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नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ कैसे करें, क्या हैं इसके नियम, विधि और महत्व

शारदीय नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय देवी शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है। नियमपूर्वक किए गए इस पाठ से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव होते हैं।

 दुर्गा सप्तशती पाठ...- India TV Hindi
Image Source : PEXELS दुर्गा सप्तशती पाठ नियम

Durga Saptshati Path Ke Niyam: नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ करना सिर्फ पूजा-पाठ नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का मार्ग है। इसे सही विधि से करने पर मानसिक शांति मिलती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि किस तरह से दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए, जिससे देवी मां की कृपा आप पर बरसे, तो यहां हम आपको इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। जानिए नवरात्रि में नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती पाठ करने की विधि, नियम और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है।

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ सबसे प्रभावी साधना मानी जाती है। इसे “नवाह्निक पाठ” कहा जाता है, जिसमें 700 श्लोकों को नौ भागों में बांटकर प्रतिदिन पढ़ा जाता है। यह पाठ भक्त को मानसिक शांति, शक्ति और साधना में सिद्धि प्रदान करता है। माना जाता है कि पाठ से मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है और जीवन की नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

कैसे करें दुर्गा सप्तशती पाठ?

दुर्गा सप्तशती पाठ सुबह या संध्या समय किया जाना चाहिए। पाठ शुरू करने से पहले संकल्प लें और मां दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करें। लाल वस्त्र पर पुस्तक रखकर पूजा करें और फिर अध्यायों का क्रमवार पाठ करें। हर दिन मां के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और उसी के अनुसार अध्याय पढ़े जाते हैं।

दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम

  • दुर्गा सप्तशती पाठ शुरू करने से पहले हाथ जोड़कर प्रणाम करें और फिर देवी का ध्यान करें, फिर पाठ आरंभ करें।
  • दुर्गा सप्तशती पाठ की पुस्तक को हमेशा लाल कपड़े से ढकी चौकी पर रखें, हाथ में सप्तशती की पुस्तक लेकर पाठ करने से अधूरा फल मिलता है।
  • पाठ के बीच में बाधा न डालें। अगर पाठ पूरा होने से पहले किसी वजह से रुकना पड़े तो चतुर्थ अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय उच्चारण स्पष्ट और लयबद्ध होना चाहिए, न बहुत तेज और न बहुत धीमा।
  • दुर्गा सप्तशती पाठ से पहले लाल या कुश के आसन पर बैठें।
  • शुरुआत में पुस्तक को प्रणाम करें और माता रानी का ध्यान करें।
  • दुर्गा सप्तशती पाठ के बाद माता से क्षमा याचना करके पाठ को अर्पित करें।
  • नवरात्रि के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • दुर्गा सप्तशती पाठ करते समय किसी के प्रति बुरे भाव न रखें।

साधक के जीवन में दुर्गा सप्तशती पाठ का आध्यात्मिक महत्व

दुर्गा सप्तशती, जिसे चंडी पाठ भी कहा जाता है, मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है। इसमें मां के तीन स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा और राक्षस वध की कथाएं वर्णित हैं। जो लोग अक्सर संघर्ष, रोग, आर्थिक समस्या आदि परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह पाठ बेहद लाभकारी बताया गया है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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