1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Adhik Maas 2026: इस बार 60 दिन का होगा ज्येष्ठ महीना, कब लग रहा अधिक मास और क्या होता है ये

Adhik Maas 2026: इस बार 60 दिन का होगा ज्येष्ठ महीना, कब लग रहा अधिक मास और क्या होता है ये

Adhik Maas 2026: मई 2026 के पहले सप्ताह के साथ ही ज्येष्ठ मास भी शुरू हो रहा है। इस दौरान अधिक मास का संयोग बनेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह में विष्णु पूजा का विशेष महत्व है और धार्मिक कार्यों का फल कई गुना मिलता है। चलिए जानते हैं अधिकमास की शुरुआत कब से होने जा रही है।

Adhikmaas 2026- India TV Hindi
Image Source : FILE IMAGE अधिकमास 2026

Adhik Maas 2026: मई महीने की शुरुआत के साथ ही ज्येष्ठ माह भी शुरू हो रहा है। यह हिंदू पंचांग का तीसरा महीना है, जिसे जेठ का महीना भी कहते हैं आमतौर पर यह मई-जून में पड़ता है। साल 2026 में ज्येष्ठ मास खास होगा, क्योंकि इस बार यह पूरे दो महीने तक चलेगा। इसकी वजह है अधिक मास का संयोग, जिसे धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। श्री हरि विष्णु को समर्पित इस माह में दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। चलिए जानते हैं ज्येष्ठ में अधिक मास कब से लग रहा है और ये क्या होता है। 

ज्येष्ठ मास की अवधि

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। इस बार यह सामान्य 30 दिन का न होकर पूरे 60 दिनों का होगा। इसका कारण है बीच में आने वाला अधिक मास, जो इस महीने को विशेष बना रहा है।

कब लगेगा अधिक मास

साल 2026 में अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। यही अतिरिक्त अवधि ज्येष्ठ मास को दो महीने लंबा बना रही है। हर तीन साल में आने वाला यह संयोग धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है।

क्या होता है अधिक मास

अधिक मास हिंदू पंचांग का एक अतिरिक्त महीना होता है, जिसे चंद्र और सौर वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल करीब 11 दिन का अंतर बनता है, जो तीन साल में बढ़कर 32-33 दिन यानी कि एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। इसी को संतुलित करने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है।

पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है जो कि विष्णु जी एक नाम है। इस महीने में उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

धार्मिक महत्व और मान्यताएं

इस अवधि को भक्ति और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ समय माना जाता है। लोग व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और दान-पुण्य में भाग लेते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। ऐसे में अधिक मास का यह विशेष संयोग न केवल ज्येष्ठ मास को लंबा बनाता है, बल्कि इसे आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: Jyeshtha Month Daan: ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में किया गया यह दान बदल देगा तकदीर! श्रीहरि की बरसेगी असीम कृपा