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30 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शुक्रवार के दिन शिव योग और आर्द्रा नक्षत्र का शुभ संयोग, नोट करें पूजा मुहूर्त और राहुकाल टाइम

30 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शुक्रवार के दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पड़ रही है। कल शिव योग और आर्द्रा नक्षत्र का शुभ संयोग रहेगा। जानिए शुक्रवार, 30 अक्टूबर का पंचांग और राहुकाल का समय।

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Image Source : PINTEREST 30 अक्टूबर 2026 का पंचांग

30 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि और शुक्रवार का दिन है। कल पंचमी तिथि शाम 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। कल रात 8 बजकर 42 मिनट तक शिव योग रहेगा। साथ ही कल 30 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 5 मिनट तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र लग जायेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शुक्रवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

30 अक्टूबर 2026 का पंचांग

  • कार्तिक कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि - 30 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 26 मिनट तक
  • शिव योग- 30 अक्टूबर को रात 8 बजकर 42 मिनट तक
  • मृगशिरा नक्षत्र- 30 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 5 मिनट तक, फिर आर्द्रा नक्षत्र लग जाएगा
  • 30 अक्टूबर विशेष- वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत, नवरात्र का चौथा दिन

30 अक्टूबर 2026 शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:48 ए एम से 05:40 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:31 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 01:56 पी एम से 02:40 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:38 पी एम से 06:03 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 05:38 पी एम से 06:55 पी एम
  • अमृत काल- 09:58 पी एम से 11:27 पी एम

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- सुबह 10:41 से दोपहर 12:05 तक
  • मुंबई- सुबह 10:56 से दोपहर 12:22 तक
  • चंडीगढ़- सुबह 10:44 से दोपहर 12:06 तक
  • लखनऊ- सुबह 10:26 से दोपहर पहले 11:50 तक
  • भोपाल- सुबह 10:39 से दोपहर 12:04 तक
  • कोलकाता- सुबह 09:55 से दोपहर पहले 11:20 तक
  • अहमदाबाद- सुबह 10:58 से दोपहर 12:23 तक
  • चेन्नई- सुबह 10:25 से दोपहर पहले 11:52 तक

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 

सूर्योदय- सुबह 06:31 बजे 
सूर्यास्त- शाम 05:38 बजे

कल के दिन की विशेष बात

कल शिव योग और मृगशिरा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र लग जाएगा। शिव योग में किए गए कार्य, विशेषकर मंत्र प्रयोग में सफलता मिलती है। बात करें मृगशिरा नक्षत्र की तो, इसका अर्थ है हिरण का सिर। इस नक्षत्र के प्रभाव से जातक सुंदर, व्यवहार कुशल, सामाजिक और रचनात्मक होता है। हालांकि, ये लोग थोड़े शर्मीले और संकोची स्वभाव के होते हैं, जिसके कारण इन्हें दूसरे से घुलने-मिलने में समय लगता है। इस नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। इस नक्षत्र का संबंध खैर के पेड़ से बताया है, जिससे कत्था बनता है। इस नक्षत्र में जन्मे लोगों को खैर के पेड़ की उपासना करनी चाहिए और इसे कोई नुकसान न पहुंचाएं। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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