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शिवलिंग पर जल टपकाने वाले घड़े को क्या कहते हैं? 90% लोग नहीं जानते होंगे नाम और इसे लगाने की वजह!

आपने शिव मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर तांबे या किसी अन्य धातु के घड़े को लटका देखा होगा, जिसमें दूध मिश्रित जल बूंद-बूंद कर टपकता रहता है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर शिवलिंग पर लगातार जल टपकाने वाले घड़े को क्या कहा जाता है।

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Image Source : PINTEREST शिवलिंग पर जल टपकाने वाले मटके का नाम

भगवान शिव को त्रिनेत्र, भोलेनाथ और महादेव जैसे कई नामों से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे सृष्टि के आदि और अंत दोनों हैं। माना जाता है कि उनकी पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। भगवान शिव की पूजा में कई तरह की परंपराएं हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं। शिवजी की पूजा में इन परंपराओं और नियमों का का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर लटका हुआ पानी से भरा घड़ा अक्सर लोगों का ध्यान खींचता है, लेकिन बहुत कम लोग इसके नाम और महत्व को जानते हैं। तो चलिए जानते हैं शिवलिंग पर पानी टपकाने वाले घड़े को क्या कहलाता है

शिवलिंग पर पानी टपकाने वाली मटकी का नाम?

मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर जो पानी से भरा घड़ा लटकाया जाता है, उसे गलंतिका कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक गलंतिका का मतलब जल पिलाने वाला बर्तन या करवा होता है। तांबे या पीतल की धातु से बने इस बर्तन में एक छोटा छेद होता है, जिससे पानी बूंद-बूंद कर शिवलिंग पर गिरता रहता है। यह घड़ा मिट्टी या अन्य धातु से बना हो भी सकता है।

क्यों टपकाया जाता है लगातार जल

गलंतिका का मुख्य उद्देश्य है शिवलिंग पर निरंतर जल अर्पित करना। यह ध्यान रखा जाता है कि पानी लगातार गिरता रहे और पूरी तरह खत्म न हो। इसे भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने का प्रतीक माना जाता है।

वैशाख मास में बढ़ जाता है महत्व

अप्रैल मई की गर्मी के दौरान आने वाले वैशाख मास में इस परंपरा का विशेष महत्व होता है। इस समय तापमान अधिक होने के कारण शिवलिंग पर लगातार जल अर्पित किया जाता है, ताकि भगवान शिव को ठंडक मिलती रहे।

पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता

धार्मिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कालकूट नामक विष निकला था। यह विष इतना भयंकर था कि पूरे संसार में हाहाकार मच गया। तब भगवान शिव ने अपने कंठ में उसे धारण कर संसार को बचाया था। मान्यता है इसी वजह से उनका नाम नीलकंठ पड़ा। इस विष के प्रभाव से उनके शरीर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न हुई, जिसे कम करने के लिए भोलेनाथ पर जल चढ़ाया गया। तभी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने और गर्मियों में गलंतिका बांधने की परंपरा शुरू हुई

जल अर्पण का धार्मिक महत्व

शिवलिंग पर जल चढ़ाना आज भी एक महत्वपूर्ण पूजा मानी जाती है। मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को शांति, सुख और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। कहते हैं कि जल अर्पित करने से शिवजी को शांति और ठंडक मिलती है। खासकर गर्मियों में गलंतिका के माध्यम से लगातार जल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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