आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और बुधवार का दिन है। पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई को रात 8 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। कल बुधवार रात 11 बजकर 58 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। साथ ही 29 जुलाई को दोपहर बाद 3 बजकर 37 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल स्नान-दान की पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा व्रत भी रखा जाएगा। तो आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते बुधवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
29 जुलाई 2026 का पंचांग
- आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी तिथि- 29 जुलाई को रात 8 बजकर 6 मिनट तक
- प्रीति योग- 29 जुलाई को रात 11 बजकर 58 मिनट तक
- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र- 29 जुलाई को दोपहर बाद 3 बजकर 37 मिनट तक
- 29 जुलाई 2026 विशेष- स्नान-दान की पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा व्रत
29 जुलाई 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:46 ए एम से 05:30 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:55 पी एम से 03:47 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:16 पी एम से 07:37 पी एम
- अमृत काल- 08:34 पी एम से 10:20 पी एम
29 जुलाई 2026 का अशुभ समय
- राहुकाल- 12:45 पी एम से 02:23 पी एम
- यमगण्ड- 07:52 ए एम से 09:02 ए एम
- आडल योग- 06:14 पी एम से 09:02 ए एम, 05:22 से 06: 15, 30 जुलाई
- दुर्मुहूर्त- 12:19 पी एम से 13:11 पी एम
- गुलिक काल- 11:07 ए एम से 12:45 पी एम
राहुकाल का समय
- दिल्ली- दोपहर 12:27 से दोपहर 02:09 तक
- मुंबई- दोपहर 12:45 से दोपहर 02:23 तक
- चंडीगढ़- दोपहर 12:29 से दोपहर 02:12 तक
- लखनऊ- दोपहर 12:13 से दोपहर 01:53 तक
- भोपाल- दोपहर 12:26 से दोपहर 02:06 तक
- कोलकाता- दोपहर पहले 11:43 से दोपहर 01:22 तक
- अहमदाबाद- दोपहर 12:46 से दोपहर 02:25 तक
- चेन्नई- दोपहर 12:15 से दोपहर 01:50 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- 06:14 ए एम
- सूर्यास्त- 19:16 पी एम
गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। हमारा भारत देश अनेक परंपराओं का साक्षी रहा है। इन्हीं परंपराओं में से एक है गुरु-शिष्य परंपरा। गुरु भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा हैं और इसी संस्कृति को याद रखने के लिए आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का नाम दिया गया है। मान्यता है कि इसी दिन वेद व्यास जी ने वेदों का संकलन किया था और कई पुराणों, उपपुराणों व महाभारत की रचना भी इसी दिन पूर्ण हुई थी। इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरुओं के महत्व को बताते हुए स्वयं भगवान शिवजी कहते हैंः "गुरुर्देवो गुरुर्धर्मो, गुरौ निष्ठा परं तपः।
गुरोः परतरं नास्ति, त्रिवारं कथयामि ते।।"
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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