Dhumavati Jayanti 2026: पमाता पार्वती का यह स्वरूप समस्त बाधाओं का नाश करने वाला माना गया है। मान्यताओं के अनुसार देवी धूमावती की विधिवत पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती और समस्त रोगों का भी नाश हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां पार्वती के इस शक्तिशाली स्वरूप की आराधना सुहागिन महिलाएं नहीं करतीं। दरअसल ये माता का विधवा रूप माना जाता है। चलिए जानते हैं मां पार्वती के धूमावती बनने की पौराणिक कथा।
माता धूमावती की कथा
पौराणिक कथा अनुसार, एक समय की बात है कि माता पार्वती को बहुत तेज भूख का अनुभन हुआ। उस समय कैलाश पर्वत पर खाने के लिए कुछ भी नहीं था। उन्होंने भगवान शिव से अपनी क्षुधा की तृप्ति के लिए भोजन प्रदान करने का निवेदन किया। लेकिन भोलेनाथ समाधि में लीन थे। समय बीतता जा रहा था और माता पार्वती की भूख बढ़ती जा रही थी। बारम्बार आग्रह करने पर भी जब भोजन का प्रबन्ध नहीं हुआ तो भूख की तीव्रता से बैचेन होकर माता पार्वती ने भगवान शिव को ही निगल लिया। भगवान शिव के गले में विष होने के कारण पार्वती जी के शरीर से धुआं निकलने लगा और माता कुरूप दिखने लगीं। इसके बाद भगवान शिव ने माता से कहा कि तुम्हारी सम्पूर्ण देह धूम्र युक्त होने के कारण तुम धूमावती के नाम से जानी जाओगी। जिस समय तुमने मेरा भक्षण कर लिया उसी समय तुम विधवा हो गयीं। अतः इस स्वरूप में तुम विधवा के रूप में पूजी जाओगी। इसी कारण से माता के इस स्वरूप की उपासना सिर्फ पुरुष ही करते हैं। सुहागिन महिलाओं के लिए धूमावती माता की पूजा करना वर्जित माना जाता है।
माता धूमावती की उपासना का महत्व
- धार्मिक मान्यताओं अनुसार देवी धूमावती की पूजा करने से जीवन की सभी समस्याएं और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
- इनकी पूजा से कुंडली में मौजूद दोषों से भी छुटकारा मिल जाता है।
- देवी की उपासना से आत्मबल और धैर्य भी बढ़ता है।
- देवी धूमावती केतु ग्रह को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनकी पूजा से केतु से जुड़ी समस्त बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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