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Chandra Grahan 2026: क्या 31 मई को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर लग रहा है चंद्र ग्रहण? जानें क्या है 'स्कॉर्पियो ब्लू मून'

Chandra Grahan 2026: 31 मई को ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पड़ रही है। लेकिन इसे लेकर लोगों के मन में काफी कन्फ्यूजन चल रहा है। दरअसल इस पूर्णिमा को स्कॉर्पियो ब्लू मून कहा जा रहा है। ऐसे में कई लोग इस भ्रम में हैं कि इस दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस लेख में हम आपकी सारी कन्फ्यूजन तुरंत दूर कर देंगे।

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Image Source : UNSPLASH.COM ज्येष्ठ पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं लग रहा है।

Chandra Grahan 2026: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा को 'स्कॉर्पियो ब्लू मून' (Scorpio Blue Moon) का नाम दिया गया है। दरअसल जब भी किसी महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं तो दूसरी वाली पूर्णिमा के चांद को ब्लू मून कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 31 मई 2026 को होने वाली पूर्णिमा के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में मौजूद रहेगा, इसलिए इसे स्कॉर्पियो ब्लू मून कहा जा रहा है। लेकिन इस दिन चंद्र ग्रहण नहीं है। बता दें साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा और पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लग चुका है।

28 अगस्त 2026 को लगेगा चंद्र ग्रहण

साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन लगेगा। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त की सुबह 8:04 बजे होगी और समापन दोपहर 11:22 बजे होगा। ये ग्रहण अफ्रीका, उत्तर दक्षिण अमेरिका, यूरोप के ज्यादातर इलाकों, दक्षिणी पश्चिमी एशिया के देशों, अफगानिस्तान, सऊदी अरब, पाकिस्तान, इराक, ईरान और हिंद-प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। बता दें भारत में यह चन्द्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा इसलिए इसका कोई भी सूतक भी मान्य नहीं होगा। 

चंद्र ग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए

  • चंद्र ग्रहण में नया और शुभ काम नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण काल में भोजन न तो पकाना चाहिए और न ही खाना। कहते हैं इससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • ग्रहण के दौरान मंदिर में प्रवेश करने से भी मना किया जाता है और मूर्ति-पूजन भी नहीं किया जाता। 
  • इस दौरान तुलसी में भी जल नहीं चढ़ाया जाता है।
  • ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने और कैंची, चाकू, सुई का इस्तेमाल करने की मनाही होती है। 
  • ग्रहण काल शुरू होने से पहले ही खाने-पीने की चीजों में तुलसी दल डालकर रख दी जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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