1. Hindi News
  2. धर्म
  3. भारत के 5 देवस्थान जहां प्रसाद ग्रहण करना है मना; भूलकर भी घर न ले जाएं ये भोग, एक जगह का प्रसाद तो मंदिर में ही खाना है जरूरी!

भारत के 5 देवस्थान जहां प्रसाद ग्रहण करना है मना; भूलकर भी घर न ले जाएं ये भोग, एक जगह का प्रसाद तो मंदिर में ही खाना है जरूरी!

India mysterious temples: मंदिरों में मिलने वाला प्रसाद को शुभ और पवित्र होता है, लेकिन भारत में कुछ ऐसे रहस्यमयी मंदिर भी हैं, जहां प्रसाद को छूना या घर ले जाना अपशकुन समझा जाता है। इन मंदिरों में केवल देवता को प्रसाद अर्पित होता है। जानिए ऐसे 5 रहस्यमयी मंदिरों के बारे में, जहां प्रसाद खाने से मना किया जाता है।

temples where prasad inauspicious- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK इन 5 मंदिरों का प्रसाद खाना है मना

India mysterious temples: भारत में हर राज्य, हर गांव में कोई न कोई मंदिर अपने रहस्यों और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। लोग मंदिर जाता है, वहां ईश्वर के दर्शन और पूजन के बाद, उन्हें प्रसाद अर्पित करते हैं। इसके बाद मंदिर में पुजारी जी द्वारा दिया जाने वाला प्रसाद ग्रहण करते हैं और अपने स्वजनों के लिए घर भी लेकर आते हैं। शास्त्रों के अनुसार, मंदिर में प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जहां प्रसाद को छूना या खाना अशुभ माना गया है। चलिए जानते हैं इसके पीछे क्या मान्यताएं हैं।  

1. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान: प्रसाद खाना अशुभ

हनुमानजी को समर्पित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर बुरी आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान बालाजी को बूंदी के लड्डू,र भैरव बाबा को उड़द दाल और चावल का भोग लगाते हैं। यहां का प्रसाद खाना या घर ले जाना अपशकुन होता है। भक्त केवल भगवान को अर्पित प्रसाद को देख सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां का प्रसाद घर ले जाने से नकारात्मक शक्तियां या बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

2. कामख्या देवी मंदिर, असम: मासिक धर्म के समय प्रसाद वर्जित

असम के गुवाहाटी स्थित कामख्या देवी मंदिर शक्ति पीठों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। यहां देवी की पूजा उनके मासिक धर्म के दौरान तीन दिनों तक बंद रहती है। इस दौरान किसी भक्त को प्रवेश या प्रसाद लेने की अनुमति नहीं होती। मान्यता है कि देवी को विश्राम देने के कारण इन दिनों प्रसाद ग्रहण करना वर्जित है।

3. काल भैरव मंदिर, उज्जैन: शराब का प्रसाद केवल भैरव को समर्पित

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर में भैरव बाबा को शराब का प्रसाद चढ़ता है। यह भारत का इकलौता मंदिर है जहां यह परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि यह प्रसाद केवल भगवान भैरव के लिए होता है, भक्त को इसे नहीं लेना चाहिए। जो व्यक्ति इस नियम को तोड़ता है, उसके जीवन में बाधाएं और दुर्भाग्य आ सकता है।

4. नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश: घर ले जाना मना है प्रसाद

51 शक्तिपीठों में से एक नैना देवी मंदिर में प्रसाद केवल देवी को अर्पित होता है। यहां मान्यता है कि माता का प्रसाद मंदिर परिसर में ही ग्रहण करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इस प्रसाद को घर ले जाता है, तो यह अशुभ प्रभाव डाल सकता है। 

5. कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक: शिवलिंग से निकला प्रसाद वर्जित

कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर में एक करोड़ शिवलिंग हैं। यहां पूजा के बाद दिया गया प्रसाद केवल प्रतीकात्मक रूप से स्वीकार किया जाता है। इसे खाना या घर ले जाना अशुभ माना जाता है। खासतौर पर शिवलिंग के ऊपर से आया प्रसाद नहीं खाना चाहिए, क्योंकि यह चंडेश्वर को समर्पित होता है।

भारत के ये मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और आस्थाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा ये पांचों मंदिर अपने आप में एक अद्भुत रहस्य समेटे रखने के लिए भी जाने जाते हैं।  प्रसाद को देवता का स्वरूप माना गया है, इसलिए श्रद्धालुओं को इसे केवल श्रद्धा से स्वीकार करना चाहिए, न कि सेवन या संग्रह के लिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें: Shukra Gochar 2025: 7 नवंबर को विलासिता के कारक ग्रह का गोचर, राहु के नक्षत्र में आएंगे शुक्र, इन राशियों पर होगी प्यार-पैसों की बारिश