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वराह जयंती 2026 कब है? नोट कर लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

वराह अवतार को भगवान विष्णु का तीसरा अवतार माना जाता है। श्रीहरि ने धर्म की रक्षा और पृथ्वी के उद्धार से जोड़ा जाता है। इस खास दिन पर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। जानिए इस साल कब है वराह जयंती और क्या है पूजा विधि।

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Image Source : PINTEREST वराह जयंती 2026

सनातन धर्म में भगवान विष्णु के कई अवतारों का वर्णन मिलता है। इनमें वराह अवतार बेहद खास माना जाता है। हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है। आइए जानते हैं साल 2026 में वराह जयंती किस दिन होगी, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और कैसे की जाती है पूजा।

कब है वराह जयंती?

वराह जयंती हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, साल  2026 में यह पर्व रविवार, 13 सितंबर को मनाया जाएगा। तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट से होगी और इसका समापन 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर होगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष शुभ माना गया है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 सितंबर को पूजा का शुभ समय दोपहर 1:30 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु भगवान वराह की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।

वराह जयंती पूजा विधि

  • वराह जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और आचमन के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें।
  • पूजा स्थल पर जल से भरा कलश रखें और उसके ऊपर भगवान वराह की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके बाद पंचामृत से भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का अभिषेक करें।
  • अभिषेक के बाद भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, मिष्टान्न और नैवेद्य अर्पित करें। 
  • पूजा के दौरान भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का ध्यान करते हुए ‘ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें। 
  • दीपक और धूप जलाकर श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की आरती करें।
  • अंत में भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

क्यों लिया वराह अवतार?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों में आतंक मचा रहा था। उसने देवताओं को स्वर्ग से बाहर कर दिया और पृथ्वी को समुद्र के भीतर छिपा दिया। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।

तब देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का अंत करने के लिए वराह रूप धरा। हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था कि वह ज्ञात जीवों और पशुओं से नहीं मारा जाएगा। वराह का नाम इसमें शामिल नहीं था। इसी कारण भगवान विष्णु ने विशाल वराह रूप धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकालकर उसकी रक्षा की।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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