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Sharad Purnima 2026 Moon Rise Time: आज चांद कितने बजे निकलेगा? जानिए चंद्रोदय के बाद क्या करना चाहिए

Sharad Purnima 2026 Moon Rise Time: शरद पूर्णिमा आज! जानिए आपके शहर में चांद निकलने का सटीक समय और चंद्रोदय के बाद मां लक्ष्मी व चंद्र देव को प्रसन्न करने के उपाय।

Sharad Purnima 2026- India TV Hindi
Image Source : PINTEREST शरद पूर्णिमा 2026

शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है। हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना गया है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्र देव और माता लक्ष्मी की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना शुभ होता है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय क्या है, चंद्र दर्शन का शुभ मुहूर्त कब रहेगा और चांद की रोशनी में खीर कब रखनी है। 

चंद्रोदय का समय 

देश की राजधानी दिल्ली में चंद्रोदय लगभग 5 बजे के पास हो चुका है, हालांकि देश के अलग-अलग स्थानों पर चंद्रोदय का समय अलग होगा। 

  • दिल्ली: शाम 5:00 बजे
  • मुंबई: शाम 5:28 बजे
  • लखनऊ: शाम 4:47 बजे
  • कानपुर: शाम 4:50 बजे
  • प्रयागराज: शाम 4:45 बजे
  • वाराणसी: शाम 4:40 बजे
  • पटना: शाम 4:31 बजे
  • कोलकाता: शाम 4:21 बजे
  • जयपुर: शाम 5:06 बजे
  • भोपाल: शाम 5:05 बजे
  • इंदौर: शाम 5:12 बजे
  • नोएडा: शाम 5:00 बजे
  • बेंगलुरु: शाम 5:15 बजे
  • अहमदाबाद: शाम 5:25 बजे
  • चंडीगढ़: शाम 4:59 बजे
  • चेन्नई: शाम 5:04 बजे

चंद्र दर्शन और खीर रखने का शुभ समय 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चंद्र दर्शन और चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का सबसे शुभ मुहूर्त, निशिता काल होता है। 

  • निशिता काल: 25 अक्टूबर 11:40 PM से 26 अक्टूबर  12:31 AM तक

खीर खाने का समय

चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। इसे खाने से पहले खीर का भोग माता लक्ष्मी को अवश्य लगाएं।

चंद्रोदय के बाद क्या करना चाहिए?

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा के बाद कुछ कार्यों को करना बेहद शुभ साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इन कार्यों के बारे में।   

  • माता लक्ष्मी की पूजा और जागरण: शरद पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है। इसलिए रात के समय मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए साथ ही कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह काम चंद्रोदय के बाद करना ही सबसे शुभ होता है।     
  • चंद्र देव को अर्घ्य दें: चंद्रोदय होने के बाद आपको खुले स्थान या छत पर जाना चाहिए। तांबे या चांदी के लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत, सफेद फूल और मिश्री मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक शांति मिलती है। साथ ही ऐसा करने से धन-धान्य की प्राप्ति भी आपको हो सकती है।    
  • चांदनी रात में खीर रखना: शरद पूर्णिमा की रात गाय के दूध से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे (चांद की रोशनी में) रखने की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है, जो खीर में समा जाता है। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में खाने से आरोग्यता और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।   
  • दान-पुण्य: शरद पूर्णिमा के व्रत के बाद अगले दिन आप दान-पुण्य कर सकते हैं ऐसा करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद आपको मिलता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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