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Hindi News धर्म त्योहार सावन के अंतिम दिन इन रशियों को जरूर करने चाहिए ये पाठ, दूर हो जाएगा शनि का प्रभाव

सावन के अंतिम दिन इन रशियों को जरूर करने चाहिए ये पाठ, दूर हो जाएगा शनि का प्रभाव

भगवान शिव को सभी दोषों का हर्ता भी माना जाता है, उनकी पूजा से बड़े से बड़े ग्रह दोष के प्रभाव कम हो जाते हैं। ऐसे में इन दिनों जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, वह सावन के अंतिम दिन में भगवान शिव को कुछ चीजें अर्पित करें और शिव जी का पाठ करें तो इसका बुरा प्रभाव कम हो जाएगा।

shiv ji- India TV Hindi Image Source : UNSPLASH शिव जी

सावन अब अपनी समापन की ओर है। 9 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ ही सावन का माह समाप्त हो जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव धरती पर ही वास करते हैं। ऐसे में भगवान शिव की पूजा करने से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है। भगवान शंकर की कृपा से शनि दोष भी दूर हो जाता है। 9 अगस्त को सावन का अंतिम दिन है। साथ ही रक्षा बंधन का पावन पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा।

किन पर चल रही शनि की साढ़ेसाती?

ज्योतिष के मुताबिक, इस समय मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। मान्यता है कि शनि की साढ़ेसाती लगने पर व्यक्ति का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। शनि के साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए सावन के अंतिम दिन शिवलिंग पर जल, दूध, चीनी, केसर, इत्र, दही, देसी घी, चंदन, शहद और भांग चढ़ाएं। इसके अलावा, शिव रूद्राष्टकम का पाठ भी करें।

श्री शिव रूद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥
 
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥
 
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥
 
चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥
 
प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥
 
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
 
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥
 
न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥
 
रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।। 

॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम्॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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