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Ram Navami 2026 Live: आज रामनवमी है या नहीं? 26 या 27 मार्च किस दिन रामनवमी पूजा का है सबसे शुभ मुहूर्त, तुरंत दूर करें कंफ्यूजन

Ram Navami 2026 Live: राम नवमी का पावन पर्व भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस साल रामनवमी की पूजा किस दिन करना सबसे शुभ रहेगा। इसके साथ ही रामनवमी की पूजा विधि, पूजन सामग्री की लिस्ट, मंत्र, आरती, चालीसा समेत तमाम जानकारियां भी यहां पढ़िए।

Ram Navami 2026 date and time - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV राम नवमी 2026

Ram Navami 2026 Live: राम नवमी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को बहुत ही धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है। इस साल रामनवमी कब मनाई जाएगी 26 या 27 मार्च?, रामनवमी की ही तारीख क्या है? इस बात को लेकर ज्यादातर लोग उलझन में हैं। देश के कई हिस्सों में अयोध्या मंदिर के हिसाब से रामनवमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं किदेश के सबसे बड़े राम मंदिर और रामलला की जन्मभूमि अयोध्या में यह पर्व किस दिए मनाया जाएगा। वहीं, 26 या 27 मार्च किस दिन रामनवमी पूजा सबसे शुभ मुहूर्त है ये भी जानेंगे। इसके अलावा रामनवमी की पूजा विधि, पूजन सामग्री की लिस्ट, मंत्र, आरती, चालीसा, कथा, भोग, राम स्तुति आदि तमाम जानकारी आपको इस ब्लॉग में मिल जाएगी। ऐसे में रामनवमी 2026 की पूजा से जुड़ी ये तमाम डिटेल्स जानने के लिए आप हमारे साथ यहां बने रहिए...

 

Live updates : Ram Navami 2026 Live: आज रामनवमी है या नहीं? 26 या 27 मार्च किस दिन रामनवमी पूजा का है सबसे शुभ मुहूर्त, तुरंत दूर करें कंफ्यूजन

  • 10:42 AM (IST) Posted by Arti Azad

    श्रीराम जन्म की पावन कथा

    प्राचीन समय की बात है। अयोध्या नगरी के राजा दशरथ बहुत प्रतापी और धर्मपरायण थे, लेकिन उनके जीवन में एक बड़ी कमी थी—उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था। इस चिंता से व्याकुल होकर उन्होंने अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ से उपाय पूछा। गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने एक महान यज्ञ का आयोजन कराया, जिसमें दूर-दूर से ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया गया।

    यज्ञ विधिपूर्वक संपन्न हुआ। यज्ञ के अंत में अग्निदेव से प्राप्त दिव्य प्रसाद राजा दशरथ को दिया गया। वे उस प्रसाद को बड़े श्रद्धा भाव से अपने महल में लाए और अपनी तीनों रानियों—माता कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा—को बांट दिया।

    समय बीतने पर तीनों रानियों ने गर्भ धारण किया। फिर वह शुभ घड़ी आई, जब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता कौशल्या ने एक तेजस्वी और दिव्य बालक को जन्म दिया। उस बालक का तेज ऐसा था मानो करोड़ों सूर्यों का प्रकाश एक साथ चमक उठा हो। यह कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम थे।

    इसके बाद रानी कैकयी ने भरत को और माता सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। चारों राजकुमारों के जन्म से पूरी अयोध्या नगरी में आनंद और उत्सव का माहौल छा गया। देवताओं ने भी आकाश से पुष्प वर्षा कर इस दिव्य अवसर का स्वागत किया।

    कुछ समय बाद महर्षि वशिष्ठ ने चारों बालकों का नामकरण किया—राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न। चारों भाई बड़े प्रेम और एकता के साथ बड़े हुए, लेकिन श्रीराम अपने गुणों, विनम्रता और मर्यादा के कारण सभी के प्रिय बन गए।

    जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उन्होंने शिक्षा, शास्त्र और अस्त्र-शस्त्र में अद्भुत दक्षता हासिल कर ली। वे सदैव अपने माता-पिता और गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे। आगे चलकर उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनवास स्वीकार किया और कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।

    वनवास के दौरान जब रावण ने माता सीता का हरण किया, तब श्रीराम ने उसका वध कर अधर्म का अंत किया और धर्म की स्थापना की।

    इसी दिव्य अवतार और उनके आदर्श जीवन की स्मृति में हर वर्ष राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रीराम की यह कथा श्रद्धा से पढ़ने और सुनने से जीवन में सुख, शांति और प्रभु की कृपा बनी रहती है।

  • 10:01 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Puja Live: श्रीराम जी की आरती

    ।। श्री रामजी की आरती ।।
     
    आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
    सतचित आनंद शिव सुंदर की,
     
    दशरथ तनय कौशल्या नंदन,
    सुर, मुनि, रक्षक, दैत्य निकंदन,
    अनुगत भक्त-भक्त उर चंदन,
    मर्यादा पुरुषोत्तम वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    निर्गुण, सगुण, अनूप रूप निधि,
    सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि,
    हरण शोक भयदायक नवनिधि,
    माया रहित दिव्य नर वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
    अखिल लोक पालक त्रिलोक गति,
    विश्व बंध अवंनह अमित गति,
    एक मात्र गति सचराचर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    शरणागति वत्सल व्रतधारी,
    भक्त कल्प तरुवर असुरारी,
    नाम लेत जग पावन कारी,
    वानर सखा दीन दुःख हर की,
    आरती कीजै श्री...

  • 9:57 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026: भये प्रगट कृपाला

    "भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी'

     

  • 9:37 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram navami Puja 2026 Live: ऐसे करें भगवान श्रीराम की पूजा

    1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। आज का दिन प्रभु के बालरूप की सेवा का है।
    2. ठीक दोपहर 12 बजे, जब सूर्य अपने शिखर पर होता है, प्रभु राम का जन्म हुआ था। इसी समय रामलला को सुंदर झूले में विराजमान करें और श्रृंगार करें।
    3. चावल की ढेरी पर तांबे का कलश स्थापित करें। कलश में आम के पत्ते, नारियल और सुपारी रखें। इसके चारों ओर चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें जो चारों दिशाओं से अंधकार को दूर करे।
    4. प्रभु को कमल का फूल, तुलसी दल (जो उन्हें अत्यंत प्रिय है), पंचामृत, ताजे फल और फूलों की माला अर्पित करें।
    5. भोग लगाने के बाद श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। यह मन को अगाध शांति प्रदान करता है।
    6. रामनवमी पर पंजीरी और पंचामृत का विशेष महत्व है। इसे बनाकर सभी में वितरित करें।
    7. रामनवमी केवल व्रत रखने का दिन नहीं है, बल्कि श्रीराम के धैर्य और उनके मर्यादित चरित्र को अपने भीतर उतारने का संकल्प लेने का दिन है।
  • 9:24 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Ji Ka Bhajan: राम भजन

    प्रभु जी तुम चंदन हम पानी (Prabhu Ji Tum Chandan Hum Paani) 
    प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा,
    जैसे चितवत चंद्र चकोरा,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम मोती हम धागा,
    जैसे सोनहिं मिलत सोहागा,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम दीपक हम बाती,
    जाकी जोति बरै दिन राती,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा,
    ऐसी भक्ति करे ‘रैदासा’,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

  • 9:16 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ramnavami Puja Samagri: रामनवमी पूजा सामग्री लिस्ट

    पीला या लाल रंग का कपड़ा
    कलश
    पंचामृत
    रोली
    पीला चंदन
    हल्दी
    अक्षत
    फूलों की माला
    तुलसी दल
    सुपारी
    लौंग
    ऋतुफल
    सूजी का हलवा या खीर
    पंचमेवा
    घी
    रुई की बत्ती
    दीपक
    धूपबत्ती
    कपूर
    पूजा की थाली
    घंटी
    शंख
    रामायण, रामचरितमानस या राम रक्षा स्तोत्र की पुस्तक
    राम दरबार की मूर्ति

