आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से सदैव ही लोगों का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने अपने नीतिशास्त्र में जीवन, समाज और रिश्तों को लेकर कई ऐसी बातें बताई हैं जो आज के समय में एकदम सही साबित होती हैं। चाणक्य ने अपनी नीतियों में एक सच्चे मित्र की पहचान करने का तरीका भी बताया है। चाणक्य कहते हैं कि सच्चा मित्र वो नहीं जो सिर्फ आपके अच्छे समय में ही साथ रहे, बल्कि सच्चा मित्र वह है जो आपके सुख में भले ही खड़ा न हो लेकिन दुख में जरूर साथ खड़ा रहे। चलिए आपको बताते हैं चाणक्य ने सच्चे मित्र की पहचान का कौन सा तरीका बताया है।
मित्रता पर चाणक्य नीति का श्लोक:
आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रु-संकटे।
राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥
श्लोक का अर्थ - इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य कहना चाहते हैं कि जो व्यक्ति आपके रोग या बीमारी के समय, किसी बड़े संकट में, अकाल या भुखमरी के समय, शत्रु के आक्रमण के समय, राजदरबार या अदालती मामलों में और श्मशान (मृत्यु के बाद) तक आपके साथ खड़ा रहे, वही वास्तव में आपका सच्चा मित्र और बंधु है।
इन 6 मौकों पर होती है सच्चे मित्र की पहचान
Image Source : india tvसच्चे मित्र की पहचान का तरीका
आचार्य चाणक्य के अनुसार, जीवन के इन 6 कठिन क्षणों में जो व्यक्ति बिना स्वार्थ के आपके साथ बना रहे, वही आपका असली मित्र या अपना है:
- बीमारी या शारीरिक कष्ट में - जब कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी या किसी शारीरिक समस्या से जूझ रहा हो, उस समय जो मित्र साथ खड़ा रहे, वही सच्चा बंधु है।
- बड़े संकट में - जीवन में जब भी कोई बड़ी विपत्ति आ जाए, उस समय जो आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे। वही आपका असली दोस्त होता है।
- अकाल या आर्थिक तंगी में - जब आपका आर्थिक रूप से बुरा दौर चल रहा हो, उस समय जो आपका हाथ थाम ले वही आपका सच्चा मित्र है।
- शत्रु के संकट में - जब कोई विरोधी या शत्रु आपको परेशान करने की कोशिश करे, तब बिना डरे जो आपकी ढाल बनकर खड़ा रहे वही आपका सच्चा साथी है।
- राजदरबार या कानूनी मामलों में - जो व्यक्ति आपके कानूनी मामलों में भी आपका साथ न छोड़े और आपको परेशानी से बाहर निकालने में मदद करे, वही आपका सबसे अच्छा मित्र है।
- अंतिम संस्कार या श्मशान में - जो व्यक्ति जीवन के अंतिम पड़ाव में या परिवार में किसी अनहोनी के समय श्मशान घाट तक आपका साथ निभाए वही आपका सच्चा बंधु कहलाता है।
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