1. Hindi News
  2. धर्म
  3. ईश्वर की आराधना का क्या है सही तरीका, पूजा खड़े होकर करना चाहिए या बैठकर? शास्त्रों में बताए गए हैं ये नियम

ईश्वर की आराधना का क्या है सही तरीका, पूजा खड़े होकर करना चाहिए या बैठकर? शास्त्रों में बताए गए हैं ये नियम

ईश्वर की आराधना सभी करते हैं। कुछ लोग खड़े होकर पूरी पूजा निपटा लेते हैं, जबकि कुछ लोग बैठकर पूजा करते हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर मन में आता है कि भगवान की पूजा खड़े होकर करनी चाहिए या बैठकर। जानिए पूजा से जुड़े इन नियमों के पीछे की धार्मिक मान्यता।

puja niyam, worship rules, पूजा के नियम- India TV Hindi
Image Source : PINTEREST पूजा खड़े होकर करना चाहिए या बैठकर?

सनातन धर्म में पूजा-पाठ को मन की शांति और ईश्वर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम माना गया है। ज्यादातर लोग आराम से बैठकर पूजा पाठ करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को आपने खड़े होकर ईश्वर की आराधना करते भी देखा होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों स्थितियों का अलग महत्व है। पूजा करते समय बैठना क्यों जरूरी माना जाता है और आरती खड़े होकर क्यों की जाती है? पूजा के दौरान आसन, दिशा और अन्य नियमों का ध्यान रखने चाहिए। इस आर्टिकल में हम जानेंगे पूजा-पाठ से जुड़े शास्त्रीय नियमों के बारे में। 

पूजा के लिए बैठना क्यों?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित पूजा-पाठ करते समय व्यक्ति को आसन पर बैठकर ही भगवान का ध्यान और आराधना करनी चाहिए। इससे शरीर स्थिर रहता है और मन को एकाग्र करने में आसानी होती है। इसके विपरीत, खड़े रहने की स्थिति में शरीर में अस्थिरता बनी रह सकती है, जिससे पूजा के दौरान ध्यान भटकने की संभावना रहती है। इसलिए विधिपूर्वक पूजा करते समय बैठने की परंपरा है।

आरती हमेशा खड़े होकर

पूजा और आरती के नियमों में अंतर है। भगवान की आरती के समय भक्त अपने स्थान पर खड़े होकर श्रद्धा के साथ भगवान की आराधना करते हैं। वहीं पूजा के अन्य मंत्र, ध्यान और साधना से जुड़े कर्म आसन पर बैठकर करने की परंपरा है।

परिक्रमा भी खड़े होकर

पूजा होने के बाद देवी-देवता की परिक्रमा भी खड़े होकर करने की परंपरा है। मूर्ति या पूजा स्थल की परिक्रमा करते समय मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखें। धार्मिक मान्यताओं में इसे पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

सही दिशा का रखें ध्यान

पूजा करते समय दिशा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट या पूजा स्थल की स्थिति के अनुसार इसमें व्यावहारिक अंतर हो सकता है।

आसन पर बैठकर करें पूजा

पूजा के लिए साफ और निर्धारित आसन का इस्तेमाल करना चाहिए। बिना आसन के सीधे जमीन पर बैठकर पूजा करने से बचें। पूजा के बाद आसन के नीचे की भूमि को प्रणाम करने की भी मान्यता है।

पवित्र वस्तुओं का रखें सम्मान

शालिग्राम, शिवलिंग, शंख, जनेऊ और देवी-देवताओं की मूर्तियों को सीधे जमीन पर न रखें। इन्हें साफ कपड़े, आसन या उचित पात्र में रखना चाहिए। पूजा और आरती के समय स्वच्छता का ध्यान रखना और सिर ढंकना भगवान के प्रति सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: इस साल कब से शुरू हो रहे हैं पितृ पक्ष? जानिए सही तारीख और तिथियों की पूरी लिस्ट