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भोलेनाथ की पूजा में शामिल नहीं किया जाता केतकी फूल, ब्रह्मा के झूठ और शिव के श्राप से जुड़ी है वजह

सावन में भगवान शिव की पूजा के दौरान भक्त बेलपत्र, धतूरा, आक और भांग जैसी प्रिय चीजें अर्पित करते हैं, लेकिन केतकी का फूल शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके पीछे ब्रह्मा और विष्णु के विवाद तथा केतकी पुष्प से जुड़ी एक पौराणिक कथा है।

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Image Source : PINTEREST शिव को क्यों नहीं चढ़ाते केतकी फूल

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान मंदिरों में भोलेनाथ के अभिषेक से लेकर विशेष पूजा तक की जाती है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करते हैं। लेकिन शिव पूजा में कुछ वस्तुओं को चढ़ाना निषेध भी माना गया है। इन्हीं में केतकी का फूल शामिल है। केतकी भगवान विष्णु को प्रिय है, लेकिन महादेव को यह पुष्प अर्पित नहीं किया जाता। जानिए इसके पीछे क्या कारण है।

ब्रह्मा-विष्णु विवाद

सनातन धर्म में शिव पुराण का विशेष महत्व बताया गया है। इसी से जुड़ी कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। विवाद बढ़ने पर इसका फैसला महादेव के सामने करने की बात हुई। तब महादेव ने अपनी दिव्य शक्ति से एक विशाल और अनंत शिवलिंग प्रकट किया।

मिली बड़ी चुनौती

महादेव ने दोनों से कहा कि जो इस अनंत शिवलिंग का आदि या अंत खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। ब्रह्माजी शिवलिंग का आदि खोजने नीचे की ओर गए, जबकि भगवान विष्णु उसका अंत तलाशने ऊपर की दिशा में चले गए। काफी प्रयास के बावजूद दोनों को शिवलिंग का कोई सिरा नहीं मिला। भगवान विष्णु ने अपनी असफलता स्वीकार कर महादेव के सामने नतमस्तक होकर सत्य स्वीकार कर लिया।

केतकी से मांगी गवाही

कथा के अनुसार, ब्रह्माजी भी शिवलिंग का आदि नहीं खोज पाए। वापस लौटते समय उन्हें रास्ते में केतकी का फूल दिखाई दिया। अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए ब्रह्माजी ने केतकी पुष्प से अपनी बात की पुष्टि करने के लिए कहा। केतकी ने भी ब्रह्माजी की बात का साथ देने का निर्णय लिया।

महादेव को पता था सच

इसके बाद ब्रह्माजी केतकी फूल के साथ महादेव के पास पहुंचे और दावा किया कि उन्होंने शिवलिंग का आदि खोज लिया है। उन्होंने केतकी के फूल को अपनी बात का प्रमाण बताया। लेकिन महादेव जानते थे कि ब्रह्माजी सत्य नहीं बोल रहे हैं। केतकी पुष्प ने भी इस झूठी बात की पुष्टि कर दी।

मिला शिव का श्राप

ब्रह्माजी के झूठ से भगवान शिव क्रोधित हो गए। कथा के अनुसार, महादेव ने ब्रह्माजी का पांचवां सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि उनकी पूजा में इसे शामिल नहीं किया जाएगा। इसी मान्यता के कारण शिव जी की पूजा में केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित माना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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