Ganesh Atharvashirsha PDF: गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से दूर होंगी विघ्न-बाधाएं, हमेशा रहेगी आप पर बप्पा की कृपा
Ganesh Atharvashirsha PDF: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आपको गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ अवश्य करना चाहिए। अथर्वशीर्ष का पाठ करने से आपको जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

Ganesh Atharvashirsha PDF: गणेश चतुर्थी के हर बुधवार के दिन श्रीगणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। थर्वशीर्ष का पाठ करने से न केवल गणेश भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि कुंडली के सभी ग्रह भी शांत हो जाते हैं। मानसिक और शारीरिक सुख की प्राप्ति भी आपको गणेश अथर्वशीर्ष के पाठ से प्राप्त होती है। जीवन में आ रही विघ्न-बाधाओं से भी आप गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से मुक्ति पा सकते हैं।
।।अथ श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्तुति।।
ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।
त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।
त्वमेव केवलं धर्तासि।।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।
त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।
ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।
अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।
अव श्रोतारं। अवदातारं।।
अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।
अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।
अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।
अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।
सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।
सर्व जगदिदं त्वत्तो जायते।
सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।
त्वं गुणयत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
त्वं देहत्रयातीत: त्वं कालत्रयातीत:।
त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।
त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।
त्वं शक्तित्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं।
वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।
गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।
अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।
तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।
गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।
अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।
नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।
गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। गणपति देवता।।
ॐ गं गणपतये नम:।।
गणेश अथर्वशीर्ष की स्तुति के लाभ
- एकाग्रता में वृद्धि दुखों का नाश
- मानसिक शांति की प्राप्ति
- शारीरिक पीड़ाओं से मुक्ति
- आत्मविश्वास में वृद्धि
- प्रतिदिन पाठ करने से जीवन में स्थिरता आती है
- कुंडली के सभी ग्रह शांत होते हैं
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें: