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Vinayak Chaturthi Katha: 21 फरवरी को रखा जाएगा विनायकी गणेश चतुर्थी का व्रत, पूजा के समय जरूर करें इस कथा का पाठ

Vinayak Chaturthi Vrat Katha in Hindi: शनिवार 21 फरवरी को विनायकी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखकर गणेश जी के ढुण्ढिराज स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के समय चतुर्थी की इस कथा का पाठ करना बहुत शुभ माना गया है।

 Vinayak Chaturthi Katha- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK विनायकी गणेश चतुर्थी पर करें इस कथा का पाठ

Vinayak Chaturthi Vrat Katha in Hindi: हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप को समर्पित है। गणेश जी चतुर्थी तिथि के अधिष्ठाता माने गए हैं। ऐसे में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायकी गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखकर गणेश जी का पूजा की जाती है। बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता की उपासना से कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस दिन प्रथम पूजनीय गणेश जी की पूजा के समय विनायक चतुर्थी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। यहां पढ़िए संपूर्ण कथा। 

विनायक चतुर्थी 2026 डेट (Vinayak Chaturthi 2026 Date)

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर होगा। इसका समापन 21 फरवरी को दोपहर 1 बजे होगा। ऐसे में विनायक चतुर्थी का व्रत 21 फरवरी 2026 को किया जाएगा।

विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vinayak Chaturthi ki Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब भोलेनाथ और माता गौरा नर्मदा नदी के तट पर बैठ थे। नदी के बहते जल के शोर और सौम्य वातावरण में मां पार्वती ने शिव जी से चौपड़ खेलने की इच्छा जताई। शिव जी ने भी देवी पार्वती की बात को सहर्ष स्वीकार कर लिया, लेकिन उन दोनों के अलावा वहां और कोई उपस्थित नहीं था और चौपड़ के खेल में हार-जीत का निर्णय करने के लिए किसी साक्षी की आवश्यकता थी।

तब भगवान शिव ने पास पड़े कुछ तिनकों से एक पुतले बनाकर और उसमें प्राण-प्रतिष्ठा कर दी। उस बालक से शिवजी ने कहा, "वत्स, हम चौपड़ खेल रहे हैं। तुम निष्पक्ष होकर जीत का फैसला करना।"

इसके बाद शिव जी और मां पार्वती के बीच चौपड़ का खेल आरंभ हुआ। यह खेल तीन बार खेला गया और तीनों बार जीत माता पार्वती के पक्ष में रही। लेकिन खेल समाप्त होने के बाद जब बालक से सही निर्णय पूछा गया, तो उसने भगवान शिव जी के पक्ष में निर्णय दिया और उन्हें इस खेल का विजेता बताया।

यह सुनकर माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने क्रोधवष उस बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे डाला। अपनी भूल स्वीकार करते हुए बालक ने तुरंत देवी से क्षमा मांगी और कहा कि यह उससे अज्ञानवश हो गया है। उसने किसी द्वेष वश ऐसा नहीं किया। 

बालक की विनती सुनकर माता पार्वती ने कहा, "कुछ समय बीतने के बाद यहां गणेश पूजन के लिए नाग कन्याएं आएंगी। वे तुम्हें गणेश व्रत की विधि बताएंगी। उनके बताए अनुसार व्रत करने से तुम्हारे कष्ट दूर हो जाएंगे।"

यह कहकर माता पार्वती वहां से चली गईं।

एक वर्ष बाद उसी स्थान पर नाग कन्याएं आईं। उनसे गणेश व्रत की विधि जानकर उस बालक ने लगातार 21 दिनों तक भगवान गणेश का व्रत किया। उसकी कठोर भक्ति से भगवान गणेश प्रसन्न हुए और प्रकट होकर उसे वर मांगने को कहा।

बालक ने विनयपूर्वक कहा, "हे विनायक! मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर कैलाश पर्वत तक पहुंच सकूं।"
भगवान गणेश उसे वरदान देकर अंतर्ध्यान हो गए।

इसके बाद वह बालक कैलाश पहुंचा और पूरी कथा भगवान शिव को सुनाई। उधर चौपड़ वाले दिन से ही देवी उमा अपने शंकर जी से नाराज थीं। देवी को प्रसन्न करने के लिए भोलेनाथ ने भी बालक के बताए अनुसार 21 दिनों तक विनायक व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से देवी पार्वती की नाराजगी दूर हो गई।

जब भगवान शिव ने पार्वती जी को इस व्रत का महत्व बताया, तो उनके मन में अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जागृत हुई। तब मां पार्वती ने भी 21 दिनों तक श्री गणेश का व्रत किया। व्रत के 21वें दिन भगवान कार्तिकेय स्वयं अपनी माता पार्वती से मिलने आए। उसी दिन से विनायक चतुर्थी व्रत को समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला व्रत माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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