शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है और इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आईं हैं। क्या आप जानते हैं कि हर नवरात्रि में माता एक अलग वाहन पर सवार होकर आती हैं। कभी माता नाव पर बैठकर आती हैं तो कभी शेर, घोड़े या हाथी पर। माता की हर एक सवारी अलग-अलग प्रकार के संकेत देती हैं। माता जिस वाहन पर सवार होकर आती हैं उससे ये संदेश मिलता है कि आने वाला समय देश-दुनिया के लिए कैसा रहने वाला है। धर्म-शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार माता का हाथी पर बैठकर आना बेहद खास माना जाता है। जानिए इससे भविष्य से जुड़े क्या शुभ संकेत मिलते हैं।
माता का हाथी पर आगमन कैसा होता है?
इस साल माता रानी का आगमन हाथी पर हुआ है जो कि बेहद शुभ संकेत हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस साल माता हाथी पर बैठकर आती हैं उस साल अच्छी वर्षा होने और सुख-समृद्धि के संकेत मिलते हैं।
माता दुर्गा की सवारी कैसे तय होती है?
देवीपुराण के अनुसार मां दुर्गा के आगमन के दिन से उनकी सवारी तय होती है। इस संबंध में इस श्लोक में बताया गया है-
शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे।
गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥
इस श्लोक में बताया गया है कि नवरात्र में माता के आगमन का वाहन वार के आधार पर निर्धारित होता है। जब नवरात्रि पर्व सोमवार या रविवार को शुरू होता है तब मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जाता है। जब यह त्योहार मंगलवार या शनिवार को प्रारंभ होता है तो उनका वाहन घोड़ा माना जाता है। वहीं बुधवार से शुरू होने वाले नवरात्रि पर्व में माता नाव पर सवार होकर आती हैं, जबकि गुरुवार और शुक्रवार को माता का आगमन पालकी पर होता है।
माता की हर सवारी का रहस्य
देवी पुराण के इस श्लोक के अगले हिस्से में बताया गया है-
गजेश जलदा देवी क्षत्रभंग तुरंगमे।
नौकायां कार्यसिद्धिस्यात् दोलायों मरणधु्रवम्॥
- इसका मतलब है कि जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो उस साल के लिए अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि के संकेत मिलते हैं।
- जब माता दुर्गा घोड़े पर आती हैं, तो शासन में बदलाव, युद्ध की स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं के संकेत मिलते हैं।
- जब माता नौका पर आती हैं, तब कार्यों की सिद्धि होती है। माता की यह सवारी साधकों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने का संदेश देती है।
- जब माता पालकी पर आती हैं तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, महामारी और अशांति का संकेत मिलता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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