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Tulsi Chalisa PDF: देव उठनी एकादशी के दिन विशेष लाभकारी है पाठ, यहां पढ़िए संपूर्ण तुलसी चालीसा

Tulsi Chalisa in Hindi: भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के समान ही प्रिय है। मान्यता है कि देव प्रबोधनी एकादशी पर तुलसी चालीसा का पाठ करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं। आप भी तुलसी चालीसा का पाठ करके देवी तुलसी के साथ-साथ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

Tulsi Chalisa- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK तुलसी चालीसा का पाठ

Tulsi Chalisa Path PDF: आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। आज 1 नवंबर 2025 को देश भर में बड़ी धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन किया जाएगा। देव प्रबोधनी एकादशी पर तुलसी चालीसा का पाठ करने का विधान है। तुलसी चालीसा, हरिप्रिया देवी तुलसी को समर्पित है। हिंदू धर्म ग्रथों के अनुसार, देवी वृंदा ही तुलसी रूप में प्रकट हुई थीं।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास में तुलसी चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो कोई भी रोजाना तुलसी के पौधे के समक्ष तुलसी चालीसा का पाठ करता है, विशेष रूप से देव उठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा पर। उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है और वह श्रीहरि विष्णु का प्रिय होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

Tulsi Chalisa Lyrics in Hindi: संपूर्ण तुलसी चालीसा

                            दोहा
दोहा तुलसी चालीसा श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

             तुलसी चालीसा

नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।

नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।

करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। 
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।। 

Tulsi Chalisa in Hindi PDF Download

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