ज्योतिष शास्त्र में गुरु और शनि दोनों ही ग्रह बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मई के महीने में 14 तारीख को गुरु ग्रह वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे और अतिचारी गति शुरू करेंगे। वहीं साल 2025 में जुलाई माह में गुरु भी वक्र गति शुरू कर देंगे। अक्तूबर के महीने में गुरु अतिचारी गति करते हुए मिथुन से कर्क में गोचर करेंगे और इसके बाद दिसंबर माह वापस मिथुन राशि में वक्री गोचर कर जाएंगे। ज्योतिष में शुभ ग्रह का अतिचारी गति करना और क्रूर ग्रह का वक्री होना बड़ा महत्व रखता है। इसके चलते देश-दुनिया पर क्या प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, आइए जानते हैं।
गुरु की अतिचारी गति क्या है?
गुरु ग्रह जब अपनी सामान्य गति से अधिक तेज चलने लगते हैं तो इसे गुरु की अतिचारी गति ज्योतिष में कहा जाता है। हालांकि विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो गुरु की गति तेज नहीं होती बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वो तेज चलने लगे हैं। गति का अतिचारी होना कई तरह के बदलाव लेकर आता है। ज्योतिषीय जानकारों की मानें तो दशकों के बाद गुरु अतिचारी गति करने वाले हैं और 2032 तक गुरु अतिचारी गति करेंगे। इसका असर सभी राशियों के साथ ही देश दुनिया पर भी देखने को मिलेगा। अतिचारी गति करते हुए गुरु ग्रह 18 अक्टूबर को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
शनि वक्री 2025
शनि ग्रह इस समय मीन राशि में संचार कर रहे हैं। वहीं 13 जुलाई को ये मीन राशि में ही वक्री चाल शुरू कर देंगे। शनि के वक्री का प्रभाव भी देश-दुनिया पर देखने को मिलेगा। यानि जुलाई के बाद के कुछ महीने ऐसे रहेंगे जब गुरु अतिचारी गति करेंगे और शनि वक्री रहेंगे। इसका प्रभाव क्या होगा आइए जानते हैं।
क्या होगा देश-दुनिया पर प्रभाव?
शनि का वक्री होना और गुरु की अतिचारी गति जन-धन की हानि करवा सकती है। भविष्यफल भास्कर के अनुसार शुभ ग्रह अतिचारी गति करे और क्रूर ग्रह वक्री हो तो जनमानस को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ग्रहों की इस स्थिति के चलते असमय और बहुत अधिक वर्षा हो सकती है।
गुरु के अतिचारी होने और शनि के वक्री होने से कई प्रभाव पड़ेंगे। मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथ भविष्य फल भास्कर के अनुसार जब क्रूर ग्रह वक्री हों और शुभ ग्रह अतिचारी हों, तो असामान्य वर्षा और अकाल जैसे हालात बन सकते हैं। साल 2025 में इस ग्रहों की ऐसी ही स्थिति बनेगी। जिससे कई देशों में भुखमरी या फिर बाढ़ के हालात बन सकते हैं।
राजनीतिक उथल-पुथल और मौसम पर प्रबाव
ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार शनि और गुरु की स्थिति के चलते कई देश पतन की ओर जा सकते हैं। राष्ट्राध्यक्षों की कुर्सी छिन सकती है। ऐसा ना भी हो तो सरकार के मंत्रिमंडल में बड़ा उलटफेर होने की संभावना रहती है। गुरु के अतिचारी होने और शनि के वक्री होने से मौसम पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान शनि ग्रह वक्री होंगे जिससे असामान्य बारिश जनमानस की चिंताओं का विषय बन सकती है। इसकी वजह से किसान और उनकी फसलों पर भी बुरा असर देखने को मिल सकता है। खासकर जुलाई महीने की 15 तारीख के बाद असामान्य बारिश होने की आशंका है। किसानों की चिंताएं इस दौरान बढ़ सकती हैं।
विश्व पर प्रभाव
विश्व स्तर पर भी गुरु का अतिचारी होना और शनि का वक्री होना एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। राजनीतिक उथल-पुथल, असामान्य वर्षा के साथ ही इस दौरान कई देशों में धार्मिक विवाद उपज सकते हैं। इससे सांप्रदायिक हिंसा होने की भी आशंका है। कई देशों के बीच युद्ध के हालात बनने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर देखने को मिलेगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)
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