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खेल-खेल में जपा बीज मंत्र और बदल गया राजकुमार का भाग्य! पढ़ें आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पावन कथा

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की भी बड़ी महिमा बताई जाती है। इस साल ये दिव्य नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू हो रही है और इसका समापन 23 जुलाई 2026 को होगा। अगर आप गुप्त नवरात्रि का व्रत रखते हैं तो मां दुर्गा की इस पावन कथा को पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें।

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Image Source : INDIA TV आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पावन कथा

क्या आप जानते हैं कि साल में दो नवरात्रि ऐसी होती हैं जब मां दुर्गा की उपासना गुप्त रूप से की जाती है। इनमें से एक नवरात्रि माघ महीने में पड़ती है तो दूसरी आषाढ़ महीने में आती है। 15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। सामान्य नवरात्रि की तरह ही इस नवरात्रि में भी विधि विधान कलश स्थापना की जाती है। लेकिन इस नवरात्रि को जो चीज अलग बनाती है, वो है इस दौरान किए जाने वाली 10 महाविद्याओं की पूजा। जी हां, गुप्त नवरात्रि में उपासक मां अंबे के नौ स्वरूपों की पूजा के अलावा उनकी 10 खास शक्तियों की भी आराधना करते हैं। कहते हैं इनकी उपासना से ग्रह दोषों से शांति मिलती है और साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। अगर आप गुप्त नवरात्रि के व्रत रख रहे हैं तो इस दौरान इस दिव्य कथा को जरूर पढ़ें।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पावन कथा

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पावन कथा अनुसार, प्राचीन समय में एक कोशल नाम के राज्य में सुदर्शन नाम का एक राजकुमार रहा करता था। राजमहल के षड्यंत्र और विद्रोह के कारण उसकी जान खतरे में आ गई थी। जिस वजह से उसे अपनी माता के साथ जंगल में रहना पड़ रहा था। एक दिन राजकुमार जंगल में खेल रहा था कि तभी उसे पेड़ों के बीच से अनजानी आवाज सुनाई दी। राजकुमार अभी बच्चा था इसलिए उसने सुनाई दिए शब्द को बार-बार दोहराना शुरू कर दिया। राजकुमार को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि वो अनजाने में ही क्लीं बीज मंत्र का जाप कर रहा है जो मां दुर्गा का बेहद शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। जिस समय राजकुमार के साथ ये घटना घटित हो रही थी उस समय गुप्त नवरात्रि चल रही थी। राजकुमार की भक्ति से मां दुर्गा प्रसन्न हो गईं और उन्होंने उसे उसका खोया हुआ राज्य वापस प्राप्त होने का आशीर्वाद दिया। आगे चलकर ऐसा ही हुआ और राजकुमार सुदर्शन राजा बन गया। 

गुप्त नवरात्रि से जुड़ी एक दूसरी कथा के अनुसार, एक दिन ऋषि श्रृंगी पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों की परेशानियां सुन रहे थे कि तभी एक महिला उनके पास आई। महिला ने कहा कि वह मां दुर्गा की कृपा प्राप्त नहीं कर पा रही है क्योंकि उसका पति बुरे कर्मों से लिप्त रहता है। साथ ही उसे भी बुरे रास्ते पर चलने को कहता है। पति के कारण वह न तो व्रत रख पाती थी और न ही भगवान की पूजा-पाठ कर पाती थी। ऋषि श्रृंगी ने उसे बताया कि वर्ष में दो गुप्त नवरात्रियां आती हैं, जिनमें देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की पूजा होती है। अगर इन नवरात्रि में पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की उपासना की जाए तो मां प्रसन्न होंगी, जिससे उसके जीवन में सुख-शांति आएगी। साथ ही उसका पति भी बुरे कर्मों को छोड़ देगा। महिला ने ऐसा ही किया और उसके जीवन के सारे दुखों का अंत हो गया। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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