ॥ 50 ॥प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामाया प्रसादतः ।
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March 20, 2026 8:30 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
माता चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए किस रंग के वस्त्र पहनें
माता चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के तीसरे दिन आपको सफेद, सुनहरे, पीले या फिर लाल रंग के कपड़े धारण करने चाहिए। इन रंगों के वस्त्रों को धारण कर माता की पूजा करने से शुभ फल आपको प्राप्त होते हैं।
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March 20, 2026 7:59 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Mata Chandraghanta Ka Swaroop: मां चंद्रघंटा का स्वरूप कैसा है?
मां चंद्रघंटा भक्तों का कल्याण करने वाली हैं। मां के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्रमा विराजमान है। शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है और माता के दस हाथ हैं। इनके हाथों में खड्ग, त्रिशूल जैसे शस्त्र हैं। इनका वाहन सिंह है और माता युद्ध की मुद्रा में नजर आती हैं। मां दुष्टों का नाश और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
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March 20, 2026 7:28 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Chaitra Navratri: माता चंद्रघंटा की पूजा से मणिपुर चक्र होता है सक्रिय
दुर्गा माता की तीसरी शक्ति माता चंद्रघंटा की पूजा से मणिपुर चक्र सक्रिय होता है। इस चक्र को ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के तीसरे दिन माता की आराधना करने से मणिपुर चक्र सक्रिय होने पर आपको ऊर्जा मिलती है और भय से आप मुक्त होते हैं। इसके साथ ही मानसिक शांति का आपको अनुभव होता है।
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March 20, 2026 7:08 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Chaitra Navratri 2026: माता चंद्रघंटा को नीचे दिए गए पदार्थों का भोग लगाकर आप प्रसन्न कर सकते हैं।
- रसमलाई
- गाय के दूध से बनी खीर
- शहद
- दूध से बनी मिठाइयां
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March 20, 2026 7:08 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Mata Chandraghanta Ki Katha: माता चंद्रघंटा की कथा
माता चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। माता को कल्याणकारी और भक्तों की रक्षा करने वाला माना जाता है। चंद्रघंटा माता से जुड़ी कथा हमारे पुराणों में मिलती है। कथा के अनुसार, चंद्रघंटा माता दुर्गा का ही अवतार हैं। माना जाता है कि महिषासुर नामक एक दैत्य था जिसने तीनों लोकों में आतंक फैलाया हुआ था। एक बार महिषासुर और देवताओं के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था और महिषासुर की मंशा थी की वो देवराज इंद्र का सिंहासन प्राप्त करे। उसकी मंशा का पता लगने पर देवताओं ने त्रिदेवों ब्रह्म, विष्णु और महेश के सामने अपनी चिंता बताई।
जब त्रिदेवों को यह बात बता चली तो उन्हें क्रोध आय और उनके मुख से ऊर्जा निकली। इसी ऊर्जा से माता चंद्रघंटा का अवतरण हुआ। माता के अवतरण पर भगवान शिव ने उन्हें अपना त्रिशूल दिया, विष्णु भगवान ने अपना चक्र तो इंद्र देव ने अपना घंटा उन्हें दिया वहीं सूर्य देव ने उन्हें अपना तेज प्रदान किया। देवताओं से शक्तियां पाकर अंत में माता चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध किया और देवताओं की रक्षा की।
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March 20, 2026 6:53 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal
Chaitra Navratri Day 3: माता चंद्रघंटा की आरती
चंद्रघंटा माता की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम
पूर्ण कीजो मेरे काम
चंद्र समान तू शीतल दाती
चंद्र तेज किरणों में समाती
क्रोध को शांत बनाने वाली
मीठे बोल सिखाने वाली
मन की मालक मन भाती हो
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो
सुंदर भाव को लाने वाली
हर संकट मे बचाने वाली
हर बुधवार जो तुझे ध्याये
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं
शीश झुका कहे मन की बाता
पूर्ण आस करो जगदाता
कांची पुर स्थान तुम्हारा
करनाटिका में मान तुम्हारा
नाम तेरा रटू महारानी
भक्त की रक्षा करो भवानी