देवशयनी एकादशी समाप्त हो चुकी है और चातुर्मास का आरंभ हो गया है। अब 4 माह तक यानी आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक शुभ कामों की मनाही है। इन महीनों में सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं। इस कारण समय को तपस्या, व्रत, साधना और संयम का काल माना गया है। इस काल में यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करने होते। हेल्थ के हिसाब से भी यह अवधि महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षा ऋतु के दौरान इंसानी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और जल व वायु में बैक्टीरिया अधिक पनप जाते हैं। ऐसे में जब भगवान विष्णु सो रहे होते हैं तो फिर सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। साथ ही इस अवधि में कुछ और देवी-देवताओं की भी पूजा होती है....
सावन माह
चातुर्मास का पहला माह सावन ही होता है, जो शिव की भक्ति के लिए सर्वोच्च समय है। यह माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान शिवलिंग पर भक्त जल, दूध, बेलपत्र आदि चढ़ाकर भगवान की अराधना करते हैं। इस माह से ही 16 सोमवार व्रत की शुरुआत होती है। साथ ही सावन में शिव सहस्त्रनाम, रुद्राभिषेक और पार्थिव शिवलिंग पूजन भी होता है।
भाद्रपद माह
चातुर्मास का दूसरा माह भाद्रपद है, इसमें श्री गणेश और भगवान कृष्ण की उपासना किए जाने का महत्व है। इस माह में श्रीकृष्ण जन्माष्टी और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े पर्व पड़ते हैं। इस माह के दौरान लोगों को श्री गणेश और भगवान कृष्ण की पूजा करने का विधान है।
अश्विन माह
अश्विन या कहें आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, इसमें मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा करने का विधान है। देवी के भक्त 9 दिनों तक उपवास रखते हैं।
कार्तिक माह
चातुर्मास का अंतिम महीना कार्तिक माह है, जो सबसे पुण्यदायी माना जाता है। देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु की योगनिद्रा खुल जाती है और इसी दिन से सभी शुभ कार्य का आरंभ होता है। इसी माह में दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे अहम पर्व मनाए जाते हैं।
अन्य इन देवताओं की भी होनी चाहिए पूजा
इन 4 महीना के दौरान भगवान विष्णु, श्री राम और बजरंग बली, सूर्यदेव, वरूणदेव और वामन भगवान की पूजा करने से विशेष फल मिलते हैं। जातकों को इस दौरान ब्रहचर्य का पालन, सत्संग, भागवत कथा श्रवण और दान पुण्य करने चाहिए, इससे भगवान की कृपा बरसती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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