A
  1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. श्रावण पूर्णिमा के दिन कैसे रखना है व्रत? जानिए संपूर्ण पूजा विधि

श्रावण पूर्णिमा के दिन कैसे रखना है व्रत? जानिए संपूर्ण पूजा विधि

रक्षाबंधन के दिन ही सावन पूर्णिमा का व्रत भी मनाया जाएगा। यह तिथि बेहद खास है क्योंकि इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी तीनों की कृपा आप पा सकते हैं।

भगवान विष्णु और भगवान शिव- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK भगवान विष्णु और भगवान शिव

सावन माह का पूर्णिमा व्रत बेहद खास माना जाता है, क्योंकि एक और सावन शिव को समर्पित है तो दूसरी ओर पूर्णिमा का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ करने से भगवान विष्णु और शिव जी की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। इस विष्णु जी के साथ ही मां लक्ष्मी की भी पूजा का विधान है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से जातक के सभी दुखों का नाश हो जाता है और वह पुण्य फल को प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन साधक का मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन कैसे व्रत रखना है...

श्रावण पूर्णिमा का स्नान-दान मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक, 8 अगस्त को पूर्णिमा तिथि दोपहर 02.13 बजे आरंभ होगी, जो 09 अगस्त की दोपहर 01.25 बजे तक रहेगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि की मान्यता है, ऐसे में सावन पूर्णिमा का स्नान-दान उदया तिथि में 9 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04.22 से 05.04 बजे तक है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05.47 बजे से दोपहर 02.23 बजे तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.00 बजे से दोपहर 12.53 बजे तक रहेगा।

कैसे रखना है श्रावण पूर्णिमा का व्रत विधि?

इस दिन जातक जल्दी उठें और स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद ॐ घृणिः सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करें। फिर पूजा घर की सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। इस बार इस दिन सावन की आखिरी तिथि भी है, इसलिए शिवलिंग भी स्थापित करें। फिर भगवान के सामने एक दीप जलाएं और व्रत का संकल्प लें।

इसके बाद भगवान को भोग लगाएं। साथ ही राखी और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिव जी को तुलसी दल के बजाए बेल पत्र अर्पण करना है। अंत में सावन पूर्णिमा की कथा का पाठ करें और लक्ष्मी नरायाण संग शिव जी की आरती करें।

फिर शाम के समय में पूजा के लिए एक पानी का कलश रखें। भगवान विष्णु को पंचामृत, केला और पंजीरी का भोग लगाएं। साथ ही एक पंडित जी को बुलाएं और सत्यनारायण की कथा कराएं। पूजा के बाद लोगों में प्रसाद वितरित करें।

इसके अलावा, शाम के समय चंद्रमा को जल अर्पित करें और खीर का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

इस व्रत में क्या खा सकते हैं?

व्रत के दौरान जातक स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन खा सकते हैं, जिसमें साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे का पराठा, कुट्टू के आटे की पूरी, और फल शामिल हैं। इसके साथ ही ध्यान रहे कि इस दिन साधारण नमक नहीं खाना है, बल्कि सेंधा नमक ही खाना है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें:

​Raksha Bandhan 2025: 9 अगस्त को है रक्षाबंधन, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें
रक्षाबंधन के दिन मनाई जाएगी नारली पूर्णिमा, जानें कैसे और कब करनी है पूजा