Chitragupta Puja 2025: चित्रगुप्त महाराज मनुष्यों के कर्मों का लेखा जोखा रखते हैं। हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा की जाती है। साल 2025 में चित्रगुप्त पूजा 23 अक्टूबर को की जाएगी। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि चित्रगुप्त पूजा का महत्व क्या है, इस दिन किस कथा का पाठ आपको करना चाहिए और चित्रगुप्त महाराज को प्रसन्न करने के लिए किन मंत्रों का जप करना चाहिए।
चित्रगुप्त पूजा विधि
चित्रगुप्त पूजा के दिन बहीखातों की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन कलम, दवात आदि को भी पूजा जाता है। चित्रगुप्त पूजा के दिन आपको स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और साथ ही पूजा स्थल की भी सफाई करनी चाहिए। इसके बाद धूप, दीप जलाकर पूजा आरंभ करनी चाहिए और चित्रगुप्त महाराज को पुष्प अर्पित करने चाहिए। भोग के रूप में चित्रगुप्त महाराज को मीठी चीजें जैसे- खीर, मिठाई आदि आप अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही कलम, पुस्तक, इत्र आदि भी चित्रगुप्त महाराज को अर्पित करें। इसके बाद चित्रगुप्त जी के मंत्रों का जप करें और अंत में आरती पढ़ें।
चित्रगुप्त पूजा में करें इन मंत्रों का जप
ध्यान मंत्र- मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्। लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।
प्रचलित मंत्र- ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः
चित्रगुप्त पूजा में करें इस कथा का पाठ
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय सौदास नाम का एक निर्दयी और बेहद क्रूर राजा हुआ करता है। उसका व्यवहार क्रूर होने की वजह से प्रजा भी उस से दुखी थी। सौदास प्रजा पर अत्याचार भी करता था। एक बार सौदास अपने राज्य में घूम रहा था तो उसे एक ब्रह्माण तनलीनता से पूजा करता दिखाई दिया। राजा के मन में जिज्ञासा जागी और उसने ब्राह्मण से पूजा की तुम किस देवता की पूजा कर रहे हो और क्यों? इस पर वह ब्राह्मण बोला कि आज कार्तिक शुक्ल द्वितीय है इसलिए में यमराज के लेखपाल चित्रगुप्त महाराज की पूजा कर रहा हूं। चित्रगुप्त की पूजा से जीवन के सभी पाप मिट जाते हैं। राजा ब्राह्मण की बात से प्रभावित हुआ और उसने भी चित्रगुप्त और यमराज की पूजा की। जब मृत्यु के बाद राजा यमलोक पहुंचा तो चित्रगुप्त ने उसके कर्मों का लेखा जोखा देखा। चित्रगुप्त ने यमराज से कहा कि इस राजा ने आजीवन पाप किए हैं लेकिन अंत समय आने से पूर्व इसने यमराज और चित्रगुप्त की श्रद्धापूर्वक पूजा की है इसलिए इसे नरक नहीं भेजा जा सकता। अपने पूजा के प्रताप से राजा को मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज भी जो व्यक्ति कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज और चित्रगुप्त की पूजा करता है उसको जीवन में सुख-शांति और मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
चित्रगुप्त पूजा का क्या महत्व है?
ऐसा माना जाात है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को चित्रगुप्त महाराज प्रकट हुए थे इसलिए आज भी इस दिन चित्रगुप्त पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चित्रगुप्त का प्राकाट्य भगवान ब्रह्मा के चित से हुआ था। चित्रगुप्त पूजा के दिन बही खातों, कलम, दवात आदि की पूजा करना शुभ होता है। चित्रगुप्त महाराज की पूजा करने से शिक्षा के साथ ही व्यापार के क्षेत्र में भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
Chitragupta Puja Vidhi And Samagri List: चित्रगुप्त पूजा की विधि, मुहूर्त, सामग्री लिस्ट, मंत्र, आरती और महत्व सबकुछ जानिए यहां
Chhath Puja Samagri List: छठ पूजा कब से शुरू है? जानिए इस महापर्व में क्या-क्या सामान लगेगा