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Holika Dahan Parikrama: 1, 3 या 7, कितनी बार करें होलिका की परिक्रमा? जानें सही संख्या, धार्मिक आधार और पूरी विधि

Holika Dahan Parikrama: होलिका दहन के समय परिक्रमा की संख्या का विशेष महत्व माना जाता है। आमतौर पर 3 या 7 परिक्रमा को शुभ बताया गया है, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक आधार भी है। यहां जानिए होलिका की अग्नि की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए।

Holika Dahan Parikrama- India TV Hindi Image Source : PTI कितनी बार करें होलिका की परिक्रमा?

Holika Dahan Parikrama: हिंदू धर्म में होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होली से एक रात पहले होलिका दहन किया जाता है। इस अग्नि को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। होलिका की अग्नि की परिक्रमा लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि होलिका की परिक्रमा 1, 3 या 7 बार करनी चाहिए? तो आइए जानते हैं शास्त्रों में होलिका की अग्नि की परिक्रमा करने का क्या आधार बताया गया है और परिक्रमा लगाने की सही विधि क्या है।

होलिका दहन का धार्मिक महत्व

होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ी मानी जाती है, जिसमें अग्नि के माध्यम से बुराई का अंत और भक्ति की विजय का संदेश मिलता है। इस अग्नि को नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करने वाली माना जाता है। बड़े-बुजुर्गों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का माध्यम भी है।

1, 3 या 7 परिक्रमा का धार्मिक आधार

शास्त्रों में होलिका की 3 या 7 परिक्रमा को शुभ बताया गया है। तीन परिक्रमा त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। वहीं सात परिक्रमा जीवन के सात चक्रों और सात वचनों की शुद्धि का संकेत देती है। कुछ लोग एक परिक्रमा भी करते हैं, जिसे श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पारंपरिक रूप से 3 या 7 परिक्रमा अधिक प्रचलित हैं। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता मानी गई है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक वजह

होलिका दहन के समय अग्नि तेज जलती है, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है। माना जाता है कि अग्नि की गर्मी वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्वों को कम करने में सहायक होती है। वहीं, आध्यात्मिक दृष्टि से होलिका की परिक्रमा करने का अर्थ है ईश्वर को जीवन का केंद्र मानना। अग्नि के चारों ओर घूमना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने जीवन की नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मक ऊर्जा को अपनाना चाहते हैं। इससे मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है।

होलिका परिक्रमा लगाने की सही विधि

  1. परिक्रमा शुरू करने से पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर ईश्वर का ध्यान करें।
  2. हमेशा घड़ी की दिशा में ही परिक्रमा करें, इसे शुभ माना जाता है।
  3. परिक्रमा करते समय सरल मंत्र का जाप करें और मन में कृतज्ञता का भाव रखें।
  4. अंत में अग्नि को प्रणाम कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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