  • 9:03 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Ji Ki Aarti: भगवान श्रीराम की आरती

    श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
    नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 

    कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
    पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

    भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
    रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

    सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
    आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

    इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
    मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

    छंद 
    मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
    करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

    एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
    तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

    ।।सोरठा।।
    जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
    मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

  • 8:43 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Bhajan: राम नाम तू जपले मेरे मनवा (Ram Naam Tu Japle Mere Manva)

    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    दो आखर का है प्यारा नाम
    जो भी जपे उसका हो कल्याण
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    तेरा राम तो तेरे भीतर
    अब तो देख तू खोल के आँखें
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    कुछ भी ना तेरे साथ जायेगा
    राम नाम ही काम आएगा
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    सुनलो भैया सुनलो बहनो
    राम नाम सदा रटते रहना
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

  • 8:25 AM (IST) Posted by Arti Azad

    श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa)

    श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।

    निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।।

    ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।।

    दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना।।

    जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला।।

    तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला।।

    तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई।।

    ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं।।

    चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी।।

    गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहिं।।

    नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं होई।।

    राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा।।

    गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो।।

    शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा।।

    फूल समान रहत सो भारा। पावत कोऊ न तुम्हरो पारा।।

    भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहूं न रण में हारो।।

    नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा।।

    लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी।।

    ताते रण जीते नहिं कोई। युद्ध जुरे यमहूं किन होई।।

    महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा।।

    सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो।।

    घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई।।

    जो तुम्हरे नित पांव पलोटत। नवो निद्धि चरणन में लोटत।।

    सिद्धि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी।।

    औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई।।

    इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा।।

    जो तुम्हरे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै।।

    सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे।।

    तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे।।

    जो कुछ हो सो तुमहिं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा।।

    राम आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे।।

    जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा। नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा।।

    सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी।।

    सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै।।

    सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं।।

    ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा। नमो नमो जय जगपति भूपा।।

    धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा।।

    सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया।।

    सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन-मन धन।।

    याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई।।

    आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा।।

    और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई।।

    तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै।।

    साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै।।

    अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई।।

    श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै।।

    ॥दोहा॥
    सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।

    हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाया।।

    राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।

    जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय।।

  • 8:14 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami Bhog: राम जी को इन चीजों का लगाएं भोग

    राम नवमी के दिन राम जी को धनिया की पंजीरी, खीर, हलवा फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इन चीनों का भोग लगाने से प्रभु प्रसन्न होते हैं। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है।

  • 8:04 AM (IST) Posted by Arti Azad

    राम नवमी पूजा विधि (Ram Navami Puja Vidhi)

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें साफ कपड़े धारण करें।
    घर और मंदिर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
    चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    इसके बाद प्रभु श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान की मूर्ति को विराजमान करें।
    पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    चंदन और रोली का तिलक लगाएं और फूलमाला अर्पित करें।
    देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    मंत्रों का जप करें और कथा का पाठ करें।
    राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें।
    फल और मिठाई का भोग लगाएं और सभी को प्रसाद बांटें।

  • 8:02 AM (IST) Posted by Arti Azad

    राम नवमी 2026 शुभ मुहूर्त (Ram Navami 2026 Shubh Muhurat)

     

    राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 13 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट
    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक
    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
    अमृत काल- 01 बजकर 05 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक

  • 7:41 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Raksha Stotra: श्री राम रक्षा स्तोत्रम्

    विनियोग:

    अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः।

    श्री सीतारामचंद्रो देवता।
    अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः।
    श्रीमान हनुमान कीलकम।
    श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः।

    अथ ध्यानम्‌:

    ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,
    पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम।
    वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,
    रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम॥

    राम रक्षा स्तोत्रम्:

    चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्।
    एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥

    ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।
    जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥

    सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्।
    स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥

    रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्।
    शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥

    कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति।
    घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥

    जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः।
    स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥

    करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित।
    मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥

    सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
    उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥

    जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः।
    पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥

    एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत।
    स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥

    पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः।
    न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥

    रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन।
    नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥

    जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्।
    यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥

    वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत।
    अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥

    आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
    तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥

    आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्।
    अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥

    तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
    पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥

    फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
    पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥

    शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।
    रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥

    आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ।
    रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥

    सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा।
    गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥

    रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली।
    काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥

    वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः।
    जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥

    इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः।
    अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥

    रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम।
    स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥

    रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,
    काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम।
    राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,
    वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥

    रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
    रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥

    श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,
    श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
    श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
    श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥

    श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
    श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि।
    श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
    श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥

    माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र:।
    स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र:।
    सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु।
    नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥

    दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज।
    पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥

    लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं।
    कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥

    कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम।
    आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
    लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥

    भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्।
    तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥

    रामो राजमणिः सदा विजयते,
    रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,
    निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।
    रामान्नास्ति परायणं परतरं,
    रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,
    सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥

    राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
    सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

  • 7:23 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami Colors: राम नवमी पर पहनें इन रंगों के कपड़े

    राम नवमी को श्री राम भगवान के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये पर्व मानवता, हर्ष और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। राम नवमी का दिन बहुत पावन माना जाता है। इस दिन आप चटख नीला, हरा, मोर पंखी नीला, मोर पंखी हरा, लाल, पीला, संतरिया आदि रंगों के कपड़ें पहन सकते हैं।

  • 7:03 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Puja Samagri List: राम नवमी पूजन सामग्री

    राम दरबार की तस्वीर या मूर्ति
    पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
    पीले या लाल रंग के वस्त्र
    गंगाजल
    तुलसी के पत्ते
    धूप, दीपक, घी, कपूर
    चंदन, कुमकुम, हल्दी
    पीले और लाल रंग के फूल, मालाएं
    अक्षत, रोली, मौली, पान
    सुपारी, लौंग, इलायची, जनेऊ
    फल, मिठाई 
    कलश, घंटी, शंख
    रामायण/रामचरितमानस की पुस्तक

     

  • 7:02 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami Puja Muhurat 2026: राम नवमी पूजा मुहूर्त

    27 मार्च 2026 को राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा। तो वहीं राम नवमी मध्याह्न का क्षण दोपहर 12:27 बजे का है। 

  • 7:00 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami Kyu Manai Jati Hai: राम नवमी क्यों मनाई जाती है

    राम नवमी का पावन पर्व भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं अनुसार त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु ने अपना सातवां अवतार लिया था। श्रीराम का जन्म अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर हुआ था, इसलिए हर साल इस तिथि को श्रीराम जन्मोत्सव यानी राम नवमी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।

  • 6:59 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Kab Hai: राम नवमी कब है 2026

    अयोध्या में राम नवमी का त्योहार 27 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है। ऐसे में अब देश के लगभग सभी क्षेत्रों में इसी दिन राम नवमी मनाई जाएगी। तो वहीं राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त 27 मार्च की सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा।

  • 6:58 AM (IST) Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Live: राम नवमी किस दिन मनाना ज्यादा सही रहेगा

    हिंदू पंचांग अनुसार, इस साल ये तिथि 26 मार्च की सुबह 11:48 से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। चूंकि राम जी का जन्म मध्याह्न काल (दोपहर 12 बजे का समय) में हुआ था इसलिए कई लोग 26 मार्च को राम नवमी मनाना ज्यादा उचित मान रहे हैं। वहीं जो लोग उदया तिथि को महत्व देते हैं वो 27 मार्च 2026 को ये पर्व मनाने की बात कर रहे हैं। चलिए जानते हैं विद्वानों अनुसार राम नवमी किस दिन मनाना ज्यादा सही रहेगा।