सनातन धर्म में घर का मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का केंद्र होता है। यहां रखी गई मूर्तियां और तस्वीरें सकारात्मक वातावरण बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, पूजा-घर में देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें सही रूप, संख्या और स्थिति में रखनी चाहिए। कुछ मूर्तियां और चित्र पूजा घर में न रखने की सलाह दी जाती है। जानें घर के मंदिर के जुड़े जरूरी धार्मिक और वास्तु नियम।
खंडित मूर्तियां न रखें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-घर में कभी भी टूटी या खंडित मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर किसी कारण से मूर्ति क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसकी नियमित पूजा नहीं की जाती। ऐसी मूर्तियों का सम्मानपूर्वक विसर्जन करने या किसी उचित स्थान पर रखने की परंपरा बताई गई है।
एक देवता की कई प्रतिमाएं
कुछ धार्मिक मान्यताओं में एक ही देवी-देवता की कई मूर्तियां या तस्वीरें एक साथ रखने से बचने की सलाह दी गई है। माना जाता है कि पूजा-घर में हर देवता की एक मुख्य प्रतिमा या तस्वीर रखना अधिक उचित होता है, जिससे पूजा स्थल व्यवस्थित बना रहता है।
उग्र स्वरूप से बचें
घर के मंदिर में देवी-देवताओं की शांत और सौम्य रूप वाली तस्वीरें अधिक शुभ मानी जाती हैं। मान्यता है कि युद्ध या अत्यधिक क्रोधित स्वरूप दर्शाने वाली तस्वीरें घरेलू पूजा-घर की बजाय बड़े मंदिरों या विशेष धार्मिक स्थानों के लिए अधिक उपयुक्त होती हैं।
बहुत बड़ी मूर्तियां न रखें
घरेलू मंदिर में बहुत बड़ी मूर्तियां स्थापित नहीं करनी चाहिए। छोटी प्रतिमाओं की पूजा करना आसान होता है और उनकी नियमित साफ-सफाई व देखभाल भी सुविधाजनक रहती है।
साफ-सफाई रखें
घर के मंदिर में रखी मूर्तियों और तस्वीरों की समय-समय पर सफाई करना जरूरी माना जाता है। धूल या गंदगी जमा होने से पूजा स्थल की गरिमा प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसी खास मौके का इंतजार न करें। अपने मंदिर को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखना चाहिए।
इन बातों का भी रखें ध्यान
पूजा घर में अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। नियमित रूप से दीपक या धूप-अगरबत्ती जलाएं। पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखने का प्रयास करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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